Source :- LIVE HINDUSTAN
दूसरे दौरे की बातचीत शुरू करवाने के लिए पाकिस्तान की सभी कोशिशें नाकामयाब हो चुकी है। हालांकि वह अब भी ईरान और अमेरिका को बातचीत की मेज तक लाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहा है। दरअसल पाक इस युद्ध से बर्बाद हो रहा है।
कंगाली में आटा गीला। यह कहावत मानो पाकिस्तान के लिए ही बनी है। कर्ज के बोझ तले दबा पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। अब ईरान युद्ध ने पाकिस्तान को ऐसी चोट दी है, जिससे पार पाने में उसकी हालत पतली होती जा रही है। अब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पूरी दुनिया के सामने अपनी स्थिति कबूल ली है और खुद माना है कि ईरान में छिड़े युद्ध की वजह से देश की अर्थव्यवस्था की लंका लगी हुई है।
दरअसल शहबाज शरीफ ने बुधवार को एक बयान जारी किया है। इस बयान में उन्होंने कहा कि पिछले दो सालों में पाकिस्तान ने जो कुछ भी आर्थिक तरक्की की थी, अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग ने उस पर पानी फेर दिया है। शहबाज शरीफ ने आगे कहा कि देश में तेल का खर्चा भी दोगुने से ज्यादा बढ़ गया है। उन्होंने कहा, ”युद्ध से पहले साप्ताहिक तेल पर पाकिस्तान लगभग 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर खर्च करता था। यह आज बढ़कर 80 करोड़ अमेरिकी डॉलर हो गया है।’’
बातचीत करवाने के लिए बेचैन
शहबाज शरीफ के इस बयान ने पाकिस्तान की पोल भी खोली है कि वह इस युद्ध में मध्यस्थता करने के लिए क्यों बेचैन था। हालांकि उसकी यह कोशिश भी कामयाब नहीं हो पाई और दोनों ही देश दूसरे दौर की बातचीत के लिए नहीं मान रहे। ऐसे में पाकिस्तान की मुसीबत और बढ़ सकती है। शहबाज शरीफ ने कहा है कि पाकिस्तान अब भी तनाव कम कराने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए यह जरूरी है कि सभी योगदान दें। यानी शहबाज शरीफ ने यह भी मान लिया है कि समझौता करवाना पाकिस्तान के अकेले की बस की बात नहीं।
लॉकडाउन जैसे हालात
शहबाज शरीफ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान में तेल की कमी की वजह से हाहाकार मचा हुआ है। बीते दिनों रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई कि पाकिस्तान में अब मुश्किल से सप्ताह भर का तेल ही बचा है। पाकिस्तान के ऊर्जा और वित्त मंत्रालय ने खुद स्वीकार किया है कि देश के पास कच्चे तेल का रिजर्व सिर्फ 5 से 7 दिनों का ही बचा है। यह हालात तब हैं जब तेल की खपत कम करने के लिए पाकिस्तान में पहले से ही कई उपाय लागू किए जा चुके हैं। लोगों को वर्क फ्रॉम होम करने की सलाह दी गई है। वहीं पैसे बचाने के लिए सरकारी अफसरों मंत्रियों के वेतन तक काटे गए हैं।
कर्ज लेकर चुकाना पड़ रहा कर्ज
इधर युद्ध शुरू होने के बाद पाकिस्तान पर एक और पहाड़ तब टूट पड़ा जब यूएई पाकिस्तान से नाराज हो गया। युद्ध में ईरान और अमेरिका के बीच बैलेंस बनाने के चक्कर में पाकिस्तान यह भूल गया कि उसका घर मुस्लिम देशों के कर्ज के सहारे ही चलता है। ऐसे में UAE इस बात से नाराज हो गया कि पाक ने ईरानी हमलों के खिलाफ खुलकर कुछ नहीं कहा। अमीरात इतना भड़क गया कि उसने पाकिस्तान को दी गई आर्थिक मदद को लौटने को कह दिया। अब पाकिस्तान की हालत ऐसी हो गई है कि वह सऊदी जैसे देशों से कर्ज लेकर इस कर्ज को चुकाने को मजबूर है।
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