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फिर बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल और LPG के दाम? मुश्किल में कटेंगे आने वाले दिन? सरकार ने दिया बड़ा संकेत

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Strait of Hormuz Crisis; पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर संकट ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। तेल कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है। अगर वैश्विक हालात बिगड़े तो पेट्रोल-डीजल, LPG और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। 

Strait of Hormuz Crisis; पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर मंडरा रहे संकट ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। दुनिया के सबसे अहम तेल सप्लाई रूट माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट में अगर लंबे समय तक रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ तेल संकट नहीं होगा, बल्कि इससे महंगाई, ट्रांसपोर्ट खर्च और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी बड़ा असर देखने को मिल सकता है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। खासकर कच्चा तेल, एलपीजी और एलएनजी के लिए देश काफी हद तक पश्चिम एशिया पर निर्भर है। ऐसे में अगर होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई प्रभावित होती है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हाल के महीनों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और इसका दबाव भारतीय तेल कंपनियों पर भी दिख रहा है।

सरकारी तेल कंपनियां फिलहाल अंतरराष्ट्रीय कीमतों के मुकाबले कम रेट पर पेट्रोल और डीजल बेच रही हैं। इसी वजह से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी कंपनियों को हर दिन हजारों करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है, क्योंकि वे बढ़ी हुई लागत के बावजूद पुराने रेट पर ईंधन बेच रही हैं।

हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि देश में फिलहाल तेल और गैस की सप्लाई को लेकर कोई तत्काल संकट नहीं है। भारत ने पिछले कुछ महीनों में वैकल्पिक स्रोतों से तेल खरीद बढ़ाई है और रणनीतिक भंडार को मजबूत करने पर भी जोर दिया है। सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने और सप्लाई चैन को स्थिर रखने के लिए कई कदम उठाए हैं, ताकि आम लोगों पर अचानक बड़ा असर न पड़े।

लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहा और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर रहीं, तो भारत में ईंधन की कीमतें बढ़ाना लगभग तय हो सकता है। इसका असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ट्रांसपोर्ट महंगा होने से सब्जियां, दूध, गैस सिलेंडर और रोजमर्रा के सामान भी महंगे हो सकते हैं।

लगातार बढ़ रहा कंपनियों का घाटा

इस बीच सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती आम जनता को राहत देने और तेल कंपनियों के नुकसान के बीच संतुलन बनाने की है। अगर कंपनियों का घाटा लगातार बढ़ता रहा, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने पर फैसला लिया जा सकता है। फिलहाल, देश में सप्लाई सामान्य बताई जा रही है, लेकिन वैश्विक हालात तेजी से बदल रहे हैं और आने वाले हफ्तों में ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN