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₹28 तक बढ़ सकते हैं पेट्रोल और डीजल के दाम, ब्रोकरेज ने बताया-कब तक लगेगा झटका

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Source :- LIVE HINDUSTAN

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने संकेत दिए हैं कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹25–28 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है। बता दें कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई बाधाओं के चलते ऑयल मार्केट में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। यह अनुमान घरेलू ब्रोकरेज फर्म कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने लगाया है। ब्रोकरेज फर्म ने संकेत दिए हैं कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। कोटक ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूत आधार हैं लेकिन इसका समय राजनीतिक बातों पर निर्भर करेगा। बता दें कि वोटिंग का आखिरी चरण 29 अप्रैल को होना है, इसलिए कीमतों में कोई भी बदलाव चुनावों के खत्म होने के बाद ही किया जाएगा। कच्चे तेल की कीमत लगभग $120 प्रति बैरल होने के आधार पर ब्रोकरेज का अनुमान है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें ₹25–28 प्रति लीटर तक बढ़ानी पड़ सकती हैं।

क्यों लगाया जा रहा अनुमान

ब्रोकरेज का ऐसा मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण रिफाइनरों पर दबाव बढ़ रहा है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई बाधाओं के चलते ऑयल मार्केट में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। हालांकि, संघर्ष विराम के दौरान ईरान ने कुछ समय के लिए आवाजाही की अनुमति दी थी। इसके बाद से तनाव फिर बढ़ गया है जिससे कच्चे तेल की फिजिकल आपूर्ति सीमित बनी हुई है। कोटक ने कच्चे तेल के वायदा बाजार (फ्यूचर्स) और फिजिकल मार्केट के बीच बढ़ते अंतर की ओर भी इशारा किया है।

भारत का आयात बिल बढ़ा

ब्रोकरेज के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण भारत का आयात बिल काफी बढ़ गया है। आयात की मात्रा में 13–15% की गिरावट के बावजूद कच्चे तेल के आयात बिल में अनुमानित तौर पर प्रतिदिन 190–210 मिलियन डॉलर की वृद्धि हुई है। हालांकि, अब तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

ब्रोकरेज कोटक के अनुसार इस स्थिति के कारण रिफाइनरों पर बोझ बढ़ गया है, जिसका अनुमानित अतिरिक्त प्रभाव लगभग ₹270 अरब प्रति माह है। हालांकि, सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में ₹10 प्रति लीटर की कटौती की है और निर्यात पर विंडफॉल टैक्स को फिर से लागू किया है। हालांकि, ये उपाय केवल आंशिक राहत ही देते हैं।

मार्च में पेट्रोल-डीजल की खपत

पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़ी आपूर्ति दिक्कतों की वजह से भारत में एलपीजी की खपत में मार्च में 13 प्रतिशत की गिरावट आई है। मार्च में एलपीजी की खपत 23.79 लाख टन रही है, जो पिछले साल की इसी अवधि के आंकड़े 27.29 लाख टन से 12.8 प्रतिशत कम है।

हालांकि, इस दौरान पेट्रोल और डीजल की बिक्री में अच्छी बढ़ोतरी हुई। पेट्रोल की बिक्री 7.6 प्रतिशत बढ़कर 37.8 लाख टन हो गई, जबकि डीजल की खपत 8.1 प्रतिशत बढ़कर 87.27 लाख टन हो गई। पूरे वित्त वर्ष में एटीएफ की बिक्री दो प्रतिशत बढ़कर 91.61 लाख टन हो गई। वहीं पेट्रोल की खपत 6.5 प्रतिशत बढ़कर 4.25 करोड़ टन रही। इस दौरान डीजल की खपत 3.6 प्रतिशत बढ़कर 9.47 करोड़ टन से अधिक रही।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN