Home विश्व समाचार ‘पाकिस्तान पर भरोसा नहीं है’, अमेरिकी सांसद ने ईरान से बातचीत में...

‘पाकिस्तान पर भरोसा नहीं है’, अमेरिकी सांसद ने ईरान से बातचीत में मध्यस्थ के रोल पर उठाए सवाल

12
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान पिछले कुछ महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने की कोशिश कर रहा था। इस दौरान कई दौर की अप्रत्यक्ष वार्ताएं भी हुईं, जिनमें पाकिस्तान ने संदेशवाहक और मध्यस्थ दोनों की भूमिका निभाई।

अमेरिका और ईरान में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थ की भूमिका पर अब सवाल उठने लगे हैं। अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान पर अविश्वास जताया है। उन्होंने कहा कि वह इस्लामाबाद को निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं मानते। उनका यह बयान उस रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें दावा किया गया कि पाकिस्तान ने ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस इस्तेमाल करने की इजाजत दी थी ताकि वे अमेरिकी हमलों से बच सकें। इस मुद्दे ने अमेरिका में राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है और पाकिस्तान की कूटनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान पिछले कुछ महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने की कोशिश कर रहा था। इस दौरान कई दौर की अप्रत्यक्ष वार्ताएं भी हुईं, जिनमें पाकिस्तान ने संदेशवाहक और मध्यस्थ दोनों की भूमिका निभाई। हालांकि अब अमेरिकी नेताओं का एक वर्ग मानता है कि पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच निष्पक्ष नहीं है। सीनेटर ग्राहम ने कहा कि अगर पाकिस्तान वास्तव में ईरान को सैन्य मदद दे रहा है या उसके विमानों को सुरक्षा दे रहा है, तो अमेरिका को किसी दूसरे देश को मध्यस्थ बनाना चाहिए।

कतर की भूमिका को लेकर सराहना हुई

अमेरिकी प्रशासन के कुछ अधिकारियों ने कतर की भूमिका की भी सराहना की है और उसे ज्यादा भरोसेमंद विकल्प बताया है। इधर पाकिस्तान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका उद्देश्य केवल क्षेत्रीय शांति कायम करना है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने हाल के महीनों में अमेरिका, ईरान और खाड़ी देशों के नेताओं से लगातार संपर्क बनाए रखा। पाकिस्तान ने पहले भी युद्धविराम और शांति प्रस्ताव तैयार करने में भूमिका निभाई थी।

अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान अपनी वैश्विक छवि सुधारने और खुद को एक जिम्मेदार क्षेत्रीय शक्ति के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि आलोचक कहते हैं कि पाकिस्तान के ईरान और सऊदी अरब दोनों से करीबी संबंध उसकी तटस्थता को संदिग्ध बनाते हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। दोनों देशों के बीच युद्धविराम और परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन भरोसे की कमी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN