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चीन से लौटे ट्रंप जिनपिंग को दिखाएंगे ठेंगा? ताइवान के राष्ट्रपति से मिलने के संकेत, ताइपे उत्साहित

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ताइवानी समकक्ष से मिलने के संकेत दिए हैं। चीन से लौटकर आए अमेरिकी राष्ट्रपति के इस कदम से जिनपिंग को मिर्ची लगनी तय है। 2016 में ट्रंप और ताइवान के तत्कालीन राष्ट्रपति के बीच हुए फोन कॉल पर बीजिंग ने कड़ी आपत्ति जताई थी।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे ने सबसे ज्यादा परेशान ताइवान को किया था। इस यात्रा के बाद लौटे ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए ताइवान के साथ होने वाली हथियारों की डील पर असमंजस की स्थिति पैदा कर दी थी। मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा था कि उन्हें इस बारे में ‘ताइवान चला रहे व्यक्ति’ से बात करनी होगी। अब ट्रंप की तरफ से इस आए इस प्रस्ताव पर ताइवान ने जवाब दिया है। ताइवान की तरफ से कहा गया कि अगर ट्रंप अपने ताइवानी समकक्ष लाई चिंग ते से बात करना चाहते हैं तो ताइपे इसका स्वागत करेगा।

ताइवान की तरफ से उप विदेश मंत्री चेन मिंग ची ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान को सुना है। वह लगातार अमेरिकी समकक्षों के साथ इस बात की पुष्टि करने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या सच में ट्रंप, लाई से बात करना चाहते हैं। चेन ने कहा, “हम सभी माध्यमों के जरिए अमेरिका से बात करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि हम समझ सकें कि आखिर अमेरिकी पक्ष सच में सोच क्या रहा है। अगर वास्तव में ऐसा है, तो हम इसका स्वागत करेंगे”

गौरतलब है कि ट्रंप की चीन यात्रा के दौरान हाल ही में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ट्रंप के सामने ही कह दिया था कि अगर वह ताइवान को समर्थन देना जारी रखते हैं, तो फिर दोनों देशों के बीच संघर्ष बढ़ सकता है। अनेक राष्ट्राध्यक्षों को असहज करने के लिए पहचाने जाने वाले ट्रंप जिनपिंग की इस बात को सुनकर भी कुछ नहीं कह सके थे। इतना ही नहीं अमेरिकी राष्ट्राध्यक्षों की चीन यात्रा के दौरान भी ताइवान को लेकर कोई खास चर्चा नहीं हुई थी।

ट्रंप और लाई की बातचीत से चीन को लगेगी मिर्ची

चीन यात्रा के दौरान और उसके बाद भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति और उनके सहयोगियों का ताइवान को लेकर रुख बदला हुआ नजर आया हो, लेकिन लाई के साथ अगर उनकी मुलाकात होती है, तो यह चीन के लिए असहज करने वाली स्थिति होगी।

बता दें, 1979 में अमेरिका ने बीजिंग की वन चाइना पॉलिसी को मानते हुए कम्युनिस्ट चीन को मान्यता दे दी थी। इसके बाद किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति की ताइवान के राष्ट्रपति के साथ आधिकारिक वार्ता नहीं हुई है। 2016 में चुनावी जीत के बाद जब ट्रंप ने तत्तकालीन ताइवान राष्ट्रपति त्साई इंग बेन के साथ बातचीत की थी, तो उस वक्त चीन ने इस पर नाराजगी जताई थी।

ताइवान को धोखा देखा अमेरिका?

शुरुआत से ही चीन के खिलाफ ताइवान की मदद करते आ रहे अमेरिका की नीति साफ रही है। लेकिन ट्रंप प्रशासन के हालिया बयानों ने इसे उलझा दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा के दौरान चीन ने ताइवान को लेकर अपनी स्थिति से अमेरिका को भली भांति समझा दिया। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने ताइवान के साथ हथियारों की डील पर भी असमंजस की स्थिति पैदा कर दी।

चीन से लौटते हुए ट्रंप ने कहा कि वह ताइवान के साथ होने वाली हथियारों की डील के बारे में बात करेंगे। इसके अलावा ट्रंप ने एक इंटरव्यू के दौरान ताइवान पर आरोप लगाया कि ताइपे ने अमेरिकी की चिप इंडस्ट्रीज को चुरा लिया है। अभी तक ट्रंप इस सवाल से बचते हुए नजर आए हैं कि क्या चीनी हमले के दौरान अमेरिका ताइवान की मदद करने के लिए आएगा या नहीं। इसके जवाब में ट्रंप ने कहा है कि चीन उनके कार्यकाल के दौरान ऐसा कुछ भी नहीं करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति की हालिया चीन यात्रा के बाद ताइवान राष्ट्रपति लाई ने कहा कि ताइपे किसी भी दबाव में झुकेगा नहीं। यूक्रेन, नाटो और तमाम सहयोगियों को साइडलाइन करने वाले ट्रंप क्या ताइवान को भी साइड कर देंगे, यह आने वाले समय में तय हो जाएगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN