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हाफिज के करीबी अफरीदी का काम तमाम, पाकिस्तान में भारत के दुश्मनों का कौन कर रहा ‘द एंड’?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

पाकिस्तान में अज्ञात हमलावरों का कहर जारी है। लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर यूसुफ अफरीदी की हत्या के बाद भारत के दुश्मनों में भारी खौफ है। विस्तार से पढ़ें कैसे पाकिस्तान की धरती पर एक-एक कर ढेर हो रहे हैं आतंकी।

पिछले कुछ वर्षों से पाकिस्तान में एक रहस्यमयी सिलसिला जारी है, जहां भारत के वांटेड आतंकी और उनके हैंडलर्स लगातार ‘अज्ञात हमलावरों’ का शिकार हो रहे हैं। लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के प्रमुख चेहरे शेख यूसुफ अफरीदी की ताजा हत्या इसी कड़ी का लेटेस्ट हिस्सा है।

ताजा मामला: शेख यूसुफ अफरीदी का खात्मा

मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के करीबी और लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख नेता शेख यूसुफ अफरीदी को हाल ही में मौत के घाट उतार दिया गया है। 26 अप्रैल 2026 (रविवार) को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के खैबर क्षेत्र स्थित लांडी कोतल में उसे मारा गया। अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने अफरीदी पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हमलावर वारदात को अंजाम देकर फरार होने में सफल रहे।

कौन था यूसुफ अफरीदी

वह खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा की क्षेत्रीय संरचना का एक प्रमुख व्यक्ति था। वह आतंकी संगठन के लिए युवाओं की भर्ती और गतिविधियों के समन्वय का काम देखता था। जमात-उद-दावा (JuD) के अनुसार, वह जाखाखेल जनजाति से ताल्लुक रखता था और अहल-ए-हदीस (सलाफी) विचारधारा का प्रमुख व्यक्ति माना जाता था।

लश्कर के सह-संस्थापक अमीर हमजा पर भी हुआ हमला

अफरीदी की हत्या से ठीक एक हफ्ते पहले, लश्कर-ए-तैयबा के सह-संस्थापक और हाफिज सईद के बाद संगठन के दूसरे सबसे महत्वपूर्ण नेता अमीर हमजा पर लाहौर में जानलेवा हमला हुआ। अज्ञात बंदूकधारियों की फायरिंग में हमजा गंभीर रूप से घायल हो गया। हमजा भारत में हुए कई आतंकी हमलों के ऑपरेशनल प्लानिंग और प्रोपेगेंडा से जुड़ा रहा है।

पाकिस्तान में ‘अज्ञात धुरंधरों’ का बढ़ता खौफ

पाकिस्तान में भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों की रहस्यमयी हत्याओं का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले एक-डेढ़ साल में एक के बाद एक कई खूंखार आतंकियों को इसी तर्ज पर जहन्नुम पहुंचाया जा चुका है। यूसुफ अफरीदी और अमीर हमजा पर हुए हमलों से पहले, साल 2023 से लेकर अब तक पाकिस्तान की धरती पर 20 से अधिक ऐसे बड़े आतंकियों को अज्ञात लोगों ने निशाना बनाया है, जो भारत की ‘मोस्ट वांटेड’ लिस्ट में शामिल थे। जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर के बड़े भाई मुहम्मद ताहिर अनवर की रहस्यमयी मौत ने भी आतंकियों को बड़ा झटका दिया। रईसी हमले (2024) के मास्टरमाइंड अबू कतल की हत्या भी हो चुकी है। 2026 में अकेले कम से कम 30 LeT और Hizbul Mujahideen से जुड़े आतंकियों को अज्ञात हमलावरों ने निशाना बनाया। इनमें कुछ मारे गए और कुछ गंभीर रूप से घायल हुए।

हाल ही में मारे गए कुछ प्रमुख आतंकी:

  • अदनान अहमद उर्फ हंजला: लश्कर का कमांडर और हाफिज का करीबी। (कराची में हत्या)
  • अकरम गाजी: लश्कर-ए-तैयबा का पूर्व कमांडर। (खैबर पख्तूनख्वा में हत्या)
  • ख्वाजा शाहिद: पठानकोट हमले का मास्टरमाइंड। (पीओके में सिर कटा शव मिला)
  • शाहिद लतीफ: जैश-ए-मोहम्मद का अहम हैंडलर। (सियालकोट में हत्या)

इन हत्याओं में एक समान पैटर्न देखने को मिलता है।

सटीक निशाना: हमलावर अक्सर मोटरसाइकिल पर आते हैं, पूरी रेकी के साथ सटीक निशाना लगाते हैं और भीड़भाड़ वाले इलाकों या मस्जिदों के बाहर वारदात को अंजाम देकर गायब हो जाते हैं।

कोई जिम्मेदारी नहीं: इन हमलों की जिम्मेदारी किसी भी स्थानीय या अंतरराष्ट्रीय संगठन द्वारा नहीं ली जाती है।

निशाने पर कौन: मरने वालों में जैश-ए-मोहम्मद (JeM), लश्कर-ए-तैयबा (LeT), हिज्बुल मुजाहिदीन और खालिस्तानी आतंकी नेटवर्क से जुड़े टॉप कमांडर, लॉन्च पैड हैंडलर और फाइनेंसर शामिल हैं, जैसे- पठानकोट हमले के हैंडलर्स, 2018 के सुंजवां कैंप हमले के मास्टरमाइंड आदि।

आतंकियों के इस तरह ढेर होने की संभावित वजहें

इन रहस्यमयी हत्याओं के पीछे कई थ्योरीज सामने आती रही हैं, हालांकि किसी भी एक थ्योरी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

आतंकी गुटों की आपसी रंजिश: आतंकी संगठनों के बीच फंडिंग, हथियारों की सप्लाई और प्रभाव क्षेत्र को लेकर अक्सर गैंगवार और खूनी संघर्ष होते रहते हैं। पाकिस्तान में टीटीपी (TTP) और अन्य कट्टरपंथी गुटों के बीच वैचारिक और व्यावहारिक मतभेद भी इन हत्याओं का एक बड़ा कारण माने जाते हैं।

आईएसआई (ISI) की ‘क्लीन-अप’ थ्योरी: कुछ रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के दबाव और अंतरराष्ट्रीय बदनामी से बचने के लिए, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां खुद उन ‘पुराने मोहरों’ को रास्ते से हटा रही हैं जो अब उनके लिए बोझ बन चुके हैं या जिनके राज उगलने का खतरा है।

स्थानीय दुश्मनी: कई बार आतंकी कमांडर्स स्थानीय विवादों, संपत्ति के झगड़ों या कबायली रंजिशों का भी शिकार हो जाते हैं।

लाहौर के बीचों-बीच हमजा जैसी एक सीनियर और कड़ी सुरक्षा वाली हस्ती को सफलतापूर्वक निशाना बनाना एक कड़ा संदेश देता है। बताया जा रहा है कि इससे आतंकवाद के अन्य आरोपियों और उनके आकाओं के बीच भारी दहशत फैल गई है; उन्हें अब डर सता रहा है कि उनके सुरक्षित ठिकाने अब सुरक्षित नहीं रहे, उनकी हरकतों पर नजर रखी जा रही है, और वे इन अज्ञात हमलावरों के अगले शिकार बन सकते हैं।

कारण चाहे जो भी हो, लेकिन यह तथ्य बिल्कुल स्पष्ट है कि पाकिस्तान, जो भारत के दुश्मनों के लिए सबसे सुरक्षित पनाहगाह माना जाता है, अब उन्हीं आतंकियों के लिए एक कब्रगाह में तब्दील हो रहा है। हाफिज सईद 2019 से लाहौर की कोट लखपत जेल में है। उसके करीबी सहयोगियों का एक-एक कर मारा जाना आतंकी नेटवर्क के भीतर पैदा हुए एक बड़े खौफ और सुरक्षा चूक को दर्शाता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN