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मोहम्मद रफी का वो गाना जिसे गाते हुए गले से निकल गया था खून, गाने को सुन नहीं रुकते थे लोगों के आंसू

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Source :- LIVE HINDUSTAN

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आज हम आपको मोहम्मद रफी से जुड़ा एक ऐसा किस्सा बताने वाले हैं जिसको सुनकर आप भी हैरान हो जाएंगे। मोहम्मद अपने गानों में इतनी ताकत लगा देते थे कि एक बार कुछ ऐसा हुआ जिसकी उम्मीद किसी से नहीं की थी।

मोहम्मद रफी ने अपने करियर में कई हिट गाने गाए हैं। उनकी आवाज के तो आज भी लोग दीवाने हैं। लिखे जो खत तुम्हें, गुलाबी आंखें, ओ मेरी महबूबा, ये रेशमी जुल्फें, खोया-खोया चांद गाने तो आज की जेन जी जनरेशन भी सुनते हैं। आज भी मोहम्मद रफी की आवाज सबके दिलों पर राज कर रही है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक गाने को गाते हुए मोहम्मद रफी ने इतनी मेहनत की या उस गाने के लिए अपनी आवाज पर इतना जोर डाला कि उनके गले से खून आने लग गया था। इतना ही नहीं लोगों को लगने लगा था कि वह शायद अब कभी गाना ही नहीं गा पाएंगे।

क्यों निकल गया था गले से खून

दरअसल, 1952 में आई फिल्म बैजू बावरा में मोहम्मद रफी ने ओ दुनिया के रखवाले गाना गाया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हाने के लिए मोहम्मद ने लगातार 15 दिन तक रियाज किया और फिर स्टूडियो पर फाइनल रिकॉर्डिंग की। पूरा गाना रिकॉर्ड हुआ सबने तालियां बजाई, लेकिन सिंगर के गले से खून आने लगा। सभी को लगा था कि मोहम्मद रफी अब कभी नहीं गा पाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

वापसी के बाद भी गाए कई हिट गानें

मोहम्मद ने फिर वापसी की और फिर एक के बाद एक हिट गाने गाए। वैसे रफी साहब ने बैजू बावरा के लिए 5 गाने गाए थे जिसमें से 2 उन्होंने लता मंगेशकर के साथ गाए थे। उन्होंने मन तरपट हरी दर्शन को आज, ओ दुनिया के रखवाले, गांगी की मौत तो उन दिनों ब्लॉकबस्टर था।

रफी साहब का पहला गाना

मोहम्मद रफी ने अपनी लाइफ का पहला गाना 1944 में सोनिये नी हीरिये गाया था जीनत बेगम के साथ पंजाबी फिल्म गुल बलोच के लिए। उस गाने को श्याम सुंदर ने कंपोज किया था। वहीं उनका पहला हिंदी गाना अजि दिल हो काबू में था फिल्म पहले आप से।

ऋषि कपूर की आवाज बने थे रफी साहब

बता दें कि ऋषि कपूर ने अपनी फिल्म लैला मजनू के लिए कहा था कि वे चाहते हैं कि उनके लिए किशोर कुमार गाना गाएं, लेकिन फिर संगीतकार मदन मोहन ने कहा कि मोहम्मद रफी ही उनके साथ गाना गाएंगे। जब रफी साहब ने गाना गाए तो वो सभी हिट हुए और तबसे ऋषि कपूर के लिए रफी साहब ने कई गाने गाए।

मोहम्मद रफी को कितने अवॉर्ड मिले

मोहम्मद रफी को उनकी आवाज के लिए 6 फिल्मफेयर और 1 नेशनल अवॉर्ड मिल चुका है। इसके अलावा वह पद्म श्री सम्मान से भी सम्मानित हो चुके थे।

उनका आखिरी गाना

मोहम्मद रफी का आखिरी गाना शाम फिर क्यों उदास है। ये गाना 1981 की फिल्म आस पास का है जिसका म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने दिया था और इसके गीतकार आनंद बख्शी थे। मोहम्मद रफी ने इस गाने को 31 जुलाई 1980 को रिकॉर्ड किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस गाने के रिकॉर्ड के 2 दिन बाद उनका निधन हो गया था।

रफी साहब के निधन पर लग गई थी लोगों की भीड़

ऐसा कहा जाता है कि जिस दिन मोहम्मद रफी का निधन हुआ उस दिन बहुत तेज बारिश हो रही थी, ऐसा लग रहा था जैसे आसमान भी उनके दुनिया को छोड़ने के दुख में रो रहा है। भारी बारिश के बावजूद सिंगर को श्रद्धांजलि देने 10 हजार से ज्यादा लोग आए थे जो कि उससे पहले कभी किसी ने नहीं देखा। लोगों के मन में रफी की आवाज का जादू ही इस कदर बसा हुआ था।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN