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इजरायल और लेबनान के बीच दशकों बाद पहली बार सीधी बातचीत, क्या हो जाएगा सीजफायर

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Source :- LIVE HINDUSTAN

लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने कहा कि सैन्य समाधान से कुछ नहीं मिलेगा, कूटनीति ही सबसे अच्छा रास्ता है। इजरायल ने स्पष्ट किया कि वह हिजबुल्लाह के साथ सीधे युद्धविराम पर चर्चा नहीं करेगा, क्योंकि समूह हमले जारी रखे हुए है।

इजरायल और लेबनान के बीच दशकों बाद पहली बार सीधी बातचीत शुरू हुई है। यह ऐतिहासिक बैठक मंगलवार को अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मध्यस्थता में हो रही है। दोनों देशों के राजदूत इस बैठक में शामिल हैं। यह 1993 के बाद दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता है। लेबनान की सरकार ने इस बातचीत को युद्ध समाप्त करने और क्षेत्रीय स्थिरता लाने का मौका बताया है, जबकि इजरायल की ओर से उत्तरी सीमा की सुरक्षा और हिजबुल्लाह के प्रभाव को कम करने पर जोर दिया जा रहा है। बैठक का मुख्य फोकस वर्तमान संघर्ष को रोकने और लंबे समय तक शांति स्थापित करने का ढांचा तैयार करना है।

पिछले एक महीने से इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच हिंसक संघर्ष चल रहा है। इजरायल ने लेबनान पर सैकड़ों हमले किए, जिनमें दक्षिणी लेबनान में जमीनी घुसपैठ भी शामिल है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों में 2000 से अधिक लोग मारे गए हैं, जिनमें महिलाएं, बच्चे और चिकित्सा कर्मी शामिल हैं। हजारों घायल हुए और 10 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो गए। हिजबुल्लाह ने इजरायल पर रोजाना रॉकेट और ड्रोन हमले जारी रखे हैं।

हिजबुल्लाह के साथ युद्धविराम पर चर्चा नहीं

लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने कहा कि सैन्य समाधान से कुछ नहीं मिलेगा, कूटनीति ही सबसे अच्छा रास्ता है। इजरायल ने स्पष्ट किया कि वह हिजबुल्लाह के साथ सीधे युद्धविराम पर चर्चा नहीं करेगा, क्योंकि समूह हमले जारी रखे हुए है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस बैठक को ऐतिहासिक अवसर करार दिया। उन्होंने कहा कि दशकों की जटिलताओं के बावजूद दोनों देश शांति का ढांचा तैयार कर सकते हैं।

अमेरिका की मध्यस्थता में यह बातचीत इजरायल की उत्तरी सीमा की लंबी सुरक्षा और लेबनान को अपने क्षेत्र पर पूर्ण संप्रभुता दिलाने पर केंद्रित है। लेबनान हिजबुल्लाह को नि:शस्त्र करने और क्षेत्र से उसके प्रभाव को हटाने की दिशा में कदम उठाना चाहता है। हालांकि, हिजबुल्लाह ने इन बातचीत को व्यर्थ बताते हुए विरोध किया है और कहा कि वह किसी भी समझौते को नहीं मानेगा। लेबनान की सरकार ने युद्धविराम को पहले शर्त बनाया है, जबकि इजरायल सीमा सुरक्षा पर जोर दे रहा है। यह बैठक मध्य पूर्व में शांति की नई संभावनाओं को खोल सकती है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN