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बिहार विधान परिषद चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश का नामांकन क्यों नहीं हुआ?

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बिहार विधान परिषद की आगामी 10 सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के नेता उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र और बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया है, जिससे उनके मंत्री पद पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

**नामांकन की प्रक्रिया और एनडीए के उम्मीदवार**

बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 8 जून 2026 थी। इस चुनाव में 9 सीटों पर सामान्य चुनाव और 1 सीट पर उपचुनाव हो रहा है। एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) ने अपने 9 उम्मीदवारों के नाम पहले ही घोषित कर दिए थे, जबकि विपक्षी महागठबंधन, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (RJD) शामिल है, ने रविवार की देर रात तक अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा नहीं की थी।

**दीपक प्रकाश का नामांकन न करना**

नामांकन की अंतिम तिथि तक दीपक प्रकाश ने अपना नामांकन पत्र नहीं दाखिल किया। इससे यह स्पष्ट हो गया कि उनका नामांकन नहीं हो रहा है, जिससे उनके मंत्री पद पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

**मंत्री पद पर संकट**

बिना विधान परिषद सदस्य बने मंत्री पद पर बने रहना संवैधानिक रूप से संभव नहीं है। यदि दीपक प्रकाश विधान परिषद के सदस्य नहीं बनते हैं, तो उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है। इससे उनके राजनीतिक भविष्य पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।

**उपेंद्र कुशवाहा की प्रतिक्रिया**

उपेंद्र कुशवाहा ने इशारे में कहा था कि उन्हें अब भी उम्मीद है कि RLM को विधान परिषद की एक सीट मिलेगी। हालांकि, नामांकन की अंतिम तिथि तक दीपक प्रकाश का नामांकन न करना इस उम्मीद को कमजोर करता है।

**निष्कर्ष**

बिहार विधान परिषद चुनाव में दीपक प्रकाश का नामांकन न करना उनके मंत्री पद के लिए खतरे की घंटी है। अब देखना यह होगा कि उपेंद्र कुशवाहा और उनकी पार्टी इस स्थिति से कैसे निपटते हैं और दीपक प्रकाश के राजनीतिक भविष्य का क्या होता है।