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22 मिनट पहले
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चीन की अर्थव्यवस्था साल 2026 के शुरुआती तीन महीनों में उम्मीद से ज़्यादा गति से आगे बढ़ी है.
हालांकि, इस दौरान अमेरिका-इसराइल के ईरान से युद्ध की वजह से दुनियाभर के देश प्रभावित हुए हैं.
आधिकारिक डेटा के मुताबिक़, जनवरी से मार्च तक चीन की जीडीपी में पिछले साल की तुलना में 5 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई.
अर्थशास्त्रियों ने ये आंकड़ा क़रीब 4.8 फ़ीसदी रहने का अनुमान लगाया था.
ये पहला मौका है जब चीन ने पिछले महीने अपने एनुअल इकोनॉमिक ग्रोथ टारगेट को घटाकर 4.5 से 5 फ़ीसदी की सीमा में करने के बाद आधिकारिक जीडीपी के आंकड़े जारी किए हैं. यह 1991 के बाद से चीन का सबसे कम ग्रोथ टारगेट है.
मैन्युफ़ैक्चरिंग सेक्टर का बड़ा योगदान
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पिछली तिमाही में चीन की जीडीपी में 4.5 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई थी. लेकिन इस बार मैन्युफ़ैक्चरिंग सेक्टर ने चीन की जीडीपी की ग्रोथ बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई.
हालांकि, इस बीच दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पर प्रॉपर्टी में निवेश में गिरावट का दबाव लगातार बना हुआ है.
ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन के विश्लेषक काइल चेन ने कहा कि कारों और अन्य निर्यात ने जीडीपी के इन आंकड़ों में एक बड़ी भूमिका निभाई है.
चेन ने कहा, “हालांकि, अभी ईरान युद्ध के पूरे प्रभावों का पता लगना बाकी है. अगली तिमाही में जीडीपी के आंकड़ों में इस तनाव की वजह से गिरावट देखने को मिल सकती है.”
चीन के ताज़ा जीडीपी टारगेट और इकोनॉमिक ऑब्जेक्टिव मार्च में घोषित हुए नए फ़ाइव ईयर प्लान के तहत बताए गए हैं.
अर्थव्यवस्था को नया रूप देने की कोशिश
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चीन ने इनोवेशन, हाई-टेक इंडस्ट्री और घरेलू ख़र्च को बढ़ावा देने के प्रयासों में भारी निवेश करने का भी वादा किया.
सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी देश की अर्थव्यवस्था को नया रूप देने की कोशिश कर रही है. ये कम खपत, घटती आबादी और लंबे समय से चले आ रहे प्रॉपर्टी संकट सहित कई समस्याओं से जूझ रही है.
चीन को ईरान युद्ध की वजह से ऊर्जा संकट का भी सामना करना पड़ रहा है. इसके अलावा वैश्विक व्यापार से जुड़े तनाव और ट्रंप की टैरिफ़ नीतियां भी इस संकट की वजह हैं.
चीन को इस समय अपने ज़्यादातर सामानों पर 10 फ़ीसदी अमेरिकी टैरिफ़ का सामना करना पड़ रहा है.
हालांकि, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने मंगलवार को कहा कि जुलाई की शुरुआत तक इन शुल्कों को उन स्तरों पर वापस लाया जा सकता है, जो सुप्रीम कोर्ट के कई आयात करों को रद्द किए जाने से पहले लागू थे.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मई में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से चीन में मुलाक़ात करने की उम्मीद है.
मंगलवार को चीन ने मार्च महीने के एक्सपोर्ट के आंकड़े जारी किए. इनसे पता चला कि ग्रोथ में तेज़ी से गिरावट आई है. इसकी वजह यह है कि संघर्ष के कारण महंगाई बढ़ गई और लोगों का ख़र्च कम हो गया.
मार्च में चीन का आयात भी बढ़ा
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जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ़ कस्टम्स के मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक़, पिछले महीने चीन के एक्सपोर्ट की ग्रोथ तेज़ी से घटकर 2.5 फ़ीसदी रह गई, जबकि पिछले साल इसी समय यह ज़्यादा थी.
यह पिछले छह महीनों में एक्सपोर्ट की ग्रोथ का सबसे निचला स्तर है. इससे पहले जनवरी और फ़रवरी के कुल एक्सपोर्ट में पिछले साल के मुक़ाबले 20 फ़ीसदी से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई थी.
इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफ़ैक्चर्ड से जुड़े सामानों की ज़बरदस्त मांग के कारण यह आंकड़ा बढ़ा था.
चीन हर साल के पहले दो महीनों के व्यापार डेटा को एक साथ जोड़ता है, ताकि लूनर न्यू ईयर की छुट्टियों के दौरान होने वाले उतार-चढ़ाव का हिसाब रखा जा सके. ये छुट्टियां हर साल अलग-अलग तारीख़ों पर होती हैं.
कस्टम डेटा के अनुसार, मार्च में चीन का आयात भी लगभग 28 फीसदी बढ़ा.
इसके चलते चीन का मासिक ट्रेड सरप्लस (यानी उसका निर्यात उसके आयात से कितना ज़्यादा है) 50 अरब डॉलर से थोड़ा ज़्यादा रहा. लेकिन बीते एक साल में ये सबसे कम मासिक ट्रेड सरप्लस का आंकड़ा है.
ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी में इकोनॉमिक्स के लेक्चरर यिक्सियाओ जो के मुताबिक़, इंपोर्ट की कीमत में बढ़ोतरी की वजह ईरान युद्ध के चलते दुनिया भर में लागत में हुई वृद्धि हो सकती है.
ईरान युद्ध का चीनी निर्यात पर क्या असर पड़ सकता है?
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ईरान की उन जहाज़ों के ख़िलाफ़ धमकियों के कारण, जो शिपिंग के लिए अहम होर्मुज़ स्ट्रेट का इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं, कच्चे तेल की कीमत बढ़ गई है. साथ ही इससे बनने वाले सामान, जैसे प्लास्टिक की क़ीमतें भी बढ़ गई हैं.
जापान और दक्षिण कोरिया जैसी दूसरी बड़ी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले, चीन खाड़ी देशों से मिलने वाले तेल पर कम निर्भर है. जापान और दक्षिण कोरिया पर इस संकट का गहरा असर पड़ा है.
लेकिन चीन में पेट्रोल महंगा होता जा रहा है. जेट फ्यूल की कीमतें बढ़ने के कारण कुछ चीनी एयरलाइंस ने अपनी उड़ानें कम कर दी हैं.
वो कहते हैं कि अगर इस संघर्ष के कारण बढ़ी हुई कीमतों की वजह से दुनिया भर के उपभोक्ता खर्च करने में कम दिलचस्पी दिखाते हैं, तो इस युद्ध का असर चीन के एक्सपोर्ट पर पड़ सकता है.
उन्होंने कहा, “एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी आखिरकार आपके व्यापारिक साझेदारों की अर्थव्यवस्थाओं पर निर्भर करती है. इस बढ़ोतरी को लगातार बहुत ऊंची दर पर बनाए रखना मुश्किल होता है.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
SOURCE : BBC NEWS



