Source :- LIVE HINDUSTAN
अमेरिका के पास होर्मुज खुलवाने के लिए नाकेबंदी के अलावा तीन और रास्ते थे। वह शांतिपूर्ण ढंग से बातचीत के जरिए समझौता कर सकता था या फिर और ज्यादा आक्रामक होकर ईरान को घुटनों पर ला सकता था। फिर यही रास्ता क्यों चुना गया?
अमेरिका की नाकेबंदी वाली जिद के बाद ईरान ने एक बार फिर होर्मुज को बंद करने का फैसला किया है। इससे पहले ईरान ने ही कहा था कि वह होर्मुज को खोलने जा रहा है। ईरान के ऐलान के बाद ही ट्रंप ने कह दिया कि नाकेबंदी में कोई ढील नहीं दी जाएगी। ईरान ने पहले ही कहा था कि अगर अमेरिका नाकेबंदी जारी रखेगा तो दोबारा होर्मुज को बंद करने से परहेज नहीं किया जाएगा।
जानकारों का कहना है कि अमेरिका के पास होर्मुज को खुलवाने के तीन रास्ते थे। हालांकि अमेरिका ने नाकाबंदी ही चुना। अमेरिका नहीं चाहता कि दुनिया के सामने संदेश जाए कि अमेरिका को झुकना पड़ा है। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका ईरान का युद्ध शुरू करके बुरी तरह फंस चुका है। उसको अपनी साख की भी चिंता है। ऐसे में वह टकराव के ही विकल्प को चुन रहा है।
अमेरिका के पास क्या थे तीन रास्ते
अमेरिका के पास होर्मुज खुलाने के तीन रास्ते थे। पहला रास्ता तो था कि बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण ढंग से समझौता करके विकल्प निकाला जाए। दूसरा था युद्ध से पहले वाली स्थिति को बहाल किया जाए। यानी अमेरिका भी अपनी आक्रामकता को खत्म करे और जैसी स्थिति बनी हुई थी, वैसी ही रहे। तीसरा विकल्प था कि अमेरिका आक्रामक होकर ईरान के ऑइल इन्फ्रास्ट्रक्चर को धराशायी कर दे और खर्ग द्वीप पर कब्जा कर ले। इससे होर्मुज तो खुलवाया जा सकता था, लेकिन शांति की संभावनाएं लगभग खत्म हो जातीं।
डोनाल्ड ट्रंप ने इन तीनों रास्तों से परहेज किया और नाकेबंदी का रास्ता चुना। इस युद्ध में अमेरिका को अंदाजा नहीं था कि वह इतना अकेला पड़ेगा। बार-बार अपील के बाद भी नेटो सहयोगी साथ नहीं आए। एशिया में भी उसे कोई बड़ा समर्थन नहीं मिला। अमेरिका का विचार है कि अगर होर्मुज और ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी जाती है तो उसकी कमर टूटने लगेगी और वह अमेरिका की शर्तों पर होर्मुज खोलने को राजी हो जाएगा।
अमेरिका और अन्य देशों का भी नुकसान
होर्मुज बंद रहने और अमेरिका की नाकेबंदी से केवल ईरान का ही नुकसान नहीं हो रहा है बल्कि अन्य देश भी पिस रहे हैं। होर्मुज बंद होने से कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा हो रहा है। वहीं खाड़ी देशों की सप्लाई चेन भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। वहीं अमेरिका को लगता है कि जब सभी खाड़ी देशों को नुकसान होगा तो वे होर्मुज खुलवाने के लिए अमेरिका के साथ आ जाएंगे। हालांकि अब तक तो ऐसा होता नजर नहीं आया है।
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