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होर्मुज के रास्ते तेल और एलएनजी की सप्लाई ठप, चीन से पाकिस्तान तक सब मुश्किल में

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मध्य पूर्व में दो महीने से जारी संघर्ष ने एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की कमर तोड़ दी है। होर्मुज स्ट्रेट से तेल और एलएनजी की सप्लाई ठप होने से चीन से लेकर पाकिस्तान तक सब मुश्किल में हैं। ताइवान की सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन से लेकर भारत-थाईलैंड के चावल उत्पादन तक पर खतरा मंडरा रहा है।

मध्य पूर्व में जारी युद्ध ने एशियाई देशों के सामने गंभीर ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है। दुनिया के सबसे अहम ऑयल रूट होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग लगभग बंद हो चुकी है। इससे ताइवान की सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन से लेकर भारत-थाईलैंड के चावल उत्पादन तक पर खतरा मंडरा रहा है।

पाकिस्तान: ब्लैकआउट और मंदी के कगार पर

पाकिस्तान में ग्रामीण इलाकों में 14 घंटे तक लोडशेडिंग हो रही है। सरकार ने हफ्ते में चार दिन काम करने, सरकारी वाहनों के ईंधन कोटे में 50% कटौती और यहां तक कि क्रिकेट प्रशंसकों को घर से मैच देखने का आदेश दिया है। लगभग सारी एलएनजी कतर से आती थी, जो मार्च से बंद है, अब पाकिस्तान महंगे स्पॉट मार्केट से गैस खरीदने को मजबूर है।

एशियाई सरकारों के रणनीतिक कदम

सब्सिडी और नियंत्रण: कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकारों ने रिकॉर्ड सब्सिडी दी है, ईंधन उपयोग पर रोक लगाई है और सरकारी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम का आदेश दिया है।

रूस और वेनेजुएला से समझौते: कई देश रूस, वेनेजुएला और ओमान से अतिरिक्त सप्लाई सुरक्षित करने में जुटे हैं। अमेरिकी छूट का फायदा उठाकर भारत ने रूस से लाखों बैरल खरीदे, वहीं चीन ने ईरान से तेल आयात जारी रखा है।

चीन: विविधता का बड़ा खिलाड़ी

दुनिया के सबसे बड़े क्रूड आयातक चीन ने वर्षों पहले ही ईंधन स्रोतों में विविधता ला दी थी। ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस के अनुसार उसके पास 1.4 अरब बैरल का रणनीतिक भंडार है। चीन कोयला-से-गैस प्रोजेक्ट पुनर्जीवित कर रहा है और पड़ोसी देशों (वियतनाम, फिलीपींस) को डीजल निर्यात भी कर रहा है।

भारत: वैकल्पिक स्रोतों की तलाश

दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक भारत ने वेनेजुएला से मई-जून में 1.6 करोड़ बैरल क्रूड लेने का करार किया। डीजल और जेट ईंधन पर निर्यात शुल्क बढ़ाया गया। हालांकि, कुछ इलाकों में डीजल राशनिंग की खबरें चिंता बढ़ा रही हैं।

जापान: परमाणु और कोयले का सहारा

जापान की 90% से अधिक तेल जरूरतें मध्य पूर्व पर निर्भर हैं। उसने गैसोलीन सब्सिडी बढ़ाई, रणनीतिक भंडार खोला और कम दक्षता वाले कोयला संयंत्रों को एक साल के लिए नीलामी में शामिल होने की अनुमति दी। टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर का परमाणु संयंत्र दोबारा चालू किया गया। इससे होर्मुज से आने वाली 40% एलएनजी की कमी पूरी होने का अनुमान है।

सिंगापुर और मलेशिया: छोटे देश, बड़े संकट

सिंगापुर 60% जीवाश्म ईंधन समुद्री रास्ते से लाता है। उसने लैटिन अमेरिका और अफ्रीका से गैस मंगवाई, 1 अरब डॉलर का राहत पैकेज दिया और सरकारी इमारतों में एसी 25°C से नीचे न जाने का आदेश दिया।

मलेशिया दुनिया के सबसे सस्ते पेट्रोल (1.99 रिंगित/लीटर) के बावजूद हर महीने 1.8 अरब डॉलर की सब्सिडी वहन कर रहा है। अब सिर्फ 200 लीटर प्रति नागरिक मासिक कोटा तय किया गया है और तस्करी रोकने के लिए 100+ पेट्रोल पंपों पर पुलिस तैनात की गई है।

कितना गहरा जाएगा संकट?

रोलैंड राजा (लोवी इंस्टीट्यूट, ऑस्ट्रेलिया) कहते हैं , “बार-बार का झटका वित्तीय गुंजाइश खत्म कर देता है। कोविड और टैरिफ का उदाहरण हमारे सामने है।” एलिसिया गार्सिया-हेरेरो (नैटिक्सिस) का आकलन, “सबसे बुरी स्थिति में ब्लैकआउट, खाद्य और उर्वरक की कीमतों में उछाल, फैक्ट्रियों की स्पीड धीमी होगी। अगर हॉर्मुज खुलता भी है, तो रिफाइनरियों को ठीक होने में हफ्तों लगेंगे।”

क्या है आगे का रास्ता?

एशियाई देशों के पास तीन ही विकल्प हैं

1. रणनीतिक भंडार: चीन, जापान, भारत के पास अभी कुछ महीनों का बफर है।

2. वैकल्पिक स्रोत: रूस, वेनेजुएला, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका से सप्लाई बढ़ानी होगी।

3. घरेलू उत्पादन और परमाणु ऊर्जा: जापान और भारत इस ओर बढ़ रहे हैं।

लेकिन सबसे बड़ी चुनौती वक्त की है। अगर यह संकट तीन महीने और रहा, तो एशिया की सप्लाई श्रृंखला चरमरा सकती है और खाद्य मुद्रास्फीति अनियंत्रित हो सकती है।

इनपुट: ब्लूमबर्ग

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