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बागी TMC सांसद महुआ मोइत्रा पर ₹40 करोड़ की रिश्वत के मामले में मुकदमा करेंगे

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ट्रिनामूल कांग्रेस (TMC) के भीतर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, 20 बागी सांसदों का एक समूह अपनी पार्टी की सहयोगी महुआ मोइत्रा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने की तैयारी कर रहा है। यह कानूनी कदम मोइत्रा के उन आरोपों के कारण उठाया जा रहा है, जिनमें उन्होंने कहा था कि इन सांसदों को पार्टी छोड़ने के लिए कुल ₹40 करोड़ की रिश्वत ऑफर की गई थी।

**आरोपों का पृष्ठभूमि**

यह विवाद तब शुरू हुआ जब मोइत्रा, जो एक प्रमुख TMC नेता और पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुखर समर्थक हैं, ने शिव सेना (UBT) राज्यसभा सांसद संजय राउत के दावों का जवाब दिया। राउत ने आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र के सांसदों को ₹15 करोड़ प्रति व्यक्ति पार्टी बदलने के लिए ऑफर किए जा रहे हैं। इसके जवाब में मोइत्रा ने सुझाव दिया कि उनके साथी सांसदों को इससे अधिक बड़ी रिश्वत का प्रस्ताव मिला था, उन्होंने कहा, “सिर्फ 15 करोड़? सस्ते में क्यों जा रहे हैं? हमारा मानना है कि उन्हें ₹4 करोड़ अग्रिम और अगले 36 महीनों के लिए हर महीने ₹1 करोड़ मिला।”

**बागी समूह का गठन**

इन आरोपों के बाद, TMC के संसदीय दल में एक बड़ा परिवर्तन हुआ। 17 जून 2026 को, पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20, जिन्हें विधायक प्रमुख काकोलि घोष दस्तिदार ने नेतृत्व दिया, अलग समूह बनाने के लिए टूट गए। इस कदम को पार्टी की एकता और नेतृत्व के लिए एक बड़ा चुनौती माना गया।

**बागी सांसदों की प्रतिक्रिया**

मोइत्रा के रिश्वत के आरोपों के जवाब में, बागी सांसदों ने बैठक बुलाकर सर्वसम्मति से उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने का निर्णय लिया। उनका कहना है कि मोइत्रा के बयान बिना किसी आधार के हैं और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाते हैं। सांसदों का तर्क है कि ऐसे आधारहीन आरोप उनकी सत्यनिष्ठा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करते हैं।

**कानूनी कार्यवाही और राजनीतिक निहितार्थ**

आगामी मानहानि का मुकदमा TMC के अंदरूनी तनाव को और बढ़ाने वाला है। कानूनी विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह मामला मोइत्रा के दावों की सत्यता और सांसदों के अलगाव के कारणों की जांच करेगा। इस कानूनी लड़ाई का परिणाम पार्टी के भविष्य के राजनीतिक समीकरणों और राष्ट्रीय राजनीति में इसकी स्थिति पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

**मोइत्रा का موقف**

मोइत्रा अपने आरोपों पर अडिग हैं, वे दावे करती हैं कि बागी सांसदों को वास्तव में बड़ी रकम ऑफर की गई थी ताकि वे पार्टी छोड़ दें। उनका कहना है कि उनके बयान पारदर्शिता और जवाबदेही के हित में थे। मोइत्रा की दृढ़ता से दिखता है कि वे लंबी कानूनी टकराव की अपेक्षा कर रही हैं।

**व्यापक संदर्भ**

यह घटनाक्रम मोइत्रा द्वारा सामना किए जा रहे कई कानूनी चुनौतियों का हिस्सा है। मार्च 2024 में, उनके पूर्व साथी जय अनंत देहद्राई ने उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि मोइत्रा ने उनके बारे में झूठे और मानहानिकारक बयान दिए हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने BJP सांसद निश्चलांत दुबे और वकील जय अनंत देहद्राई को उनके खिलाफ “झूठा और मानहानिकारक” सामग्री पोस्ट करने से रोकने की मोइत्रा की याचिका खारिज कर दी थी।

**निष्कर्ष**

TMC के भीतर परिस्थिति तेजी से विकसित हो रही है, और महुआ मोइत्रा के खिलाफ आगामी मानहानि का मुकदमा पार्टी की आंतरिक झगड़ों में एक नया अध्याय खोलने जा रहा है। जैसे-जैसे कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ेगी, पूरा ध्यान इन घटनाक्रमों पर रहेगा, जो पश्चिम बंगाल और उससे आगे के राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित करने वाले हैं।