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रूस में राष्ट्रपति पुतिन का समर्थन हासिल करने के बाद अराघची ने कहा कि ट्रंप बातचीत का अनुरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि अमेरिका अपने किसी भी उद्देश्य को हासिल नहीं कर पाया है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया है कि प्रतिबंधों और दबाव के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनका प्रशासन वार्ता के लिए गिड़गिड़ा रहा है। सोमवार को रूस पहुंचे ईरानी विदेश मंत्री ने हालांकि एक अच्छा संकेत दिया है कि तेहरान अमेरिकी अनुरोध पर विचार कर रहा हैं, जबकि ट्रंप ने ईरान को फोन करने का प्रस्ताव रखा है। रूस में राष्ट्रपति पुतिन का समर्थन हासिल करने के बाद अराघची ने कहा कि ट्रंप बातचीत का अनुरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि अमेरिका अपने किसी भी उद्देश्य को हासिल नहीं कर पाया है।
ईरानी विदेश मंत्री का यह बयान पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के समाधान के लिए तेहरान और वाशिंगटन में दूसरे दौर की शांति वार्ता को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच आया है।। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ओमान और पाकिस्तान की यात्रा के बाद सोमवार को रूस के सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचे हैं जहां रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से उनकी मुलाकात हुई है।
रूस ने की ईरान की तारीफ
‘रूसी समाचार एजेंसी तास’ की खबर के अनुसार, पुतिन ने संप्रभुता के लिए बहादुरी से लड़ने को लेकर ईरान के लोगों की प्रशंसा की। राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि रूस पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के लिए ईरान और क्षेत्र के अन्य देशों के हित में हरसंभव प्रयास करेगा। दूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए एक नया प्रस्ताव भी पेश किया है। ईरान के नवीनतम प्रस्ताव से उसके परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत को भविष्य के लिए टालने की बात कही गई है और इसके बजाय, समझौते के तहत तेहरान होर्मुज समुद्री मार्ग पर अपनी नाकाबंदी समाप्त करेगा, जिसके बदले में अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नाकाबंदी हटाएगा और एक दीर्घकालिक या स्थायी युद्धविराम लागू करेगा। यह जानकारी प्रस्ताव से वाकिफ दो क्षेत्रीय अधिकारियों ने दी।
बातचीत फिर से शुरू होने की कोई संभावना नहीं
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि अमेरिकी वार्ताकार अब ईरान के साथ वार्ता के लिए इस्लामाबाद नहीं जाएंगे। ट्रंप ने रविवार को कहा कि अमेरिकी और ईरानी अधिकारी संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए फोन पर बातचीत कर सकते हैं। पाकिस्तान दोनों पक्षों को इस्लामाबाद में बातचीत की मेज पर वापस लाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन, इस सप्ताहांत उसने बातचीत की उम्मीद में लगायी गयी सभी सुरक्षा चौकियों और सुरक्षा व्यवस्था को हटा दिया। इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल बातचीत फिर से शुरू होने की कोई संभावना नहीं है।
बातचीत गतिरोध में फंस गई
बातचीत गतिरोध में फंसी हुई प्रतीत हो रही है लेकिन पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति लगातार बढ़ रही है। फिलहाल अमेरिकी नौसेना के तीन विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन, यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड और यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश इस क्षेत्र में तैनात हैं। इन विमानवाहक पोतों में लगभग 15,000 नाविक और मरीन सैनिक, साथ ही 200 से अधिक विमान और अतिरिक्त जहाज शामिल हैं। यूएसएस त्रिपोली के नेतृत्व में एक अन्य हमलावर समूह भी अपने नाविकों, मरीन सैनिकों और विमानों के साथ क्षेत्र में तैनात है।
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