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पीएम मोदी ने नीदरलैंड्स में जो कहा उसका क्या मतलब निकाल रहे हैं विशेषज्ञ?

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पीएम मोदी

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प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया पर मध्य-पूर्व युद्ध के असर को लेकर कहा है कि ‘अगर हालात तेज़ी से नहीं बदले तो बीते अनेक दशकों की उपलब्धियों पर पानी फिर जाएगा.’

पीएम मोदी पांच देशों की अपनी मौजूदा विदेश यात्रा में शनिवार को नीदरलैंड्स पहुंचे थे. वहां उन्होंने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए एक बार फिर से मौजूदा हालात में कोरोना संकट के दौर का ज़िक्र किया.

उन्होंने कहा, “आज मानवता के सामने अनेक बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं. पहले कोरोना आया, फिर युद्ध होने शुरू हो गए और अब आज की एनर्जी क्राइसिस है. यह दशक दुनिया के लिए आपदाओं का दशक बन रहा है.”

28 फ़रवरी को अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले शुरू कर दिए थे. इन हमलों के बाद मध्य पूर्व में जंग शुरू हो गई और ईरान ने इलाक़े के एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज़ स्ट्रेट को तकरीबन बंद कर दिया, जिससे दुनिया भर में तेल और गैस का संकट पैदा हो गया.

पीएम मोदी ने क्या कहा

मोदी

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होर्मुज़ स्ट्रेट से आम दिनों में दुनिया भर के देशों में तेल और गैस की सप्लाई का लगभग 20 फ़ीसदी हिस्सा गुज़रता रहा है. इसके बंद होने से सप्लाई पर काफ़ी बुरा असर पड़ा है.

इसकी वजह से महंगाई में बढ़ोतरी हुई है और कई देशों में ऊर्जा की खपत पर नियंत्रण के उपाय अपनाए गए हैं.

भारत में भी ईरान के साथ अमेरिका-इसराइल की जंग के असर से तेल और गैस की क़ीमतों में बढ़ोतरी की गई है और इस संकट का कारोबार पर भी बुरा असर पड़ा है.

पीएम मोदी ने नीदरलैंड्स के हेग में कहा, “हम सभी देख रहे हैं कि अगर यह स्थितियां तेज़ी से नहीं बदलीं तो बीते अनेक दशकों की उपलब्धियों पर पानी फिर जाएगा. दुनिया की बहुत बड़ी आबादी फिर से ग़रीबी के दलदल में चली जाएगी.”

इससे पहले बीते कुछ दिनों में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के लोगों से पेट्रोल और डीज़ल की खपत कम करने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने, ग़ैर-ज़रूरी विदेश यात्राओं से बचने, एक साल तक सोना न ख़रीदने, घर से काम करने और किसानों से रासायनिक खाद का इस्तेमाल 50 फ़ीसदी तक कम करने की अपील की है.

पीएम मोदी की लगातार अपील

नरेंद्र मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीते रविवार को तेलंगाना के दौरे पर थे. सिकंदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने देश के लोगों से कई अपीलें कीं. इनमें से एक अपील एक साल तक सोना ख़रीदने से बचने की थी.

उन्होंने कहा, “सोने की ख़रीद एक और पहलू है जिसमें विदेशी मुद्रा बहुत ख़र्च होती है. एक समय था जब संकट आता था तब लोग देशहित में सोना दान दे देते थे. आज दान की ज़रूरत नहीं है लेकिन देशहित में हमें यह तय करना होगा कि सालभर तक घर में कोई कार्यक्रम हो, हम सोने के गहने नहीं ख़रीदेंगे.”

तेलंगाना के बाद सोमवार को गुजरात में उन्होंने लोगों से अपील की थी कि वो सोने की ख़रीद को टालें और तेल की बचत करें.

पीएम मोदी ने गुजरात में एक कार्यक्रम में कहा, “पिछले कुछ सालों में दुनिया लगातार अस्थिर परिस्थितियों से गुज़र रही है. पहले कोरोना का संकट, फिर वैश्विक आर्थिक चुनौतियाँ और अब पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव. इन सारी परिस्थितियों का असर लगातार पूरी दुनिया पर पड़ रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है.”

“मैं गुजरात में भी अपने पिछले आग्रहों पर ज़ोर दे रहा हूं. मेरी देश के हर नागरिक से अपील है कि जहां संभव हो पेट्रोल-डीज़ल का उपयोग कम करें. मेट्रो का उपयोग करें, इलेक्ट्रिक बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक इस्तेमाल करें. कार पुलिंग को बढ़ावा दें.

“सरकार और प्राइवेट दोनों ही दफ़्तरों में वर्चुअल मीटिंग्स और वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता दी जाए. मैं स्कूलों से भी कहूंगा कि कुछ समय से लिए ऑनलाइन क्लासेस की व्यवस्था करें.”

नरेंद्र मोदी

उन्होंने कहा, “खाने के तेल पर भी बड़ी विदेशी मुद्रा ख़र्च होती है और अगर खाने के तेल की मात्रा कम करें तो इससे देश और हमारी सेहत दोनों को लाभ होगा. मैं देशवासियों से आग्रह करूंगा कि जब तक हलात सामान्य नहीं हो जाते, हम सोने की ख़रीद को टालें.”

सरकार इसे मध्य-पूर्व में संकट के बीच ‘सामूहिक ज़िम्मेदारी’ और ‘लॉन्ग टर्म एनर्जी सिक्योरिटी’ की दिशा में क़दम बता रही है. लेकिन आलोचक इसे आर्थिक दबाव के संकेत और आम लोगों पर बोझ डालने की कोशिश मान रहे हैं.

भारत में चिंता

भगवंत मान

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विदेशी मुद्रा बचाने की प्रधानमंत्री की अपील के बाद भारत में विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी. हालांकि लोगों से अपील करने के बाद पीएम मोदी पांच देशों की विदेश यात्रा पर हैं.

शनिवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि सबसे पहले प्रधानमंत्री को अपनी विदेश यात्रायों से बचना चाहिए.

भगवंत मान ने कहा, ”अभी वह (पीएम) कहाँ हैं? वह नीदरलैंड्स गए हुए हैं. वह तीन-चार देशों की यात्रा कर रहे हैं. लोगों से अपील करते हैं कि विदेश न जाएँ, फिर भी वह ख़ुद विदेश गए हुए हैं. प्रधानमंत्री ख़ुद वर्क फ़्रॉम होम क्यों नहीं कर सकते?”

उन्होंने आगे कहा, “सोना न खरीदें, विदेश यात्रा से बचें, घर से काम करें. युद्ध कहीं और हो रहा है, फिर भी पाबंदियाँ हमारे ही देश में लगाई जा रही हैं. दूसरे देशों में पाबंदियाँ क्यों नहीं लगाई गईं? नेपाल या किसी भी दूसरे देश ने ऐसा क्यों नहीं किया? चुनावों के दौरान तो कोई दिक्कत नहीं थी.”

इधर ईरानी संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख इब्राहिम अज़ीज़ी ने कहा है कि ईरान ने अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और इंटरनेशनल ट्रेड सिक्योरिटी की गारंटी के तहत, होर्मुज़ स्ट्रेट में एक तय रास्ते पर ट्रैफिक को मैनेज करने के लिए एक प्रोफेशनल सिस्टम तैयार किया है.

उनके मुताबिक़ इस सिस्टम को जल्द ही पेश किया जाएगा.

इब्राहिम अज़ीज़ी ने एक्स पर लिखा, इस प्रक्रिया में सिर्फ़ कमर्शियल जहाज़ों और ईरान के साथ सहयोग करने वालों को ही इसका फ़ायदा मिलेगा. इस सिस्टम के तहत दी जाने वाली ख़ास सेवा के लिए ज़रूरी फ़ीस ली जाएगी.”

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी के ख़िलाफ़ शनिवार को कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर हमने आर्थिक और जियो पॉलिटिकल मामलों के एक्सपर्ट विजय सरदाना से बात की.

उनका कहना है, “भारत में क़रीब 80 करोड़ लोगों को मुफ़्त राशन दिया जाता है जो ग़रीबी की रेखा के आसपास या उससे नीचे हैं. अगर महंगाई बढ़ेगी तो सरकार के पास कई वेलफ़ेयर स्कीम के लिए पैसे नहीं बचेंगे.”

वह आगे कहते हैं, “प्रधानमंत्री ने जो कहा है वह दिख रहा है.”

मौजूदा वैश्विक ऊर्जा संकट को देखते हुए ईरान युद्ध के शुरुआती दिनों में ही कई देशों में लोगों को इसके ख़तरे के प्रति आगाह किया गया, ऊर्जा की कीमतें बढ़ाई गईं और इनकी राशनिंग भी शुरू की गई.

क्या भारत ने हालात की सही तस्वीर पेश करने में देरी कर दी? विजय सरदाना कहते हैं, “भारत में हर चीज़ का आंकलन राजनीतिक नफ़ा-नुक़सान देखकर किया जाता है. यहां राष्ट्रहित से ज़्यादा राजनीतिक हित देखा जाता है. इस मामले में हर पार्टी ज़िम्मेदार है. अगर सभी दल मिलकर एक लॉन्ग टर्म रोडमैप बनाएं और फिर जिसकी सरकार आए वो उन पर अमल करे, तो समाधान तलाशा जा सकता है.”

“आज प्रधानमंत्री जो कह रहे हैं, यह ख़ुद उन्हीं की देन है. क्या उन्होंने विपक्षी दलों के साथ मिलकर इस पर चर्चा की, कोई लॉन्ग टर्म प्लान बनाने की कोशिश की. आज भारत के ही लोग विदेश में निवेश कर रहें लेकिन भारत में नहीं.”

“उन्हें डर लगता है कि आज कुछ कहा जा रहा है और कल राजनीतिक फ़ायदे के लिए उस बात से सरकार मुकर गई तो क्या होगा?”

‘हमें समझना होगा कि ज़िम्मेदार कौन है?’

होर्मुज़

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मौजूदा वैश्विक संकट से पहले ही रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ख़ासकर यूरोपीय देशों को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा था.

उसके बाद इसराइल का ग़ज़ा युद्ध और कुछ महीने पहले वेनेज़ुएला में अमेरिका का सैन्य अभियान हुआ था. ज़ाहिर है ये सब सामान्य घटनाएं नहीं हैं.

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के निदेशक अजय श्रीवास्तव भारत सरकार के विदेश व्यापार महानिदेशालय में ‘एडिशनल डायरेक्टर जनरल फ़ॉरेन ट्रेड’ के पद पर रह चुके हैं.

उनका कहना है, “ईरान युद्ध, वेनेज़ुएला में जो कुछ हुआ, ग़ज़ा युद्ध और रूस-यूक्रेन युद्ध, ये सब ऐसी बातें हैं जिन्हें टाला जा सकता था. आपको समझना होगा कि इन सबके पीछे ज़िम्मेदार कौन है? उसी के मुताबिक़ सोचना पड़ेगा.”

वो कहते हैं, “अमेरिका ने इसराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमला किया, वेनेज़ुएला में उसी ने ऑपरेशन चलाया, इसराइल को उसका समर्थन है और यूक्रेन को भी रूस से लड़ने के लिए अमेरिका हथियार देता है. इन सारी घटनाओं से दुनिया भर में ऊर्जा और अन्य वस्तुओं की सप्लाई पर असर पड़ा.”

अजय श्रीवास्तव आगे कहते हैं, “हालाँकि कई यूरोपीय और अन्य देशों के विपरीत हमारे साथ अच्छी बात यह है कि हम कच्चा तेल मंगाकर उसे रिफ़ाइन करते हैं, यह सुविधा कई देशों के पास नहीं है इसलिए उनका संकट ज़्यादा बड़ा है.”

हालाँकि अजय श्रीवास्तव कहते हैं कि भारत अपने 90% ऊर्जा ज़रूरतों के लिए आयात पर निर्भर है और इसका बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है, जबकि अमेरिका ने रूस से तेल ख़रीदने पर पाबंदी लगा दी है, जो भारत के लिए चिंता की बात है.

ईरान युद्ध को देखते हुए अमेरिका ने तेल की सप्लाई पर असर को कम करने के लिए भारत को रूस से तेल ख़रीदने की छूट दी थी, यह छूट शनिवार को ख़त्म हो गई है और ख़बर लिखे जाने तक इसे आगे नहीं बढ़ाया गया है.

अजय श्रीवास्तव कहते हैं, “इन हालात में हम आराम से नहीं रह सकते. हमें अपना ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना होगा. लंबे समय के लिए यह हमारे लिए बहुत ज़रूरी है.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS