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गलती कर दी, पाकिस्तान का मीडिएटर होना ईरानी सांसद को नहीं पसंद; वजह बताई

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Source :- LIVE HINDUSTAN

वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी स्थायी समझौते के लिए ईरान को अपने समृद्ध यूरेनियम भंडार को छोड़ना होगा। यह एक ऐसी मांग है जिसका तेहरान ने बार-बार विरोध करता रहा है।

पाकिस्तान में शांति वार्ता को लेकर ईरान में विरोध के सुर उठ रहे हैं। बुधवार को ईरान के सांसद महमूद नबावियान ने पाकिस्तान वार्ता में परमाणु मुद्दा उठाने को गलती करार दिया है। साथ ही कहा है कि इसके चलते दुश्मन और मुखर हो गया है। खास बात है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ही सीजफायर का विस्तार किया है, जिसकी अवधि अब तक साफ नहीं है।

ईरान इंटरनेशनल के अनुसार, नबावियान ने कहा कि पाकिस्तान में परमाणु मुद्दे पर बातचीत की अनुमति देकर ईरान ने गलती की है। उन्होंने कहा है कि ऐसा करने के कारण ही अमेरिका का आगे मांगें करने का हौसला बढ़ गया है। कहा जा रहा था कि दोनों मुल्कों के बीच होर्मुज के अलावा परमाणु और यूरेनियम बड़ा मुद्दा था, जिसपर सहमति नहीं बन सकी थी।

क्या बोले महमूद नबावियान

संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के सदस्य नबावियन ने कहा, ‘पाकिस्तान की वार्ताओं में, हमने एक रणनीतिक गलती की। हमें परमाणु मुद्दे को बातचीत के लिए नहीं रखना चाहिए था।’ उन्होंने कहा, ‘ऐसा करने से, दुश्मन और भी बेखौफ हो गया है।’

खबरें ये भी हैं कि उन्होंने पाकिस्तान को एक मध्यस्थ के तौर पर चुनने के सरकार के फैसले की आलोचना की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में बात करने से अमेरिका को और ज्यादा छूट हासिल करने का मौका मिल गया है।

अमेरिका की मांग

उन्होंने इस दौरान अमेरिका की तरफ से की गईं मांगों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान का 60 फीसदी एनरिच्ड या शुद्ध की हुई सामग्री हटा दी जाए और इसपर 20 सालों के लिए रोक लगा दी जाए। उन्होंने कहा कि तेहरान ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया है।

वाइट हाउस ने क्या कहा

नाकेबंदी से जुड़े सवालों पर वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि मौजूदा युद्धविराम के लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं है और यह भी बताया कि इसका विस्तार अनिश्चित काल के लिए है। लेविट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी स्थायी समझौते के लिए ईरान को अपने समृद्ध यूरेनियम भंडार को छोड़ना होगा। यह एक ऐसी मांग है जिसका तेहरान ने बार-बार विरोध करता रहा है।

लेविट ने इस बात पर बल दिया कि किसी भी स्थायी समझौते के लिए एक शर्त यह होगी कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम के पूरे भंडार को सौंपने के लिए सहमत हो।

नाकाबंदी पर विवाद

फिलहाल यह युद्धविराम सशर्त बना हुआ है क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि जब तक ईरान एक औपचारिक प्रस्ताव पेश नहीं करता और बातचीत किसी ठोस नतीजे की ओर नहीं बढ़ती, तब तक नाकाबंदी लागू रहेगी। इसके जवाब में, ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने नाकाबंदी को युद्ध कृत्य और युद्धविराम का उल्लंघन बताते हुए चेतावनी दी है कि ईरान इस जबरदस्ती के दबाव के खिलाफ कड़ा जवाब देगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN