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सिर्फ स्कूल भेजना काफी नहीं.. पैरेंट्स रखें इन 9 बातों का ध्यान, पढ़ने में टॉप रहेगा बच्चा!

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Parenting Tips: स्कूल भेजने के साथ पेरेंट्स को घर में भी बच्चे पर खास ध्यान देने की जरूरत होती है, तभी आगे जा कर बच्चा पढ़ा-लिखा, सफल इंसान बनने के साथ अनुशासित और आत्मविश्वासी बनता है। आइए ऐसी ही कुछ जरूरी बातों के बारे में जानते हैं।

बच्चों की अच्छी पढ़ाई सिर्फ स्कूल जाने से पूरी नहीं होती। स्कूल उन्हें किताबों का ज्ञान देता है, लेकिन सही आदतें, अनुशासन और सीखने का तरीका घर से ही मिलता है। कई माता-पिता सोचते हैं कि बच्चे को अच्छे स्कूल में भेज देना ही काफी है, जबकि ये आधा सच है। दरअसल स्कूल भेजने के साथ पेरेंट्स को घर में भी बच्चे पर खास ध्यान देने की जरूरत होती है, तभी आगे जा कर बच्चा पढ़ा-लिखा, सफल इंसान बनने के साथ अनुशासित और आत्मविश्वासी बनता है। बच्चे की सफलता सिर्फ नंबरों से नहीं, बल्कि उसकी समझ, सोच और संस्कारों से तय होती है। इसलिए माता-पिता को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रोज रखना चाहिए।

रोजाना पढ़ाई पर नजर रखें

बच्चा स्कूल जा रहा है, इसका मतलब यह नहीं कि वह रोज सही तरीके से पढ़ भी रहा है। आपको उसकी पढ़ाई पर नजर रखनी चाहिए। रोज यह देखें कि उसने क्या पढ़ा, कौन सा विषय समझा और किस चीज में उसे दिक्कत आ रही है। इससे बच्चा भी जिम्मेदार बनता है और आपको भी उसकी जरूरत समझ आती है।

होमवर्क समय पर पूरा करवाएं

होमवर्क बच्चों की पढ़ाई का जरूरी हिस्सा होता है। यह सिर्फ स्कूल का काम नहीं, बल्कि सीखी हुई चीजों को दोहराने का तरीका है। ध्यान रखें कि बच्चा होमवर्क समय पर और सही तरीके से पूरा करे। उसे जल्दबाजी में काम खत्म करने की आदत न डालें। अगर जरूरत हो तो थोड़ी मदद करें, लेकिन होमवर्क उसे खुद ही करने दें।

घर में पढ़ाई का सही माहौल बनाएं

घर का माहौल बच्चे की पढ़ाई पर सीधा असर डालता है। कोशिश करें कि पढ़ाई के समय घर में शांति रहे। बच्चे के लिए एक तय जगह रखें जहां वह आराम से बैठकर पढ़ सके। इससे उसकी एकाग्रता बढ़ती है।

रोज स्कूल की बातें सुनें

बच्चे से रोज पूछें कि उसका दिन कैसा रहा। स्कूल में क्या पढ़ाया गया, किससे दोस्ती हुई, कोई परेशानी तो नहीं हुई। जब आप उसकी बातें ध्यान से सुनते हैं, तो बच्चा खुलकर बात करना सीखता है। इससे आप उसके मन की स्थिति भी समझ पाते हैं और जरूरत पड़ने पर समय रहते मदद कर सकते हैं।

सिर्फ नंबर नहीं, समझ पर जोर दें

बहुत से पेरेंट्स बच्चों से सिर्फ अच्छे नंबरों की उम्मीद रखते हैं। यह सोच सही नहीं है। बच्चे को रटने के बजाय विषय समझने के लिए मोटिवेट करें। जब बच्चा चीजों को समझकर पढ़ता है, तो वह लंबे समय तक याद रखता है और आगे की पढ़ाई में भी अच्छा करता है।

शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार देना जरूरी

अच्छी पढ़ाई के साथ अच्छा व्यवहार भी जरूरी है। बच्चे को सच बोलना, बड़ों का सम्मान करना, समय की कीमत करना और अनुशासन में रहना सिखाएं। ये बातें किताबों से नहीं, घर के माहौल से सीखने को मिलती हैं। इसलिए ये पेरेंट्स की ही जिम्मेदारी है कि बच्चे को ये बाते समझाएं।

डांटने के बजाय प्यार से समझाएं

हर बच्चा गलती करता है। छोटी-छोटी बात पर डांटना या डराना सही तरीका नहीं है। अगर बच्चा गलती करे तो उसे प्यार से समझाएं। प्यार से समझाने पर बच्चा बात जल्दी मानता है और आपसे दूरी भी नहीं बनाता। डर के माहौल में बच्चा खुलकर सीख नहीं पाता।

मोबाइल और टीवी का समय तय करें

आज के समय में मोबाइल और टीवी बच्चों का ध्यान जल्दी भटका देते हैं। इसलिए इनके इस्तेमाल का समय तय करें। पढ़ाई के समय स्क्रीन से दूरी रखें। खाली समय में भी सीमित समय दें, ताकि बच्चा खेल, पढ़ाई और परिवार के साथ समय बिताना सीख सके।

टीचर्स के साथ कॉन्टैक्ट बना के रखें

बच्चे की पढ़ाई और व्यवहार को समझने के लिए टीचर्स से जुड़े रहना जरूरी है। समय-समय पर स्कूल जा कर या बात करके बच्चे की प्रोग्रेस जानें। टीचर आपको बता सकते हैं कि बच्चा किस विषय में अच्छा है और कहां सुधार की जरूरत है। इससे घर और स्कूल मिलकर बच्चे को बेहतर दिशा दे सकते हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN