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ऐ मेरे वतन के लोगों…इस गाने को सुनकर रो पड़े थे पं. जवाहरलाल नेहरू; गीतकार को होना पड़ा था अंडरग्राउंड

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Source :- LIVE HINDUSTAN

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एक ऐसा देशभक्ति गीत जिसे सुनने के बाद रो पड़े थे पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू। इस गाने को लिखने वाले गीतकार के खिलाफ अंग्रेजी सरकार ने दिया था गिरफ्तारी का आदेश। आज भी अमर हैं इनके लिखे गीत।

हिंदी सिनेमा की कई देशभक्ति फिल्में बनीं, कई गीत बने जिसमें देश के लिए मरने-मिटने की बातें कहीं गई। इन गीतों को सुन कोई आम इंसान भी रो पड़े। ऐसा ही एक गीत 1963 में बना जिसे जब उस समय देश के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू भी अपने आंसू नहीं रोक पाए थे। ये गाना था ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’। इस गाने को आवाज लता मंगेशकर ने दी थी। लेकिन कम ही लोग इस गाने को लिखने वाले के बारे में जानते हैं। एक ऐसा गीतकार जिसने अपने लिखे गीतों से हिंदी सिनेमा और म्यूजिक को अलग पहचान दिलाई।

चीन के साथ युद्ध के बाद बना था ये गाना

ये बात 1962 में हुए भारत और चीन के बीच हुई वॉर के बाद की स्थिति की है। इस युद्ध में देश के कई सैनिक शहीद हो गए थे। ऐसे में रामचंद्र नारायणजी द्विवेदी जिन्हें कवि प्रदीप के नाम से जाना जाता है। कवि प्रदीप ने उस समय सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए एक गीत लिखा था ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’। ये गीत तब अमर हो गया जब 26 जनवरी 1963 गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली के रामलीला मैदान में सुनाया गया। इस गीत को गाने के लिए लता मंगेशकर दिल्ली के रामलीला मैदान में पहुंची थीं। उन्होंने भीड़ के सामने जब ये गाना शुरू किया तो लोगों की आंखें नाम हो गई।

जवाहरलाल नेहरू हो गए थे भावुक

लता मंगेशकर की आवाज में इस गाने को सुनकर जवाहरलाल नेहरू के आंखों में आंसू थे। उस समय सभी भावुक थे। ये गीत उस दिन अमर हो गया। इस गाने को लिखने वाले कवि प्रदीप ने गाने से कमाए पैसों को वॉर में मारे गए सैनिकों की विधवाओं के नाम कर दिया था।

ब्रिटिश सरकार ने दिया था गिरफ्तारी का आदेश

कवि प्रदीप के बारे में बात करें तो उनका जन्म उज्जैन में हुआ था। 1940 में रिलीज हुई फिल्म बंधन के गानों से इन्हें इंडस्ट्री में पहचान मिली। 1943 में फिल्म किस्मत के देशभक्ति गीत ‘दूर हटो ऐ दुनिया वालों हिंदुस्तान हमारा है’ से पहचान मिली। हालांकि, इस गाने से उस समय की ब्रिटिश सरकार खुश नहीं थी और उन्होंने गीतकार की गिरफ्तारी के आदेश दे दिए थे। ब्रिटिश सरकार के इस आदेश से बचने के लिए कवि प्रदीप को अंडरग्राउंड होना पड़ा था।

लिखे ये गाने

इसके बाद भी कवि प्रदीप ने फिल्मों के लिए गीत लिखने जारी रखे। उन्होंने अपने फिल्मी करियर में कई शानदार गाने लिखे। कवि प्रदीप ने फिल्म जागृति से ‘आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं’फिल्म जय संतोषी मां से ‘मैं तो आरती उतारूं रे संतोषी माता की’, ‘मदद करो संतोषी मां’ ‘मत रो मत रो आज’ जैसे गीत लिखे। 1998 में 83 साल की उम्र में कवि प्रदीप का निधन हो गया था।

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