Source :- LIVE HINDUSTAN
59 साल बाद UAE ने OPEC से बाहर निकलने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। ईरान के हमलों के बीच पाकिस्तान की तटस्थता और सऊदी अरब से बढ़ते मतभेदों के चलते UAE ने इस गठजोड़ के खिलाफ खुली जंग का ऐलान कर दिया है।
खाड़ी देशों की भू-राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने वैश्विक तेल संगठन ‘ओपेक’ (OPEC) से बाहर निकलने का ऐतिहासिक फैसला किया है। कूटनीतिक हलकों में इस कदम को केवल ऊर्जा नीति में बदलाव नहीं, बल्कि सऊदी अरब और पाकिस्तान के बढ़ते गठजोड़ के खिलाफ UAE की एक खुली चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
यूएई पर भारी हमला
इस ताजा विवाद की जड़ें हालिया अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़ी हैं। अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे तनाव के बीच, जब ईरान ने UAE के बुनियादी ढांचों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए, तो अबू धाबी को अपने पड़ोसियों से मजबूत समर्थन की दरकार थी। अबू धाबी के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 8 अप्रैल तक यूएई की वायु रक्षा प्रणालियों ने ईरान के 537 बैलिस्टिक मिसाइलों, 26 क्रूज मिसाइलों और 2,256 ड्रोनों को इंटरसेप्ट किया है। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों से भी उसे खास मदद नहीं मिली।
लंदन स्थित ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, UAE चाहता था कि पाकिस्तान ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाए। लेकिन, पाकिस्तान ने इसके उलट अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाना चुना, जिसके कारण एकतरफा युद्धविराम हो गया। पाकिस्तान के इस कथित ‘तटस्थ’ रवैये से UAE ने खुद को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग और सैन्य रूप से असुरक्षित महसूस किया। विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध की मार झेल रहे यूएई को पाकिस्तान की यह तटस्थता बिल्कुल रास नहीं आई।
आर्थिक पलटवार और सऊदी अरब की एंट्री
पाकिस्तान के इस रवैये से निराश और नाराज होकर यूएई ने एक बड़ा आर्थिक कदम उठाया।
कर्ज की तत्काल वापसी: यूएई ने पाकिस्तान से अपने 3.5 अरब डॉलर के कर्ज की तुरंत वापसी की मांग कर दी। रिपोर्टों के अनुसार, यूएई 2027 के अंत तक इस कर्ज की मांग नहीं करने वाला था। यह रकम पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक के पास मौजूद रकम का लगभग पांचवां हिस्सा थी।
सऊदी अरब का बचाव: इस गहरे आर्थिक संकट में सऊदी अरब ने हस्तक्षेप किया और पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर का कर्ज देकर बचा लिया। साथ ही, रियाद ने 5 अरब डॉलर की अतिरिक्त क्रेडिट लाइन देने का भी वादा किया।
सऊदी-पाक रक्षा समझौता: सितंबर 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक नाटो-शैली (Nato-like) का रक्षा समझौता हुआ था। इसके तहत एकमात्र परमाणु शक्ति संपन्न इस्लामी देश पाकिस्तान, सऊदी अरब की रक्षा के लिए अपने परमाणु हथियारों और मिसाइलों को मुहैया करा सकता है।
सऊदी अरब और यूएई के बीच बढ़ता तनाव
सऊदी अरब और यूएई के रिश्ते, जो कभी बेहद मजबूत माने जाते थे, अब कई मोर्चों पर सीधे तौर पर टकरा रहे हैं।
यमन संघर्ष: 2015 में दोनों ने यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ मिलकर अभियान शुरू किया था। लेकिन अब सऊदी अरब हूतियों के साथ राजनीतिक समझौते की वकालत कर रहा है, जबकि यूएई दक्षिणी अलगाववादियों का समर्थन कर रहा है और आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
सूडान गृहयुद्ध (2023): सूडान में यूएई पर अर्धसैनिक बल ‘रैपिड सपोर्ट फोर्सेज’ (RSF) का समर्थन करने का आरोप है, जबकि सऊदी अरब (मिस्र के साथ मिलकर) सूडानी सशस्त्र बलों (SAF) के साथ खड़ा है।
तेल उत्पादन का कोटा: ओपेक का निर्विवाद नेता होने के नाते सऊदी अरब ही उत्पादन कोटा और कीमतें तय करता रहा है, जिसे लेकर दोनों देशों में लंबे समय से मतभेद थे।
ओपेक (OPEC) से बाहर निकलने के मायने
59 वर्षों तक सदस्य रहने के बाद ओपेक से बाहर निकलने का यूएई का निर्णय वाशिंगटन, बीजिंग और मॉस्को तक वैश्विक भू-राजनीति में बड़े बदलाव लाएगा।
पूर्ण क्षमता से उत्पादन: ओपेक छोड़ने के बाद, यूएई अब किसी भी कोटे के प्रतिबंध के बिना अपनी पूरी क्षमता से तेल निकाल सकेगा। यूएई ओपेक के कुल उत्पादन का लगभग 9% आपूर्ति करता था और इसका दैनिक उत्पादन लगभग 30 लाख बैरल है।
सऊदी के साये से बाहर आना: यह कदम दर्शाता है कि अबू धाबी अब क्षेत्रीय रणनीति और ओपेक में सऊदी अरब के नेतृत्व के अधीन अपने हितों से समझौता नहीं करेगा।
मंत्रियों के बयान: यूएई के ऊर्जा मंत्री सुहैल मोहम्मद अल मजरूई ने इसे दीर्घकालिक बाजार के अनुकूल नीतिगत बदलाव बताया। वहीं, उद्योग मंत्री सुल्तान अल जाबेर ने इसे राष्ट्रीय हित, अपनी उत्पादन क्षमता और वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता के लिए उठाया गया एक संप्रभु (sovereign) निर्णय करार दिया।
हालांकि ओपेक छोड़ने का मतलब सऊदी अरब के साथ संबंधों को पूरी तरह खत्म करना नहीं है। दोनों अभी भी प्रमुख व्यापारिक भागीदार और जीसीसी सदस्य हैं, लेकिन यह यूएई द्वारा अपनी स्वतंत्रता का अब तक का सबसे बड़ा और सार्वजनिक प्रदर्शन है। युद्ध और बदलते गठजोड़ों के बीच, यूएई का यह कदम पाकिस्तान-सऊदी अरब नेक्सस के खिलाफ एक खुला संघर्ष है।
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