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DA बढ़ने के बाद भी केंद्रीय कर्मचारी कन्फ्यूज, 8वें वेतन आयोग के दौर में यह डर

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Source :- LIVE HINDUSTAN

आठवें वेतन आयोग के दौर में पहली बार है जब सरकार ने महंगाई भत्ते पर फैसला लिया है। अब आठवें वेतन आयोग के दौर में 2 पर्सेंट के डीए बढ़ोतरी से केंद्रीय कर्मचारियों के मन में तरह-तरह के सवाल चल रहे हैं।

8th Pay Commission latest: बीते सप्ताह सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ता यानी डीए का ऐलान कर दिया और इसमें 2 पर्सेंट की बढ़ोतरी हो गई। अब केंद्रीय कर्मचारियों का डीए बढ़कर 60 पर्सेंट हो गया है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई जब आठवें वेतन आयोग का गठन हो चुका है। आठवें वेतन आयोग के दौर में पहली बार है जब सरकार ने महंगाई भत्ते पर फैसला लिया है। दरअसल, 31 दिसंबर 2025 को सातवें वेतन आयोग का कार्यकाल खत्म हो गया था। ऐसे में अब आठवें वेतन आयोग के दौर में 2 पर्सेंट के डीए बढ़ोतरी से केंद्रीय कर्मचारियों के मन में तरह-तरह के सवाल चल रहे हैं।

क्या हैं सवाल?

केंद्रीय कर्मचारियों के मन में यह सवाल है कि क्या आठवें वेतन आयोग के लागू होने पर भी डीए बढ़ोतरी की रफ्तार ऐसी ही रहेगी। हालांकि, ऐसा कुछ नहीं होने वाला है। दरअसल, आठवां वेतन आयोग नए सिरे से केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी से लेकर महंगाई भत्ते यानी डीए तक पर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेग। यह जरूर है कि केंद्रीय कर्मचारियों के अलग-अलग संगठन भत्ते पर अपनी मांग वेतन आयोग को सौंप रहे हैं।

इसी कड़ी में राष्ट्रीय परिषद संयुक्त परामर्श तंत्र (NC-JCM) के कर्मचारी पक्ष ने भत्तों में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव रखा है । इसमें महंगाई भत्ते (DA) को 25% पर बेसिक सैलरी के साथ मिलाना शामिल है। सबसे खास प्रस्तावों में से एक यह है कि जब डीए और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत यानी डीआर 25% से ज्यादा हो जाए तो उसे बेसिक सैलरी और पेंशन के साथ मिला दिया जाए। एक प्रस्ताव यह भी है कि कीमतों की गणना बाजार दरों के आधार पर की जानी चाहिए न कि सरकारी दरों के आधार पर, जिनमें 25% तक का अंतर होता है। NC-JCM के कर्मचारी पक्ष के मुताबिक हमने प्रस्ताव दिया है कि 8वां वेतन आयोग यह सिफारिश करे कि यदि DA/DR, 25% से ज्यादा हो जाता है, तो उसे मूल वेतन और मूल पेंशन के साथ मिला दिया जाए।

यह इसलिए अहम है क्योंकि महंगाई की भरपाई के लिए DA में अभी साल में दो बार संशोधन किया जाता है। इसे बेसिक सैलरी के साथ मिला देने से सैलरी और पेंशन का आधार स्थायी रूप से बढ़ सकता है। इसका असर HRA, ग्रेच्युटी और रिटायरमेंट बेनिफिट जैसे अन्य घटकों पर भी पड़ सकता है।

पिछले साल हुआ था गठन

बता दें कि सरकार ने पिछले साल आठवें वेतन आयोग का गठन किया था। पिछले साल नवंबर महीने में टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) जारी किए थे, जिससे सैलरी स्ट्रक्चर की समीक्षा, भत्तों में संशोधन और पेंशन से जुड़े बदलावों का रास्ता साफ हो गया था। वेतन आयोग 18 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा। यह सिफारिशें सरकार अक्षरक्ष: लागू करने के लिए बाध्य नहीं हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN