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पाकिस्तान में भीषण आतकी हमला, खचाखच भरे बाजार में बम ब्लास्ट; 9 की दर्दनाक मौत

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Source :- LIVE HINDUSTAN

पाकिस्तान के लक्की मरवत (खैबर पख्तूनख्वा) में एक रिक्शा बम ब्लास्ट में 9 लोगों की मौत हो गई और 24 से अधिक घायल हैं। इस खौफनाक आतंकी हमले के पीछे TTP पर शक गहराया है। पढ़ें पूरी खबर और विवाद की इनसाइड स्टोरी।

पाकिस्तान के अफगानिस्तान की सीमा से लगे उत्तर-पश्चिमी हिस्से के एक भीड़भाड़ वाले बाजार में भयानक बम विस्फोट हुआ। यह हमला इस बात का ताजा संकेत है कि इस सीमावर्ती क्षेत्र में हिंसा लगातार बढ़ रही है। पुलिस के अनुसार, एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से लदे एक वाहन को उड़ा दिया, जिसमें कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई और 35 अन्य घायल हो गए।

यह हमला खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के लक्की मरवत जिले में हुआ। स्थानीय पुलिस प्रमुख अजमत उल्लाह के अनुसार, विस्फोटकों को एक रिक्शे में लगाया गया था, जिसमें बाजार के बीचों-बीच धमाका किया गया।

इस हमले में कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई है। मरने वालों में दो ट्रैफिक पुलिस अधिकारी और एक महिला भी शामिल हैं। इसके अलावा, दो दर्जन (24) से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

किस पर है शक?

फिलहाल किसी भी आतंकी समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि, मुख्य संदेह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) पर है, जिसे पाकिस्तानी तालिबान भी कहा जाता है।

TTP का कनेक्शन: TTP और अफगानिस्तान की तालिबान सरकार दोनों अलग-अलग गुट हैं, लेकिन वे वैचारिक रूप से एक-दूसरे के सहयोगी माने जाते हैं। हाल के वर्षों में TTP ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ अपने अभियानों और हमलों को काफी तेज कर दिया है।

हालिया तनाव और पूर्व की घटनाएं

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब कुछ ही दिन पहले इसी प्रांत के पास स्थित बन्नू जिले में एक और बड़ा आतंकी हमला हुआ था। शनिवार की देर रात बन्नू में एक सुरक्षा चौकी पर आत्मघाती बमबारी और गोलीबारी की गई थी, जिसमें 15 पुलिस अधिकारी मारे गए थे। पाकिस्तान ने उस हमले के लिए भी सीधे तौर पर TTP को जिम्मेदार ठहराया था।

इस घटना के विरोध में इस्लामाबाद (पाकिस्तान सरकार) ने एक वरिष्ठ अफगान राजनयिक को तलब किया था और अपनी कड़ी आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी।

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक विवाद

इस तरह के हमलों ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच कूटनीतिक और सीमा विवाद को बहुत गहरा कर दिया है। पाकिस्तानी अधिकारी लंबे समय से यह आरोप लगाते रहे हैं कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार TTP के आतंकवादियों को अपने देश में पनाह दे रही है और उन्हें सुरक्षित ठिकाने मुहैया करा रही है।

अफगानिस्तान का इनकार

काबुल (अफगान सरकार) ने हमेशा इन आरोपों का खंडन किया है। उनका कहना है कि वे किसी भी चरमपंथी गुट को दूसरे देशों पर हमला करने के लिए अफगान ज़मीन का इस्तेमाल नहीं करने देते।

2021 के बाद से स्थिति: अगस्त 2021 में जब से अफगानिस्तान में तालिबान सत्ता में लौटा है, तब से TTP और अन्य चरमपंथी गुटों के हौसले बुलंद हो गए हैं। इसका सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ा है, जहां आतंकी घटनाओं में भारी उछाल आया है।

शांति के प्रयास और वर्तमान स्थिति: दोनों देशों के बीच तनाव इतना अधिक है कि फरवरी के अंत से लेकर अब तक सीमा पर हुई गोलीबारी और संघर्ष में सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं।

चीन की मध्यस्थता: बिगड़ते हालात को देखते हुए अप्रैल की शुरुआत में चीन ने दोनों देशों (पाकिस्तान और अफगानिस्तान) के बीच मध्यस्थता करते हुए शांति वार्ता आयोजित कराई थी।

नतीजा: इस वार्ता के बाद हालांकि संघर्ष की तीव्रता थोड़ी कम हुई है, लेकिन सीमा पार से छिटपुट झड़पें और इस तरह के आतंकी हमले अभी भी जारी हैं।

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SOURCE : LIVE HINDUSTAN