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ज्वैलरी शेयर 6% तक लुढ़के, मेटल स्टॉक्स को फायदा, सोना-चांदी पर कस्टम ड्यूटी बढ़ने का असर

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Source :- LIVE HINDUSTAN

कल्याण ज्वैलर्स, पीसी ज्वैलर, पीएन गाडगिल, सेंको गोल्ड और टाइटन कंपनी के शेयर 6% तक लुढ़क गए।

मोदी सरकार ने सोने और चांदी पर कस्टम ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी है। इस फैसले से ज्वैलरी कंपनियों के शेयरों पर भारी दबाव है, जबकि मेटल कंपनियों को तगड़ा फायदा हुआ है। बता दें एमसीएक्स पर आज सोना 10000 रुपये से अधिक उछलकर 164497 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। जबकि, चांदी 22299 रुपये प्रति किलो की तूफानी तेजी के साथ 3 लाख रुपये के पार चली गई।

आज यानी 13 मई को कल्याण ज्वैलर्स, पीसी ज्वैलर, पीएन गाडगिल, सेंको गोल्ड और टाइटन कंपनी के शेयर 6% तक लुढ़क गए। कस्टम ड्यूटी बढ़ने से सोना-चांदी महंगा हो गया है। इससे मांग घट सकती है और कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ेगा। इस वजह से निवेशकों में भगदड़ है।

एंजल वन के एक्सपर्ट राजेश भोसले के मुताबिक, पीएम मोदी ने लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की है। इससे ज्वैलरी स्टॉक्स पहले से ही दबाव में थे। अब ड्यूटी बढ़ने से यह दबाव और बढ़ेगा। उन्होंने निवेशकों को सलाह देते हुए कहा कि अभी इस सेक्टर में भारी निवेश से बचना चाहिए। हालांकि, अगर कोई सकारात्मक संकेत मिलता है तो टाइटन और सेंको गोल्ड बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

मेटल शेयरों में तेजी

दूसरी ओर, मेटल कंपनियों के शेयरों में जोरदार उछाल आया। निफ्टी मेटल इंडेक्स 1.3% चढ़ गया। हिंदुस्तान जिंक (5% का उछाल), हिंदुस्तान कॉपर (3% से अधिक), वेदांता, नेशनल एल्युमीनियम और हिंडाल्को सभी मजबूत दिख रहे।

भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता

भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है। पिछले साल (2025-26) में सोने का आयात रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर रहा, जो एक साल पहले 58 अरब डॉलर था। यह तेजी से बढ़ता आयात सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया था।

आम आदमी पर क्या असर होगा?

अब सोने की कीमतें और बढ़ सकती हैं। ज्वैलरी खरीदना महंगा हो जाएगा। हालांकि, पुराने गहने बदलने या रिसाइकल करने का चलन बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि निकट भविष्य में ज्वैलरी की मांग पर नकारात्मा असर पड़ेगा।

क्या चांदी वाली कंपनियों में मौका है?

चांदी की बढ़ती कीमतों का फायदा उन कंपनियों को होता है, जो चांदी का उत्पादन करती हैं, लेकिन भारत में शुद्ध रूप से सिल्वर माइनिंग करने वाली कंपनियां बहुत कम हैं। ज्यादातर कंपनियां जिंक, लेड या कॉपर के साथ चांदी बायप्रोडक्ट के रूप में निकालती हैं।

(डिस्‍क्‍लेमर: एक्सपर्ट्स की सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं, लाइव हिन्दुस्तान के नहीं। यहां सिर्फ शेयर के परफॉर्मेंस की जानकारी दी गई है, यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है और निवेश से पहले अपने एडवाइजर से सलाह-मशविरा कर लें।)

SOURCE : LIVE HINDUSTAN