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होर्मुज़ में तनाव बढ़ा: ईरान ने तीन मालवाहक जहाज़ों पर हमले के बाद दो को ज़ब्त किया

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Source :- BBC INDIA

होर्मुज़ स्ट्रेट

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6 घंटे पहले

पढ़ने का समय: 6 मिनट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से युद्धविराम की समय सीमा बढ़ाने के बाद से, बुधवार को होर्मुज़ स्ट्रेट में तीन कार्गो जहाज़ों पर हमले हुए हैं और ईरान ने दो को सीज़ कर लिया है.

यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर (यूकेएमटीओ) के अनुसार, पहले जहाज़ पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने फ़ायरिंग की थी.

ईरानी मीडिया के अनुसार, आईआरजीसी ने होर्मुज़ स्ट्रेट में निशाना बनाए गए तीनों जहाज़ों को टार्गेट किया. आईआरजीसी से जुड़ी फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी का कहना है कि “यूफ़ोरिया” जहाज़ को निशाना बनाया गया और अब वह ईरान के तट के पास है.

आईआरजीसी की नेवी का कहना है कि एमएससी फ़्रांसेस्का और एपामिनोंडास कार्गो जहाज़ों को “क़ब्ज़े में लिया गया” और उन्हें ईरान के तट की ओर मोड़ा गया. नेवी का कहना है कि जहाज़ “ज़रूरी परमिट के बिना संचालन कर रहे थे और नेविगेशन सिस्टम में छेड़छाड़ कर रहे थे.”

ट्रंप ने मंगलवार रात को कहा था कि वो सीज़फ़ायर बढ़ा रहे हैं, साथ ही अमेरिका की ओर से स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ की नाकेबंदी जारी रखी जा रही है, जिसका मकसद पाकिस्तान में अमेरिका के साथ होने वाली बातचीत से पहले ईरान पर दबाव बनाना है.

लेकिन बातचीत की स्थिति साफ़ नहीं है. अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस मंगलवार को तय कार्यक्रम के अनुसार, पाकिस्तान के लिए रवाना नहीं हुए, जबकि ईरान ने ट्रंप के बयान पर अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है.

ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ के सलाहकार ने कहा कि सीज़फ़ायर बढ़ाने का ‘कोई मतलब नहीं है’ और इसे ‘अचानक हमले के लिए समय तलाशने की चाल’ बताया.

महदी मोहम्मदी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, “हारने वाला पक्ष शर्तें नहीं तय कर सकता. घेराबंदी जारी रखना बमबारी से अलग नहीं है और इसका जवाब सैन्य कार्रवाई से देना होगा.”

उन्होंने लिखा, “ट्रंप ने युद्धविराम इसलिए बढ़ाया है ताकि अचानक से हमला करने की तैयारी कर सकें. अब समय आ गया है कि ईरान इसकी पहल करे.”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 अप्रैल को युद्धविराम की मियाद को अनिश्चित समय के लिए बढ़ा दी है.

पहले जहाज़ पर था ग्रीस का झंडा

यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर के अनुसार, आईआरजीसी ने होर्मुज़ स्ट्रेट में एक कंटेनर जहाज़ पर फ़ायरिंग की.

ब्रिटिश रॉयल नेवी की अगुवाई वाले यूकेएमटीओ ने बताया कि यह घटना ओमान से 15 नॉटिकल मील उत्तर-पूर्व में हुई.

रिपोर्ट में कहा गया है कि आईआरजीसी की एक गन बोट जहाज़ के पास आई, लेकिन कोई रेडियो चेतावनी नहीं दी गई.

इसके बाद गन बोट ने जहाज़ पर गोली चलाई, जिससे जहाज़ के कंट्रोल सेंटर को भारी नुकसान पहुंचा.

ईरानी न्यूज़ एजेंसियों ने कहा कि जहाज़ ने ईरानी सेना की चेतावनी को ‘नज़रअंदाज़’ किया.

दूसरा हमला, यूएई की कंपनी के जहाज़ पर

केलीन डेव्लिन और पॉल ब्राउन

ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद कर दिया है जबकि अमेरिका ने भी नाकाबंदी कर रखी है

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बीबीसी वेरिफ़ाई के मुताबिक, बुधवार सुबह निशाना बनाए गए दूसरा कार्गो जहाज़ पर पनामा का झंडा था. उस जहाज़ का नाम है ‘यूफोरिया’. ये जहाज़ यूएई की एक कंपनी का है.

केप्लर के एआईएस डेटा के अनुसार, यह जहाज़ 22 अप्रैल को 2.10 बीएसटी यानी भारतीय समयानुसार सुबह 6.30 बजे होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरना शुरू हुआ था.

यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर और वैनगॉर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, जहाज़ पर 7.38 बीएसटी यानी भारतीय समयानुसार दोपहर क़रीब 12 बजे ईरान से लगभग आठ नॉटिकल मील पश्चिम में हमला हुआ.

जहाज़ के कप्तान ने इसे रोक दिया. क्रू सुरक्षित बताया गया है और जहाज़ को किसी नुकसान की सूचना नहीं है.

यह बुधवार सुबह खाड़ी में निशाना बनाए गए दूसरे जहाज़ का मामला है.

तीसरे जहाज़ पर पनामा का झंडा

एमएससी फ़्रांसेस्का

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बीबीसी वेरिफ़ाई के अनुसार, बुधवार को एक तीसरे कार्गो जहाज़ पर भी हमला किया गया है. यह जानकारी मैरीटाइम इंटेलिजेंस फर्म वैनगार्ड ने दी है.

इस जहाज़ पर पनामा का झंडा लगा हुआ था. और इसका नाम था – एमएससी फ़्रांसेस्का. इसे ईरान के तट से करीब छह नॉटिकल मील दूर निशाना बनाया गया.

उस समय जहाज़ होर्मुज़ स्ट्रेट से निकलकर ओमान की खाड़ी की ओर जा रहा था.

वेनगॉर्ड के अनुसार, एमएससी फ़्रांसेस्का को आईआरजीसी ने रोका और “एंकर डालने के लिए कहा.”

इससे पहले दो ईरानी जहाज़ों पर अमेरिकी नेवी का कब्ज़ा

पेंटागन की ओर से एक्स पर पोस्ट की गई फ़ुटेज की एक तस्वीर, जिसमें एक अमेरिकी हेलीकॉप्टर को जहाज़ पर उतरते हुए दिखाया गया है

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इस्लामाबाद से दक्षिण एशिया संवाददाता अज़ादेह मोशीरी के अनुसार, ईरानी सूत्रों ने बताया कि उनका प्रतिनिधिमंडल बातचीत की मेज पर आने के लिए तैयार था, लेकिन जैसे ही अमेरिका ने ईरानी झंडे वाले मालवाहक जहाज (टुस्का) पर फ़ायरिंग की, “सब कुछ बदल गया.”

ओमान की खाड़ी में यह हमला उस समय हुआ था जब इस्लामाबाद में शांति वार्ता के दूसरे दौर की उम्मीद की जा रही थी.

व्हाइट हाउस को लगा होगा कि इससे बातचीत की मेज पर ईरानियों पर दबाव बढ़ेगा, लेकिन इसके बजाय कोई भी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद नहीं पहुंचा और ईरान की सेना ने जवाबी कार्रवाई करने की बात कही है.

बुधवार को संघर्ष विराम ख़त्म होने से ठीक पहले मंगलवार को पेंटागन ने एक और जहाज़ को कब्ज़े में लेने का बयान दिया. पेंटागन के अनुसार, अमेरिकी सेना ने इंडो-पैसिफ़िक क्षेत्र में एक प्रतिबंधित टैंकर को कब्ज़े में ले लिया है.

यह क़दम ईरान का समर्थन करने वाले “अवैध नेटवर्क को रोकने” के प्रयासों के तहत उठाया गया.

सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ़ वॉर ने कहा कि टैंकर का नाम एम/टी टिफ़नी है और यह बिना झंडे वाला जहाज़ है.

ईरान ने इसे ‘सशस्त्र लूट’ कहा और इसे संघर्ष विराम का उल्लंघन बताया. माना जा रहा है कि ईरान इस कार्गो शिप को रिहा करने की मांग कर रहा है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS