Home विश्व समाचार लाइट बंद की और सीधे अरब सागर… US नेवी की आंखों में...

लाइट बंद की और सीधे अरब सागर… US नेवी की आंखों में धूल झोंक होर्मुज से दो टैंकर कैसे निकाल लाया ईरान

18
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

Hormuz Blockade : मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान ने दो टैंकर – Hero II और Hedy – जो 40 लाख बैरल तक कच्चा तेल ले जा सकते हैं, फारस की खाड़ी से निकालकर अरब सागर में पहुँचा दिया है।

Hormuz Blockade : फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला संकरा समुद्री रास्ता जिसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) कहा जाता है, वहां इस समय स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण और अनिश्चित बनी हुई है। अमेरिकी नौ सेना ने वहां नाकेबंदी कर रखी है और तेल-गैस से लदे जहाजों को आगे बढ़ने से रोक रहा है। इस कारण वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। इसी बीच, ईरान ने अमेरिकी नौसैनिकों की आंखों में झूल झोंककर दो ऐसे टैंकर लदे जहाजों को वहां से निकालकर सीधे अरब सागर पहुंचा दिया है, जिस पर 40 लाख बैरल तक कच्चा तेल होने की बात कही जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान ने दो टैंकर – Hero II और Hedy – जो 40 लाख बैरल तक कच्चा तेल ले जा सकते हैं, फारस की खाड़ी से निकालकर अरब सागर में पहुँचा दिया है। यह कदम अमेरिकी नाकेबंदी पर एक बड़ा सवाल है। चर्चा इस बात की भी हो रही है कि आखिरकार ईरान ने ऐसा कैसे कर दिखाया? इसका मतलब यह है कि US नौ सेना की नाकेबंदी वहां बेअसर है? और क्या ये अकेले ऐसे ईरानी टैंकर हैं जिन्होंने नाकेबंदी पार की है या और भी टैंकर वहां से निकलने में कामयाब रहे हैं?

कैसे बच निकले दो ईरानी टैंकर?

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, ये टैंकर अमेरिकी नौ सेना की चल रही नाकेबंदी से “अदृश्य होकर” (going dark) यानी अपने ट्रैकिंग सिस्टम और लाइट्स बंद करके वहां से बच निकलने में कामयाब रहे और फारस की खाड़ी से सीधे अरब सागर में जा निकले। सैटेलाइट ट्रैकिंग करने वाली कंपनियों (जैसे Vortexa) के मुताबिक 20 अप्रैल को ये जहाज अमेरिकी नाकेबंदी वाली सीमा पार कर रहे थे।

“अदृश्य होने” (going dark) का क्या मतलब है?

समुद्री मार्ग में दुश्मन से बचने या पकड़े जाने से बचने के लिए ये टैंकर अपने AIS ट्रांसपोंडर (GPS जैसे ट्रैकिंग सिस्टम) और लाइट्स बंद कर देते हैं। यह ईरान के तथाकथित “छाया बेड़े” (shadow fleet) द्वारा प्रतिबंधों और निगरानी से बचने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक जानी-मानी और पुरानी तरकीब है। ताजा मामले में दो ईरानी टैंकर Hero II और Hedy नामक दोनों जहाजों का वहां से बच निकलना भी इसी रणनीति और तरकीब का हिस्सा है।

रिपोर्ट्स में कहा गया है कि होर्मुज स्ट्रेट में नाकेबंदी के बावजूद, ईरान से जुड़े लगभग 34 टैंकर नाकेबंदी वाले इलाके पार कर चुके हैं। Lloyd’s List की रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे जहाजों के ज़रिए अब तक लगभग 90 लाख बैरल तेल की ढुलाई की जा चुकी है। अल जज़ीरा और अन्य रिपोर्टों के अनुसार, कई जहाज माल से लदे हुए (कार्गो ले जाते हुए) बाहर की ओर जा रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि नाकेबंदी के बावजूद निर्यात अभी भी जारी है।

कौन सी रणनीति अपना रहा ईरान?

न्यूज 18 की रिरोर्ट के मुताबिक, अंधेरे का फायदा उठाने के अलावा, टैंकर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की सेनाओं की नजर से बचने के लिए AIS स्पूफ़िंग, गलत झंडे का इस्तेमाल और ‘टोलबूथ’ की टोह लेना जैसी समुद्री रणनीतियों का इस्तेमाल करते हैं:

AIS स्पूफ़िंग: कुछ जहाज गलत कोऑर्डिनेट या “घोस्ट” लोकेशन भेजते हैं, जिससे ऐसा लगता है कि वे समुद्र के किसी दूसरे हिस्से में हैं, जबकि असल में वे ईरान के समुद्री तट से सटे हुए होते हैं।

गलत झंडे का इस्तेमाल: टैंकरों को कोमोरोस, माल्टा या कुराकाओ जैसे देशों के “सुविधा वाले झंडे” (flags of convenience) फहराते हुए पकड़ा गया है, ताकि वे अपनी ईरानी पहचान छिपा सकें और पकड़े जाने की संभावना कम कर सकें।

‘टोलबूथ’ की टोह लेना: जहाज अक्सर लारक द्वीप के उत्तर में ईरान के समुद्री क्षेत्र से “सटकर” चलते हैं। इस इलाके को ईरान का “टोलबूथ” कहा जाता है, जहाँ उन्हें ईरानी गनबोट्स से सुरक्षा मिलती है और वे रात के अंधेरे में फारस की खाड़ी की गहरी जलधाराओं में आसानी से घुस कर होर्मुज स्ट्रेट को पार कर लेते हैं। इस दौरान, ईरानी नौसेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) टैंकरों को “पूरी सुरक्षा और ऑपरेशनल मदद” देते हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN