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प्रियंका बोलीं, ‘चाणक्य होते तो आपको देखकर चौंक जाते’, पीएम ने कहा, ‘नहीं होगा अन्याय’: परिसीमन बिल को लेकर संसद में तीखी बहस

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Source :- BBC INDIA

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने डीलिमिटेशन (परिसीमन) को लेकर सरकार पर निशाना साधा

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गुरुवार को शुरू हुए संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र में मोदी सरकार ने डीलिमिटेशन (परिसीमन) बिल पेश कर दिया. 2023 में पारित महिला आरक्षण क़ानून को परिसीमन से जोड़कर आमल में लाने का प्रस्ताव है.

इसके साथ ही संसद और संसद के बाहर पक्ष-विपक्ष में बयानबाज़ी शुरू हो गई है. कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने इसे ‘अगले चुनाव के लिए बीजेपी की रणनीति’ कहा वहीं शशि थरूर ने ‘डीलिमिटेशन की डीमोनेटाइज़ेशन’ से तुलना की.

दक्षिण भारत में डीलिमिटेशन का विरोध हो रहा है. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और उनकी पार्टी डीएमके ने काले झंडे दिखाकर डीलिमिटेशन बिल का विरोध जताया. बीआरएस ने भी केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ संघर्ष करने का एलान कर दिया है.

विपक्षी पार्टियों का कहना है कि सरकार की मंशा महिला आरक्षण लागू करने की है ही नहीं. विपक्ष के मुताबिक़ वो महिला आरक्षण का तो ज़रूर समर्थन करेंगे लेकिन सरकार डीलिमिटेशन को इससे जोड़कर मामले को उलझा रही है.

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बता दें कि प्रस्तावित बिल में लोकसभा में सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव है.

साथ ही लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का भी प्रस्ताव है.

हालांकि महिला आरक्षण का ये प्रस्ताव 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर आधारित है, जिसमें महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया था, लेकिन इसके लागू होने को भविष्य में होने वाली जनगणना और डीलिमिटेशन (परिसीमन प्रक्रिया) से जोड़ा गया था.

सरकार की क्या है दलील

बिल पर बहस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधा

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“पहले जो परिसीमन हुआ है और जो अनुपात पहले से चला आ रहा है, उसमें कोई बदलाव नहीं होगा. उसी के अनुसार परिसीमन होगा.”

उन्होंने कहा, “अगर गारंटी चाहिए, तो मैं गारंटी भी देता हूं.”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण बिल के पक्ष में बोलते हुए कहा, “जो आज इस बिल का विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी.”

उन्होंने कहा, “अब देश की बहनों पर भरोसा करें, 33 फ़ीसदी महिलाओं को यहां आने दें और उन्हें निर्णय करने दें.”

उन्होंने कहा कि देश की 50 फ़ीसदी आबादी को नीति-निर्माण में शामिल होना चाहिए.

“मुझे सबको साथ लेकर चलना है और मुझे संविधान ने यही सिखाया है.”

प्रधानमंत्री ने कहा, “हम भ्रम में न रहें कि हम कुछ नारी शक्ति को दे रहे हैं, ये उनका हक़ है. हमने इसे कई दशकों से रोका हुआ है, आज उसका प्रायश्चित कर हमें उस पाप से मुक्ति पाने का अवसर है.”

इससे पहले केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में डीलिमिटेशन बिल पर बहस के दौरान कहा कि इस प्रक्रिया के बाद हर राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या 50 प्रतिशत बढ़ जाएगी.

उन्होंने कहा, “272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी.”

जेडीयू सांसद राजीव रंजन सिंह ने कहा, “नारी शक्ति वंदन विधेयक सबकी सहमति से पास हुआ था और प्रधानमंत्री चाहते हैं कि 2029 के चुनाव में उसे लागू किया जाए. यह महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बहुत बड़ा कदम है. ये मील का पत्थर साबित होगा. देश की 50 फ़ीसदी आबादी महिलाओं की है और अगर प्रधानमंत्री उनको न्याय देने का प्रयास कर रहे हैं तो उसका विरोध नहीं होना चाहिए, समर्थन करना चाहिए.”

गृह मंत्री अमित शाह पर प्रियंका गांधी का तंज़

प्रियंका गांधी

विपक्ष ने महिला आरक्षण का समर्थन किया लेकिन उसे डीलिमिटेशन से जोड़ने का विरोध किया.

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इस बिल पर चर्चा के दौरान कहा, “जब 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने यह अधिनियम सबकी सहमति से पारित किया था तब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपनी विचारधारा के अनुकूल इसका पूरा समर्थन किया था. आज भी इसमें कोई शक नहीं होना चाहिए कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस महिला आरक्षण के पक्ष में डटकर खड़ी है और खड़ी रहेगी.”

उन्होंने आगे कहा, “ऊपर ऊपर से इसमें (बिल में) कोई आपत्तिजनक बात नहीं लगती. मगर इसे गहराई से समझा जाए तो इसका असली मकसद उभरता है, वह राजनीति की बू, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री महोदय ने किया, वह राजनीति की बू इसमें पूरी तरह से घुली हुई है.”

“दरअसल इसी सरकार ने महिला आरक्षण का जो विधेयक सर्वसम्मति से 2023 में पारित कराया था उसमें दो चीजें थी जो इस विधेयक में नहीं हैं. उसमें लिखा था कि इसे लागू करने से पहले नई जनगणना और परिसीमन कराया जाएगा. अब अचानक क्या हो गया? मन बदल गया? वही सरकार पुराने आंकड़ों के आधार पर क्यों आगे बढ़ना चाह रही है? और इतनी जल्दबाजी क्यों?”

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SOURCE : BBC NEWS