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ट्रोलिंग को पीछे छोड़ प्राची ने कैसे अपना फ़ोकस बनाए रखा और उन्हें किस बात का है मलाल?

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Source :- BBC INDIA

प्राची निगम

इमेज स्रोत, Himanshu Singh

उत्तर प्रदेश के सीतापुर की प्राची निगम आपको याद है? दो साल पहले प्राची निगम दसवीं की परीक्षा में यूपी बोर्ड की टॉपर थीं. लेकिन तब उनके मार्क्स से ज़्यादा चर्चा उनके लुक की हो रही थी.

बीबीसी न्यूज़ हिन्दी ने उस वक्त जब प्राची से बात की थी, तो उन्होंने बताया था कि किस तरह से टॉपर होने के बाद भी उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया गया.

ऐसे में जब इस साल यूपी बोर्ड की 12वीं का रिज़ल्ट आया, तो मुझे यह जानने में दिलचस्पी हुई कि इस बार प्राची का रिज़ल्ट कैसा रहा.

जिस तरह उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया गया था, उसे देखते हुए मेरे मन में यह सवाल भी था कि उन्होंने उससे कैसे तालमेल बिठाया और आगे पढ़ाई की.

यही जानने के लिए बीते 26 अप्रैल को मैं एक बार फिर प्राची के घर पहुंची.

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दोपहर के करीब 12 बज रहे थे, लेकिन सीतापुर में प्राची के घर में सन्नाटा था. दो साल पहले जैसी रिज़ल्ट वाली चहल-पहल नहीं थी. वजह तो यही थी कि इस बार प्राची ने बोर्ड में टॉप नहीं किया था. हालांकि, उन्होंने 12वीं में 91.20 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं.

दसवीं में टॉप करने के बाद प्राची पर बारहवीं में भी टॉप करने जैसा दबाव तो नहीं था, ये सवाल पूछे जाने पर 19 साल की प्राची निगम ने बड़े सहज अंदाज में कहा, “देखिए इस बार तो कोई मिलने नहीं आया. इंटर में 91.20 प्रतिशत आए हैं. सभी विषयों में अच्छे मार्क्स थे लेकिन अंग्रेजी में 73 रह गए. मार्क्स तो अच्छे हैं पर रिज़ल्ट थोड़ा डाउन रहा. करीब पांच प्रतिशत अंकों का अंतर रहा.”

नंबर अच्छे हैं लेकिन ज़ाहिर है कि प्राची की उम्मीदों से कम हैं. प्राची को इस बात का मलाल भी है कि वो यूपी बोर्ड में टॉप टेन में भी अपनी जगह नहीं बना पाईं.

दो साल पहले प्राची ने दसवीं की परीक्षा में क़रीब 55 लाख स्टूडेंट्स में यूपी बोर्ड में टॉप किया था जिसे देश के सबसे मुश्किल बोर्ड्स में से एक माना जाता है. लेकिन उनकी चर्चा उनके टॉप होने से कहीं ज़्यादा उनके चेहरे पर उगे बालों की वजह से हो रही थी. उन्हें काफी ट्रोल किया गया था.

उन्होंने उस वक़्त बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बात करते हुए कहा था, “इस ट्रोलिंग और भीड़ को देखकर सोचती हूँ कि मेरे एक-दो नंबर कम आते तो अच्छा रहता. मैं टॉप नहीं करती तो लोगों का मेरी शक्ल पर ध्यान नहीं जाता. मुझे अपने चेहरे पर उगे लंबे बालों का अहसास पहली बार हाईस्कूल बोर्ड में टॉप करने पर ट्रोल करने वालों ने ही करवाया.”

इलाज की चुनौतियां

प्राची निगम

इमेज स्रोत, Himanshu Singh

प्राची के चेहरे पर बालों की ग्रोथ नौवीं क्लास से ज़्यादा हो गई थी, जिसे डॉक्टर ने हार्मोनल डिसबैलेंस बताया था. ट्रोलिंग के दो महीने बाद प्राची ने अपने चेहरे का इलाज भी कराया. अब उनके चेहरे पर पहले जैसे बाल नहीं हैं. यह सिर्फ़ एक इलाज नहीं बल्कि एक मानसिक सफ़र भी था- खुद को स्वीकारने और बदलने के बीच का.

प्राची इस अनुभव के बारे में बताती हैं, “पहले नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी ट्रीटमेंट करवाउंगी. अप्रैल में रिजल्ट निकला और जून से ट्रीटमेंट करवाना शुरू कर दिया.”

उन्होंने कहा, “ट्रोलिंग के दौरान लखनऊ के एक डॉक्टर साहब ने छह-सात राउंड फ्री इलाज किया. तब हर महीने जाती थी. अभी एक बार जाने पर करीब 10,000 रुपये खर्च होते हैं इसलिए तीन महीने में एक बार जाती हूं. अब तक करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च हो गए हैं. अभी 10 दिन पहले हेयर रिमूव करवाकर आई हूं.”

प्राची के लिए यह सिर्फ़ एक इलाज नहीं था बल्कि खुद को उस दौर से बाहर निकलने की कोशिश भी थी. क्या आपके मेकओवर से लोगों के व्यवहार में कोई परिवर्तन आया? इस पर प्राची मुस्कुराते हुए कहती हैं, “किसी को पहले भी कोई फ़र्क नहीं पड़ता था और अब भी नहीं.”

प्राची उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में महमूदाबाद ब्लॉक के भट्टा मोहल्ले में रहती हैं. इस साल 12वीं में प्राची ने 500 अंकों में 456 अंक हासिल किये हैं. उन्हें मैथ्स में 99, केमिस्ट्री में 95, हिन्दी में 96, फिजिक्स में 93 और इंग्लिश में 73 अंक मिले हैं.

प्राची इंस्टाग्राम पर अपनी पुरानी फोटो की बहुत सारी पोस्ट दिखाते हुए बोलीं, “मेरी फीड पर मेरी पुरानी फोटो दिखाई दे रही है. हमारी फोटो को एडिट करके, ड्रेस को एडिट करके जिसको जो समझ में आ रहा है लिखकर-बोलकर बस शेयर किये जा रहे हैं.”

लोगों की बातों का कितना असर

प्राची कहती हैं कि वे तो पिछली बातें भूल चुकी हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर हो रही टिप्पणियां उन्हें अब भी बहुत कुछ याद दिला जाती हैं  (फ़ाइल तस्वीर)

“इस बार लोग ट्रोल तो नहीं कर रहे बस मेरे मार्क्स की चर्चा कर रहे हैं. लेकिन उसमें जो कमेंट्स आ रहे वो बहुत भद्दे हैं. मैं आपको बता भी नहीं सकती कि लोग क्या-क्या लिख रहे हैं.”

अभी आपने ट्रीटमेंट करा लिया है. पर लोग आपकी पुरानी फोटो ही शेयर कर रहे हैं. इसे आप कैसे देखती हैं?

इस सवाल के जवाब में प्राची ने कहा, “लोगों के पास मेरी नई फोटो नहीं है क्योंकि मैं सोशल मीडिया पर एक्टिव ही नहीं हूं. लोग व्यूज के लिए पुरानी फोटो का इस्तेमाल कर रहे हैं क्योंकि उन्हें नई फोटो से व्यूज नहीं मिलेगी.”

प्राची मीडिया और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से नाराजगी जाहिर करते हुए कहती हैं, “इस बार मैंने टॉप नहीं किया फिर भी मेरी फोटो खूब शेयर हो रही है. लोग व्यूज के लिए किसी भी हद तक गिर जाते हैं. बहुत सारे मीडिया वालों को सवाल पूछने की तमीज नहीं होती. बार-बार एक ही सवाल ट्रोलिंग से जुड़ा हुआ. मैं तो ये सब कब का भूल चुकी हूं लेकिन सोशल मीडिया मुझे बार-बार याद दिलाता है कि कभी मेरे चेहरे के बाल बड़े थे. ये अच्छी बात नहीं है. सबका निजी जीवन है, पर्सनल लाइफ है.”

उनकी नाराज़गी बीते अनुभवों से है जो सीधे सवाल खड़े करती है और आईना भी दिखाती है. हालांकि वे यह भी कहती हैं कि उन्होंने खुद को इससे बाहर निकालना सीख लिया है.

ट्रोलिंग का इन दो सालों में आपके ऊपर क्या असर पड़ा? इस पर प्राची मुस्कुराते हुए कहती हैं, “मुझे कोई फर्क नहीं पड़ा. ट्रोलिंग के बाद बहुत फेम मिला. घूमने को बहुत मिला सम्मान भी मिला. अब भी बाहर कहीं जाती हूँ तो लोग दूर से ही पहचान जाते हैं.”

दिलचस्प यह है कि जिस ट्रोलिंग ने उन्हें परेशान किया, उसी ने उन्हें नए अनुभव भी दिए. फेम और असहजता दोनों इस कहानी के हिस्से हैं.

प्राची दो बहन और एक भाई में सबसे बड़ी हैं. इनके पिता नगर निगम में काम करते हैं और मां गृहिणी हैं. प्राची कहती हैं, “किसी को भी ट्रोल नहीं करना चाहिए. मैं सोचती ही नहीं हूं पर बहुत बच्चे दिमाग पर ले लेते हैं. ट्रोलिंग की वजह से बहुत लोग आत्महत्या तक कर लेते हैं.”

(आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुज़र रहे हैं तो भारत सरकार की हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.)

प्राची भले ही यह बात बार-बार कह रही हों कि उनके ऊपर इस ट्रोलिंग का कोई असर नहीं पड़ा लेकिन यह भी सच है कि अब वो किसी भी मीडिया हाउस से बात करने में बिल्कुल दिलचस्पी नहीं रखती हैं. सोशल मीडिया और मीडिया के व्यवहार को लेकर उनके मन में एक स्पष्ट नाराज़गी है.

मीडिया के रवैये पर प्राची का सवाल

प्राची अपने माता-पिता के साथ (फ़ाइल तस्वीर)

वो कहती हैं, “मुझे सोशल मीडिया पर आने की बिल्कुल इच्छा नहीं है. लोग सिर्फ़ व्यूज के लिए सोशल मीडिया चला रहे हैं. मीडिया को अच्छे मुद्दों पर बात उठानी चाहिए. जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य लेकिन इन सबमें व्यूज कहाँ मिलेंगे इसलिए ऐसी चीज़ उठाते हैं जिसमें व्यूज मिले.”

प्राची की मां ममता निगम ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बात करते हुए कहा, “अच्छी बात ये है कि मेरी बेटी ज़्यादा सोचती नहीं है लेकिन फिर भी एक ही बात को जब बहुत लोग कहते हैं तो असर तो पड़ता ही है. अगर मीडिया इतना ट्रोल नहीं करता तो शायद आज ये नौबत नहीं आती कि हम अब मीडिया से बात करने की इच्छा नहीं रखते हैं. हाईस्कूल में तो हम उसके यूपी टॉप होने पर बहुत खुश थे इसलिए हमने बहुत मीडिया से बात की लेकिन बाद में लोग सिर्फ़ उसके चेहरे के बालों पर बात करते हैं.”

लेकिन इन सबके बीच प्राची का मिलनसार स्वभाव नहीं बदला है. वो कहती हैं, “जिससे भी बात करती हूं फ्रेंडली बात करती हूं. मुझे किसी को हर्ट करना, उसका दिल दुखाना पसंद नहीं है.”

अच्छी नौकरी पाने का सपना

प्राची निगम का कोट

प्राची अपने भविष्य की कार्य योजना साझा करने से बचते हुए कहती हैं, “पिछली बार हमने कह दिया था कि हम आईआईटी जेईई की परीक्षा पास करके इंजीनियर बनना चाहते हैं. इस बार जब टॉप नहीं कर पायी तो बहुत लोगों ने लिखा कि इंजीनियर बनने की तैयारी कर रही थी तभी टॉप नहीं कर पायी जबकि यह सच नहीं है.”

“सपने तो बदल सकते हैं. मैं नहीं चाहती कि अब मैं किसी को बताऊं कि मेरा सपना क्या है? बस एक अच्छी सी नौकरी मिले जो मैं सोच रही हूँ. अपनी लाइफ इंजॉय करूं.”

आपको क्या लगता है कि मार्क्स भविष्य में जरूरी हैं? प्राची इस सवाल के जवाब में कहती हैं, “अगर आप शिक्षा के क्षेत्र में जा रहे हैं तो मार्क्स बहुत ज़रूरी हैं. लोग मार्क्स ही देखते हैं.”

हालांकि, उनके12वीं के अंक से घर-परिवार के लोग संतुष्ट हैं.

उनकी मां ममता निगम कहती हैं, “मैं तो इस बार भी उसके मार्क्स से बहुत खुश हूं. हमें कोई फर्क नहीं पड़ा कि उसने टॉप क्यों नहीं किया. हर बार वही टॉप करे ऐसा ज़रूरी तो नहीं. सबको मौका मिलना चाहिए. इस बार हमारे पास की ही दो लड़कियों ने हाईस्कूल और इंटर टॉप किया है पर उनके यहां मीडिया की उतनी भीड़ नहीं जितनी दो साल पहले हमारे यहां थी. भीड़ होने का कारण प्राची के चेहरे पर बाल होना था.”

प्राची के पिता चन्द्र प्रकाश निगम कहते हैं, “मुझे दो साल पहले भी ट्रोलर्स से कोई फ़र्क नहीं पड़ा और न ही मेरी बेटी पर. अगर हम लोगों को फ़र्क पड़ा होता तो हम लोग आज बेटी के जितने नंबर आये हैं उतने नहीं आए होते. बस यही है कि इस बार घर में भीड़भाड़ नहीं है. वो पढ़ाई पर फोकस करना चाहती है इसलिए हम सभी लोग मीडिया से अब दूर रहना चाहते हैं.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS