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अपडेटेड एक घंटा पहले
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ईरान और अमेरिका-इसराइल के बीच पांच हफ़्ते तक चली जंग के दौरान दो हफ़्ते का युद्धविराम हुआ था जिसकी समय सीमा बुधवार को ख़त्म हो रही थी. लेकिन इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे फिर से आगे बढ़ा दिया है.
इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता होने वाली थी, लेकिन ईरान का प्रतिनिधिमंडल नहीं पहुंचा. अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस की अगुवाई में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को पाकिस्तान रवाना होने वाला था, ऐसा नहीं हुआ.
लेकिन युद्ध विराम ख़त्म होने से पहले ही ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर इसकी समय सीमा बढ़ाने की घोषणा की. राष्ट्रपति ने कहा कि यह फ़ैसला पाकिस्तान के अनुरोध पर लिया गया, “हमसे कहा गया है कि हम ईरान पर अपना हमला तब तक रोकें, जब तक उसके नेता और प्रतिनिधि एक साझा प्रस्ताव लेकर नहीं आते.”
इसके कुछ घंटे बाद ही, बुधवार को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने तीन कार्गो जहाज़ों पर हमला कर दो को सीज़ कर लिया. इनमें एक पर ग्रीस का और दूसरे पर पनामा का झंडा लगा था जबकि तीसरा जहाज़ यूएई की एक कंपनी का है.
बीबीसी के मध्य पूर्व विश्लेषक सेबेस्टियन अशर का कहना है कि युद्धविराम की समय सीमा बढ़ाने की घोषणा के कुछ घंटों बाद, ईरान होर्मुज़ स्ट्रेट पर अपना कंट्रोल बढ़ाने में जुट गया और ऐसा लगता है कि मौजूदा गतिरोध, संघर्ष को फिर से भड़का सकता है.
युद्धविराम को बढ़ाए जाने की ख़बर और होर्मुज़ स्ट्रेट में ताज़ा हमले को लेकर अरब मीडिया में आशंका जताई जाने लगी है
‘भ्रामक शांति’
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अल जज़ीरा ने ‘द इकोनॉमिस्ट’ की एक स्टोरी का हवाला देते हुए कहा कि खाड़ी में ‘मौजूदा शांति भ्रामक’ है.
इस लेख के अनुसार, 22 अप्रैल तक, ब्रेंट क्रूड की क़ीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब बनी रही, हालांकि इसमें तेज़ उतार चढ़ाव दिखाता है कि वास्तविक जोखिम अधिक होने के बावजूद व्यापारी अभी सफलता की उम्मीद लगाए बैठे हैं.
अल जज़ीरा में लिखा है, “ब्रिटिश अखबार के अनुसार, इस स्थिर क़ीमत के पीछे एक गहरा संकट छिपा है. ईरान पर अमेरिका-इसराइल के 50 दिनों के युद्ध के दौरान दुनिया को खाड़ी तेल के लगभग 55 करोड़ बैरल का नुक़सान हुआ, जो पिछले साल के वैश्विक उत्पादन का लगभग 2% है. इसके अलावा, होर्मुज़ के बंद रहने से हर महीने बाज़ार में 70 लाख टन लिक्विड नेचुरल गैस की कमी हो जाती है, जो वार्षिक वैश्विक आपूर्ति का लगभग 2% है.”
“यह आंकड़ा और भी चिंताजनक होता जा रहा है क्योंकि इस झटके का असर अब सिर्फ़ सैद्धांतिक नहीं रहा है बल्कि शिपमेंट में भारी कमी के रूप में सामने आने लगा है.”
अल जज़ीरा ने फ़ाइनेंशियल टाइम्स का हवाला देते हुए कहा, “युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज़ को पार करने वाले आखिरी टैंकर रिफ़ाइनरियों तक पहुंच चुके हैं या पहुंचने वाले हैं, जिसका मतलब है कि हफ़्तों तक वैश्विक बाज़ार को सुरक्षित रखने वाला ‘सुरक्षा कवच’ अब ख़त्म होने वाला है.”
ईरान से क्यों मिल रहे मिले-जुले संकेत
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अल जज़ीरा ने लिखा कि ईरान के पास जहाज़ों पर फ़ायरिंग ने होर्मुज़ स्ट्रेट में तनाव को बढ़ा दिया है.
इसके अनुसार, “खाड़ी देश चाहते हैं कि अमेरिका की नौसैनिक नाकाबंदी हटाई जाए और होर्मुज़ स्ट्रेट को खोला जाए. ईरान ने दिखाया है कि वह इस अहम स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण कर सकता है.”
वेबसाइट ने लिखा है कि ईरान की ओर से एक साथ सकारात्मक और नकारात्मक सिग्नल भेजे जा रहे हैं.
“ईरान कह रहा है कि वह थोपे गए नियमों और शर्तों के तहत बातचीत नहीं करेगा. जब हम ईरान और अमेरिका के शुरुआती 10 बिंदु और 15 बिंदु प्रस्तावों की तुलना करते हैं, तो समझ आता है कि दोनों पक्षों के बीच गहरा अंतर है.”
“माहौल पर अमेरिका के प्रति ईरान के अविश्वास का असर है, साथ ही संभावित असफल बातचीत से जुड़ी सैन्य बयानबाज़ी भी जारी है. यह संकेत है कि टकराव का एक और दौर सामने आ सकता है.”
लेख में कहा गया है, “ईरान अब भी होर्मुज़ स्ट्रेट को किसी भी बातचीत में अहम प्रेशर पॉइंट के रूप में देखता है. ईरान यहाँ से गुजरने वाले जहाज़ों पर अपना अधिकार दिखाने की कोशिश कर रहा है.”
ट्रंप ने सीज़फ़ायर क्यों बढ़ाया?
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लेख के अनुसार, “ऊंचे दांव वाली कूटनीति में एक जाना-पहचाना पैटर्न सामने आता है. इसमें युद्धविराम अंत नहीं होता, बल्कि एक ठहराव होता है, जो समय लेने, दबाव बनाने और यह परखने के लिए होता है कि कोई समझौता संभव है या नहीं.”
“इसके पीछे तीन बातें समानांतर हो सकती हैं: बातचीत को जारी रखना, ईरान पर दबाव बनाए रखना, और क्षेत्र की अस्थिर हालत को संभालना.”
“ट्रंप ने युद्धविराम बढ़ाने पर सहमति दी. साथ ही, अमेरिका आर्थिक दबाव बनाए हुए है. ट्रंप ने दावा किया कि होर्मुज़ स्ट्रेट से जुड़ी नाकाबंदी के कारण ईरान ‘आर्थिक रूप से टूट रहा है’, उन्होंने लिखा कि देश नकदी के लिए तरस रहा है. वह हर दिन 500 मिलियन डॉलर खो रहा है.”
लेख के मुताबिक़, “इस तरह यह रणनीति दोहरा उद्देश्य पूरा करती है, यानी इससे कूटनीतिक रास्ते खुले रहते हैं और साथ ही उन शर्तों को मजबूती मिलती है जिनके तहत ईरान से बातचीत की उम्मीद की जा रही है.”
अगली वार्ता पर अनिश्चितता के बादल
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अल अरबिया ने लिखा है कि ट्रंप के हमले रोकने के बाद ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाज़ों को ज़ब्त किया है. इससे अगले दौर की वार्ता पर ‘अनिश्चितता गहरी’ हो गई है.
वेबसाइट के अनुसार, “मंगलवार को अपनी घोषणा में ट्रंप आख़िरी समय पर ईरान के पावर प्लांट और पुलों पर बमबारी की चेतावनी से पीछे हट गए, जिसे संयुक्त राष्ट्र और अन्य संस्थाओं ने संभावित युद्ध अपराध बताया था. ईरान ने कहा था कि अगर उसके नागरिक ढांचे पर हमला हुआ तो वह अपने अरब पड़ोसियों पर हमला करेगा.”
अल अरबिया ने समाचार एजेंसी एपी के हवाले से मिस्र में तैनात ईरानी दूतावास के प्रमुख मोजतबा फ़िरदौसी का एक बयान छापा है.
उस बयान में फ़िरदौसी ने कहा, “ईरान धमकी के साये में वार्ता नहीं करेगा. और नाकेबंदी हटने से पहले इस्लामाबाद नहीं जाएगा.”
एक अन्य लेख में अल अरबिया ने ईरान के कृषि मंत्री ग़ोलामरेज़ा नूरी के उस बयान को प्रकाशित किया है जिसमें कहा गया है कि अमेरिकी नेवी नाकेबंदी से ईरान की फ़ूड सप्लाई पर बहुत थोड़ा असर पड़ा है.
मंगलवार को ग़ोलामरेज़ा ने ईरान की न्यूज़ एजेंसी से कहा, “देश में लगभग 85 प्रतिशत कृषि उत्पाद और ज़रूरी सामान घरेलू स्तर पर ही उत्पादित होते हैं, इसलिए देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित है.”
अमेरिका ने 13 अप्रैल को ईरान की बंदरगाहों और तटों पर नौसैनिक नाकेबंदी लागू की थी. ईरान ने इस नाकेबंदी की कड़ी आलोचना की और इसे युद्धविराम का उल्लंघन बताया.
‘ट्रंप की समय सीमा अधिकतम 5 दिन’
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अल अरबिया ने एक्सियोस के हवाले से एक लेख में कहा है कि ‘ईरान के लिए ट्रंप की समय सीमा अधिकतम 5 दिन है.’
वेबसाइट के अनुसार, “एक्सियोस ने बुधवार को एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम को 3 से 5 दिनों की सीमित अवधि के लिए बढ़ाने का फ़ैसला किया है.”
“यह ईरान को अमेरिकी प्रस्तावों पर स्पष्ट प्रतिक्रिया देने का मौका देने का अंतिम प्रयास है. हालांकि पहले की रिपोर्टों में संकेत दिया गया था कि ट्रंप की समय सीमा किसी ख़ास अवधि तक सीमित नहीं थी.”
वेबसाइट में लिखा है, “अमेरिकी अधिकारी ने यह भी बताया कि पहले दौर की बातचीत में हुई अधिकांश चर्चाओं को बाधित करने के पीछे आईआरजीसी कमांडर अहमद वाहिदी थे.”
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