Source :- BBC INDIA
इमेज स्रोत, Getty Images
साल 2026 की बात है, डोनाल्ड ट्रंप इंडियाना में एक चुनावी रैली के दौरान जब मंच पर पहुंचे तो उन्होंने एक बात बहुत साफ़ लब्ज़ों में कही- ‘चीन, अमेरिका का मुख्य आर्थिक प्रतिद्वंद्वी है.’
फ़ोर्ट वेन में उन्होंने भीड़ से कहा, “हम चीन को अपने देश का ‘बलात्कार’ करते रहने की इजाज़त नहीं दे सकते. हमारे पास भी कार्ड हैं. इसे मत भूलो. “
ट्रंप की चीन विरोधी बयानबाज़ी में कोई कमी नहीं आई. यह एक दशक तक उनकी रैलियों, 2024 के चुनावी अभियान और दूसरे कार्यकाल तक लगातार जारी रही.
ट्रंप अपने उन सहयोगियों के साथ दोबारा व्हाइट हाउस पहुँचे जो चीन विरोधी बयानबाज़ी के लिए जाने जाते हैं. इनमें हैं, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, उपराष्ट्रपति जेडी वांस और वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार पीटर नवारो.
ये सभी एक स्वर से बीजिंग पर अमेरिका को ‘लूटने’, टेक्नोलॉजी चुराने और अमेरिकी सड़कों पर फ़ेंटानिल की बाढ़ लाने के आरोप लगाते रहे हैं.
इसके बाद टैरिफ़ बढ़ने का मामला सामने आया. फ़रवरी 2025 में 10% से शुरू होकर अप्रैल के मध्य में ‘लिबरेशन डे’ तक यह 145% तक पहुँच गया.
ट्रंप ने चीन और अमेरिका के कई अन्य व्यापारिक साझेदारों पर इम्पोर्ट टैक्स लगाने की शुरुआत को ‘लिबरेशन डे’ ही नाम दिया था.
चीन ने भी जवाबी कार्रवाई की. उसने अमेरिका पर 125% टैरिफ़ लगा दिए और रेयर अर्थ के निर्यात पर रोक लगा दी. इसके साथ ही ट्रेड वॉर का आग़ाज़ हुआ.
अब बीजिंग दौरा
शॉर्ट वीडियो देखिए
प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

इसके बाद इसी हफ़्ते ट्रंप का बीजिंग दौरा हुआ.
ट्रंप ‘ग्रेट हॉल ऑफ़ द पीपल’ में रेड कार्पेट पर पहुँचे, जहाँ सैकड़ों बच्चे झंडे लहरा रहे थे और एक सैन्य बैंड ‘स्टार-स्पैंगल्ड बैनर’ की धुन बजा रहा था.
ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से कहा, “आपके साथ होना सम्मान की बात है. आपका दोस्त होना भी सम्मान की बात है. चीन और अमेरिका के बीच संबंध पहले से कहीं बेहतर होने जा रहे हैं.”
ट्रंप ने जल्द ही ‘शानदार ट्रेड डील्स’ की तारीफ़ की. हालांकि किसी बड़े समझौते की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक़, चिपमेकर एनवीडिया को 10 चीनी कंपनियों को सेमीकंडक्टर बेचने की मंज़ूरी दी गई और बोइंग को 200 विमान का ऑर्डर मिला. सिटी को चीन में सिक्योरिटीज़ कारोबार चलाने की मंज़ूरी भी मिल गई.
लेकिन नरम बयानबाज़ी और सौहार्दपूर्ण माहौल के बीच, चीन के ख़िलाफ़ कड़ा रुख़ से ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का पारंपरिक रूप से अधिक आक्रामक रवैया साफ़ झलकता है.
शिखर बैठक से एक हफ़्ते से भी कम समय पहले, अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने तीन चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए. आरोप था कि उन्होंने मध्य-पूर्व में अमेरिकी बलों पर हमले में मदद के लिए ईरान को सैटेलाइट तस्वीरें उपलब्ध कराईं.
लेकिन इसके अलावा और कई अहम मुद्दे अब भी बाकी हैं. इनमें सबसे प्रमुख ताइवान का मुद्दा है, जिसे बीजिंग अपना हिस्सा मानता है.
ट्रंप ने 14 अरब डॉलर की उस लंबित हथियार बिक्री पर बहुत कम जानकारी दी, जिसे चीन पर सख़्त रुख़ रखने वाले डेमोक्रेट और रिपब्लिकन पार्टी के नेता ज़रूरी मानते हैं.
दौरे से पहले, दोनों दलों के सीनेटरों के एक समूह ने ट्रंप को चिट्ठी लिखकर अपील की कि वह हथियार बिक्री को आगे बढ़ाएं और अपने चीनी समकक्ष को औपचारिक रूप से इसकी जानकारी दें.
ट्रंप ने एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से कहा, “ताइवान के मुद्दे पर शी जिनपिंग बहुत मज़बूती से सोचते हैं. मैंने किसी भी तरफ़ कोई प्रतिबद्धता नहीं दी.”
उन्होंने यह भी कहा कि हथियार बिक्री को लेकर वह ‘काफ़ी कम समय में फ़ैसला’ करेंगे.
गौर करने वाली बात यह रही कि बैठक के चीनी विवरण में ताइवान को सबसे अहम मुद्दा बताया गया. उसमें कहा गया कि अगर इस मुद्दे को हल नहीं किया गया, तो “टकराव और यहाँ तक कि संघर्ष भी हो सकता है, जिससे पूरे संबंध गंभीर ख़तरे में पड़ सकते हैं.”
वहीं व्हाइट हाउस के बयान में ताइवान का कोई ज़िक्र नहीं था.
मागा में कैसे देखा जा रहा

मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (मागा) आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों ने चीनी बयान को धमकी के तौर पर देखा.
ट्रंप के पूर्व रणनीतिकार स्टीव बैनन ने पोलिटिको से कहा, “मैं हैरान हूं. लोग इसे सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्होंने (शी जिनपिंग) शुरुआत ही धमकी से की. यह इतना खुला और साफ़ था कि उन्होंने इसे सबसे ऊपर रखा.”
हालांकि, कैपिटल हिल में चीन पर सख़्त रुख़ रखने वाले नेताओं और ट्रंप के सहयोगियों में से ज़्यादातर लोग यात्रा के बाद काफ़ी हद तक चुप रहे.
उन्होंने ट्रंप के दोस्ताना रवैये और ताइवान पर अस्पष्ट बयानों पर बहुत कम प्रतिक्रिया दी.
अमेरिका में चीन मामलों के जानकारों के लिए यह चुप्पी कोई हैरानी की बात नहीं थी.
जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश फ़ाउंडेशन फ़ॉर यूएस-चाइना रिलेशंस के अध्यक्ष और सीईओ डेविड फ़ायरस्टीन ने बीबीसी से कहा, “अगर एक महीने या एक साल में 50 राष्ट्रपति स्तरीय शिखर बैठकें भी हो जाएं, तब भी यह सच नहीं बदलेगा कि कुछ मुद्दों पर अमेरिका और चीन कभी सहमत नहीं होंगे.”
उन्होंने कहा, “इसका मतलब यह नहीं कि यह असफल शिखर बैठक होगी.”
फ़ायरस्टीन ने कहा कि ट्रंप की नरम होती भाषा और रवैया इस बात का संकेत हो सकता है कि 2017 की पिछली यात्रा के बाद अपनाई गई रणनीतियां काम नहीं कर पाईं.
उन्होंने कहा, “मार्केट एक्सेस, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स, सब्सिडी जैसी समस्याएं आज भी बनी हुई हैं. सूची बहुत लंबी है. आठ साल तक ये टैरिफ़ लागू रहने के बाद भी इनमें से कोई समस्या हल नहीं हुई.”
ताइवान का सवाल
इमेज स्रोत, Getty Images
काउंसिल ऑन फ़ॉरेन रिलेशंस में एशिया स्टडीज़ के फ़ेलो डेविड शैक्स ने कहा कि ट्रंप के नरम रवैये का असर दूसरे अधिकारियों, रिपब्लिकन सांसदों और उनके समर्थकों पर भी पड़ सकता है.
उन्होंने कहा, “पहले ट्रंप प्रशासन और हाल के किसी भी दूसरे अमेरिकी प्रशासन के मुक़ाबले यह कहीं ज़्यादा ऊपर से नियंत्रित सिस्टम है. मुझे लगता है कि प्रशासन में ज़्यादातर लोग सिर्फ़ नीतियों को लागू करने की भूमिका में हैं.”
शैक्स की बातों से नेशनल कमिटी ऑन यूएस-चाइना रिलेशंस के अध्यक्ष स्टीफ़न ऑरलिन्स ने भी सहमति जताई.
उन्होंने कहा, “जब ट्रंप कोई राय देते हैं, तो लोग उसका पालन करते हैं. उनका समर्थक वर्ग भी वही करता है.”
हालांकि, ट्रंप अब भी ताइवान को लेकर एक दुविधा का सामना कर रहे हैं.
राजनीतिक गलियारों के दोनों पक्षों से उन पर दबाव बना रहेगा कि सितंबर में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की व्हाइट हाउस यात्रा से पहले वह 14 अरब डॉलर की लंबित हथियार बिक्री को औपचारिक मंज़ूरी दें.
शैक्स ने कहा, “मुझे लगता है कि कांग्रेस लगातार चिट्ठी लिखकर ट्रंप प्रशासन से ताइवान को हथियार बिक्री की मंज़ूरी देने की मांग करती रहेगी.”
उन्होंने कहा कि तब तक, जब भी “प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी कांग्रेस के सामने जाएंगे, उनसे ताइवान को हथियार बिक्री की स्थिति पर सवाल पूछे जाते रहेंगे.”
हालांकि, ओवल ऑफ़िस से अंतिम फ़ैसला आना तय नहीं माना जा सकता.
शैक्स ने कहा, “सितंबर से पहले ताइवान को बड़े पैमाने पर अमेरिकी हथियार बिक्री शी जिनपिंग की यात्रा को ख़तरे में डाल सकती है. 14 अरब डॉलर का पैकेज अब वास्तव में बड़ा सवाल बन गया है.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
शॉर्ट वीडियो
प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
-

00:45
वीडियो, बढ़ती महंगाई पर क्या बोले दिल्ली के लोग, अवधि 0,45
-

01:27
वीडियो, अमेरिका से रिश्तों पर क्या बोले जिनपिंग, अवधि 1,27
-

01:34
वीडियो, नीट पेपर लीक, स्टूडेंट्स निराश, अवधि 1,34
-

01:17
वीडियो, पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें बढ़ने पर क्या बोले विपक्ष के नेता?, अवधि 1,17
-

01:32
वीडियो, नीट पेपर लीक पर क्या बोले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान?, अवधि 1,32
-

01:20
वीडियो, तेज़ रफ्तार आंधी में ये शख़्स भी उड़ गया, अवधि 1,20
-

00:41
वीडियो, 80 साल की उम्र में इस महिला ने इस अंदाज़ में मनाया अपना बर्थडे, अवधि 0,41
-

01:24
वीडियो, प्रतीक यादव की मौत पर क्या बोले अखिलेश यादव?, अवधि 1,24
-

00:27
वीडियो, ईरान युद्ध और अमेरिकी लोगों की आर्थिक स्थिति पर बोले ट्रंप, अवधि 0,27
-

01:11
वीडियो, NEET 2026 परीक्षा रद्द, NTA ने क्या बताया?, अवधि 1,11
-

01:07
वीडियो, असम: हिमंत बिस्वा सरमा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, अवधि 1,07
-

01:02
वीडियो, जब फ़्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने स्टेज पर चढ़कर लोगों को शोर न करने को कहा, अवधि 1,02
-

01:33
वीडियो, विनेश फोगाट की कुश्ती महासंघ से तकरार, अवधि 1,33
-

01:25
वीडियो, भारत में सबसे ज़्यादा सोना किसके पास है?, अवधि 1,25
-

01:26
वीडियो, पीएम मोदी ने सोना न ख़रीदने और खाने का तेल कम इस्तेमाल करने की अपील की, अवधि 1,26
-

01:27
वीडियो, जब शाहरुख़ ख़ान पर लगे थे मैच के बाद नियम तोड़ने के आरोप, अवधि 1,27
-

00:25
वीडियो, तमिलनाडु: सी. जोसेफ़ विजय ने ली सीएम पद की शपथ, अवधि 0,25
-

01:07
वीडियो, माखनलाल सरकार कौन हैं?, अवधि 1,07
-

00:42
वीडियो, शुभेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह के लिए देशभर से पहुंचे नेता, अवधि 0,42
-

07:32
वीडियो, बीमारी से ग्रस्त होने के बावजूद 10वीं बोर्ड परीक्षा में हासिल किए 93% अंक, अवधि 7,32
SOURCE : BBC NEWS























