Source :- LIVE HINDUSTAN
Parenting Tips: एक उम्र के बाद बच्चे को ट्यूशन भेजना सही है। लेकिन छोटी उम्र में तो यही बेहतर रहेगा कि आप उन्हें खुद पढ़ने बैठने की आदत डालें। यहां हम आपके साथ कुछ ऐसी ही टिप्स शेयर कर रहे हैं, जिससे बच्चा बिना ट्यूशन के भी अच्छे मार्क्स ला सकता है।
आजकल छोटी-छोटी क्लास के बच्चे भी ट्यूशन जाते हैं। ये बेशक नॉर्मल लगे लेकिन सोचकर देखिए कि क्या वाकई छोटे बच्चों को भी पढ़ाई में इतनी मुश्किल आती है कि उन्हें ट्यूशन भेजना पड़े? कुछ पैरेंट्स ये तर्क देते हैं कि हमारा बच्चा घर पर पढ़ने ही नहीं बैठता, इसलिए ट्यूशन भेजना पड़ता है। लेकिन क्या ये आदत सही है? बच्चे में सेल्फ स्टडी की आदत डालने के बजाए उन्हें सीधा किसी ट्यूशन क्लास भेज देना, इससे खुद पढ़ने की आदत डेवलप ही नहीं हो पाती। एक उम्र के बाद बच्चे को एक्सट्रा हेल्प की जरूरत पड़ सकती है, जिसके लिए ट्यूशन भेजना सही है। लेकिन छोटी उम्र में तो यही बेहतर रहेगा कि आप उन्हें खुद पढ़ने बैठने की आदत डालें। यहां हम आपके साथ कुछ ऐसी ही टिप्स शेयर कर रहे हैं, जिससे बच्चा बिना ट्यूशन के भी अच्छे मार्क्स ला सकता है और उसमें सेल्फ स्टडी की आदत डेवलप हो सकती है।
पढ़ाई का एक प्रॉपर टाइम फिक्स करें
बच्चे के ट्यूशन जाने का एक प्रॉपर टाइम होता है, वहीं घर पर कब पढ़ना है ये आप उसके मूड पर छोड़ देते हैं। ये भी एक मुख्य वजह है कि बच्चा टाल मटोल करते-करते पढ़ने ही नहीं बैठता। इसलिए घर पर भी पढ़ाई का एक प्रॉपर टाइम फिक्स करें और साथ ही एक जगह भी तैयार करें। इससे बच्चा खुद भी पढ़ाई के लिए मोटिवेट होगा और एक हैबिट उसमें डेवलप होगी।
लंबे समय तक पढ़ाई करना हो सकता है बोरिंग
छोटे बच्चे बहुत लंबे समय तक पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। दरअसल उनका अटेंशन स्पेन शुरुआत में कम होता है, जो समय के साथ बढ़ता है। इसलिए बच्चे की उम्र के हिसाब से उनका टाइम टेबल सेट करें। सबसे अच्छा रहेगा कि आप उन्हें पढ़ाई के बीच में छोटे-छोटे ब्रेक दें, इससे उनका दिमाग भी रिफ्रेश रहेगा।
बच्चे के लिए आउटडोर गेम्स जरूरी हैं
बच्चा सिर्फ घर-घर में रहता है, वहीं खेलता या टीवी देखता है तो ये आदत सही नहीं है। इससे बच्चे चिड़चिड़े होते हैं और उनका शारीरिक-मानसिक विकास भी सही से नहीं होता। इसलिए उनके रूटीन में आउटडोर गेम्स का टाइम भी फिक्स करें। इससे उनका मूड भी रिफ्रेश होगा और ज्यादा प्रोडक्टिविटी के साथ पढ़ाई कर पाएंगे।
स्कूल में पढ़ाया गया रिवाइज जरूर कराएं
बच्चे को स्कूल में जो भी पढ़ाया जाए उसे उसी दिन घर पर आ कर एक बार रिवाइज जरूर करा दें। ये छोटी सी हैबिट बच्चे की पढ़ाई को काफी बेहतर बना सकती है। इसके अलावा बच्चे में आदत डालें कि वो चीजों को लिखकर समझें और पढ़े। इससे चीजें दिमाग में अच्छी तरह बैठती हैं और याद भी हो जाती हैं।
नियमित टेस्ट से बेहतर होगी बच्चे की समझ
सिर्फ पढ़ना काफी नहीं है, ये समझना भी जरूरी है कि आखिर चीजें याद रह भी रही हैं या और प्रैक्टिस की जरूरत है। इसके लिए बच्चे का नियमित टेस्ट लेते रहना जरूरी है। ज्यादा नहीं बस हर वीकेंड उनका एक छोटा सा टेस्ट लें, जिसमें वो चीजें शामिल हों जो बच्चे से हफ्तेभर पढ़ी हैं। इससे आपको भी लग जाएगा कि कितनी प्रैक्टिस और जरूरी है। साथ ही एग्जाम टाइम पर बच्चे को लास्ट मिनट पढ़ाई की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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