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अमेरिका से जंग के बीच ईरान में कैसे ज़िंदगी बिता रहे हैं लोग

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Source :- BBC INDIA

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    • Author, बीबीसी फ़ारसी सेवा
  • 23 अप्रैल 2026, 08:53 IST

  • पढ़ने का समय: 8 मिनट

(बीबीसी पर्शियन, बीबीसी न्यूज़ की फ़ारसी भाषा सेवा है, जिसके दुनिया भर में लगभग 2.4 करोड़ पाठक/दर्शक हैं. इनमें ज़्यादातर ईरान में हैं. हालांकि ईरानी अधिकारियों ने इसे ईरान में ब्लॉक किया है और इसके प्रसारण में अक्सर व्यवधान (जैमिंग) डाला जाता है.)

ईरान की राजधानी तेहरान जैसे शहरों में रोज़मर्रा की ज़िंदगी आंशिक तौर पर सामान्य होने के संकेत दिख रहे हैं.

लेकिन सोशल मीडिया पर ईरानी यूज़र्स के अलग-अलग अनुभव सामने आ रहे हैं.

यह एक ऐसी कहानी है, जिसमें एक ओर जीवन को सामान्य रूप से जारी रखने की कोशिश है, तो दूसरी ओर मानसिक थकान, आर्थिक दबाव और इंटरनेट तक असमान पहुंच पर चल रही बहस भी शामिल है.

हालांकि ये अनुभव केवल कुछ लोगों की व्यक्तिगत झलक पेश करते हैं और इनसे पूरे समाज का प्रतिनिधित्व नहीं होता.

लेकिन ये बताते हैं कि पिछले हफ़्तों में उठाए गए कई मुद्दे, जैसे इंटरनेट प्रतिबंध, आर्थिक दबाव और युद्ध से पैदा हुई चिंता,अभी भी जारी हैं.

इन संदेशों के बीच हालात से निपटने के तरीके को लेकर मतभेद भी दिखाई देता है.

कुछ यूज़र्स ने इस बात की आलोचना की है कि ऐसे समय में कुछ लोग रोज़मर्रा की साधारण चीज़ों, जैसे कपड़े खरीदना या कैफ़े जाने के बारे में लिख रहे हैं. वो इसे मौजूदा स्थिति की अनदेखी बता रहे हैं.

जंग के बीच ज़िंदगी जारी रखने की जद्दोजहद

ईरान में लोग जंग के बीच ज़िंदगी जीने का जज़्बा भी ज़ाहिर कर रहे हैं

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इसके उलट, कुछ लोग अपनी ज़िंदगी जारी रखने के हक का बचाव करते दिख रहे हैं.

एक यूज़र ने लिखा कि भले ही वह “कल रात से अब तक कई बार रो चुका है”, फिर भी हो सकता है कि वह “अपने सुंदर कपड़े पहनकर दोस्तों के साथ कहीं घूमने जाए”.और इस बात पर किसी को उसे जज नहीं करना चाहिए.”

एक अन्य यूज़र ने फुटबॉल मैच के बारे में लिखने का ज़िक्र करते हुए कहा कि “हमारे दिमाग को भी कभी-कभी दूसरी चीज़ों में लगने की ज़रूरत होती है… इसलिए ‘सफेद सिम-कार्ड’ वालों (यानी जिन पर कम पाबंदियां हैं) को दोष मत दीजिए.”

ईरान में सफ़ेद सिम जिन लोगों के पास होती है वो बाक़ी यूज़र्स की तुलना में इंटरनेट बेहतर तरीक़े से एक्सेस कर पाते हैं. वो कई ऐसी साइट भी एक्सेस कर पाते हैं जो आम लोगों के लिए उपलबप्ध नहीं होतीं.

एक और यूज़र ने लिखा, “यह अजीब नहीं है…हमारे दिमाग को भी कुछ पल के लिए दूसरी चीज़ों में लगने की ज़रूरत होती है, ताकि हम टूट न जाएं. शायद हमारी ज़िंदगी अभी लंबे समय तक ऐसी ही रहने वाली है.”

कुछ संदेशों में एंग्जाइटी से निपटने की अलग-अलग कोशिशों का भी ज़िक्र मिलता है.

जैसे एक यूजर ने लिखा, “देखते ही देखते मेरी एंग्जाइटी इतनी बढ़ गई कि सुबह छह बजे से ही घर की सफ़ाई में लग गया.”

ईरान में “इंटरनेट प्रो” एक तरह की विशेष और सीमित इंटरनेट सुविधा है, जो कुछ यूज़र्स को अपेक्षाकृत कम प्रतिबंधों के साथ दी जाती है.

इंटरनेट का मुद्दा अब भी लोगों की बहस का केंद्र है. यूजर्स लगातार प्रतिबंधों, ऊँची कीमतों और इसके उनके रोज़मर्रा के जीवन पर पड़ने वाले असर के बारे में लिख रहे हैं.

सीमित इंटरनेट एक्सेस को लेकर नाराज़गी

ईरान में इंटरनेट

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कुछ लोगों ने इंटरनेट एक्सेस में दिक़्कतों का ज़िक्र किया है.

जैसे एक यूज़र ने लिखा, “बहुत मुश्किल से मैं एक जीबी स्पेस ख़रीद पाया और इसके लिए मुझे दस लाख रियाल खर्च करने पड़े.”

एक अन्य यूज़र अपने इंटरनेट के जल्दी खत्म हो जाने को लेकर चिंतित है और कहता है, “मुझे लगातार डर रहता है कि ये महंगा दो जीबी इंटरनेट स्पेस ख़त्म हो जाएगा और मैं फिर अंधेरे में चला जाऊंगा.”

इसके साथ ही, यूज़र्स ने बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया है कि वे इंटरनेट को एक सार्वजनिक अधिकार मानते हैं.

एक संदेश में लिखा है, ” खुला इंटरनेट सबका अधिकार है.”

एक अन्य यूज़र ने लिखा, “अधिकार भीख में नहीं मांगा जाता… इंटरनेट, बस इंटरनेट है. बगैर किसी किंतु-परंतु के साथ.”

यूज़र्स की बातों में बार-बार “इंटरनेट प्रो” नाम की एक योजना का ज़िक्र आता है.

इस शब्द का मतलब ऐसी इंटरनेट एक्सेस है जो किसी ख़ास और वर्ग को दी जा रही है, जैसे क़ारोबार या यूनिवर्सिटी से जुड़े लोग.

ये लोग एक्सट्रा पेमेंट या तय कोटा के ज़रिये कम प्रतिबंधों वाला या अधिक व्यापक इंटरनेट इस्तेमाल कर सकते हैं.

जबकि आम लोगों के लिए इंटरनेट की पहुंच पहले की तरह सीमित ही रहती है.

‘इंटरनेट प्रो’ पर इतनी बहस क्यों

ईरान में इंटरनेट

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यूजर्स ने इस स्थिति को कई बार “वर्ग-आधारित इंटरनेट” (इंटरनेट का बंटवारा) भी कहा है.

कई संदेशों में कुछ यूजर्स ने इस व्यवस्था को असमान इंटरनेट एक्सेस का उदाहरण बताया है.

एक यूज़र ने लिखा, “इंटरनेट प्रो’ का मतलब है एक सार्वजनिक अधिकार को वर्गों में बाँटना.”

वहीं एक अन्य यूज़र ने कहा कि अलग-अलग समूहों को अलग तरह की इंटरनेट सुविधा देने से “समाज और वर्ग विभाजन और बढ़ेगा.”

अन्य संदेशों में भी उन लोगों के बीच खुले इंटरनेट तक पहुंच और इस पर पाबंदी की बात की गई है.

कुछ यूजर्स ने अपील की है, “उन लोगों की आवाज़ बनिए, जिन्हें हज़ारों घंटों से इंटरनेट नहीं मिला है.”

पिछले दिनों की तरह, कई यूज़र्स ने लिखा है कि इन हालात का उनके काम और आजीविका पर सीधा असर पड़ा है.

कुछ संदेशों में आर्थिक गतिविधियों के ठप होने की बात कही गई है.

ख़ासकर छोटे कारोबार से लेकर इंटरनेट पर निर्भर नौकरियों पर इसके असर की बात की गई है.

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SOURCE : BBC NEWS