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गुड न्यूज: पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में राहत देने की तैयारी

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Petrol Diesel LPG: अब सरकार पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के लिए कीमतों को लेकर राहत देना चाहती है। सरकार स्टेब्लाइज्ड फंड के जरिए पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का एक तय मात्रा में भंडार (रिजर्व) तैयार करेगी।

देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) की कीमतों में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए सरकार एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। सरकार इनके लिए एक विशेष वित्तीय व्यवस्था बनाने विचार कर रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर बाजार में दखल देकर कीमतों को नियंत्रित किया जा सके और आम लोगों को राहत दी जा सके। पेश है धीरेंद्र कुमार/ऋतुराज बरुआ की रिपोर्ट…

मामले से जुड़े दो वरिष्ठ अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उनके मुताबिक, यह योजना इसलिए बनाई जा रही है, क्योंकि पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण तेल की कीमतें बढ़ गई हैं और सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे हालात में आम लोगों पर महंगाई का बोझ बढ़ सकता है। यह प्रस्ताव उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के स्तर पर विचाराधीन है।

पहले से क्या व्यवस्था है

दाल, प्याज, आलू और टमाटर जैसी जरूरी चीजों के लिए स्थिरता कोष (Stabilization Fund) साल 2015 में शुरू किया गया था। जब इन चीजों की कीमतें बहुत बढ़ जाती हैं तो सरकार इस फंड से सामान खरीदकर बाजार में बेचती है, जिससे कीमतें नियंत्रण में रहती हैं। अब सरकार इसी तरह का फंड पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के लिए बनाना चाहती है। हाल ही में वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय बैठक में इस पर चर्चा हुई है।

कैसे काम करेगा यह फंड

सरकार इस फंड के जरिए पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का एक तय मात्रा में भंडार (रिजर्व) तैयार करेगी। इसके लिए तेल रिफाइनरी कंपनियों के साथ समझौते किए जाएंगे। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें अचानक बढ़ेंगी या सप्लाई बाधित होगी, तब इस भंडार को बाजार में जारी किया जाएगा, जिससे कीमतों पर दबाव कम होगा और लोगों को राहत मिलेगी।

मामले से जुड़े अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह योजना सब्सिडी नहीं है। इसका इस्तेमाल केवल असामान्य स्थिति में कीमत बढ़ने पर ही किया जाएगा, ताकि बाजार में सप्लाई बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित किया जा सके।

रणनीतिक भंडार से अलग होगा

विशेष कोष से तैयार नया तेल-गैस भंडार देश के मौजूदा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से अलग होगा। अभी भारत के पास लगभग 5.3 मिलियन टन कच्चे तेल का रणनीतिक भंडार है, जिसका इस्तेमाल आपात स्थिति में किया जाता है, जबकि नया फंड कीमतों को स्थिर रखने के लिए उपयोग होगा।

इसलिए पड़ रही जरूरत

पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर करीब 100 डॉलर तक पहुंच गई है। हार्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके कारण कुछ निजी पेट्रोल पंपों ने दाम बढ़ा दिए हैं। सरकारी तेल कंपनियों ने कुछ विशेष ईंधन के दाम बढ़ाए हैं, लेकिन आम पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बदले हैं।

सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये प्रति लीटर घटा दी है। फिर भी सरकारी कंपनियों को प्रति लीटर पेट्रोल पर 25 रुपये और डीजल पर 105 रुपये का नुकसान हो रहा है। वही, एलपीजी में कमर्शियल गैस के दाम काफी बढ़ गए हैं और उपलब्धता भी कम हो गई है। घरेलू एलपीजी के दाम सिर्फ मार्च में एक बार 60 रुपये बढ़ाए गए थे।

भंडारण क्षमता बढ़ानी होगी

अधिकारियों के अनुसार, अभी यह योजना शुरुआती चरण में है। इस योजना में संबंधित उत्पादों के लिए अलग से भंडारण क्षमता भी बढ़ानी पड़ेगी। अभी रिफाइनरियों के पास अपने काम के लिए भंडारण है, लेकिन नए भंडार के लिए काफी ज्यादा जगह की जरूरत होगी।

इस पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर अरुण कुमार का कहना है कि पेट्रोलियम उत्पादों के लिए इस तरह का फंड बनाना व्यावहारिक है। उनके अनुसार, आवश्यक वस्तुओं की तरह जब कीमतें बढ़ती हैं, तो सरकार खुदरा स्तर पर हस्तक्षेप कर सीमित मात्रा में सस्ती सप्लाई उपलब्ध कराती है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN