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पाक की मध्यस्थता US के लिए शर्मिंदगी होगी, भारत सही होता; एक्सपर्ट बोले

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ट्रंप ने रविवार को कहा कि अमेरिकी वार्ताकार सोमवार को ईरान के साथ दूसरे दौर की बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंचेंगे। ट्रंप ने धमकी दी कि अगर ईरान अमेरिका द्वारा प्रस्तावित समझौते को स्वीकार नहीं करता है, तो वह ईरान में नागरिक बुनियादी ढांचे को नष्ट कर देंगे।

पश्चिम एशिया संघर्ष में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक कोशिशों में पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। अमेरिकी थिंक टैंक अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो माइकल रुबिन ने इस भूमिका पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने यह तक कह दिया है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता अमेरिका के लिए शर्मिंदगी की बात होगी, बल्कि खतरनाक भी हो सकती है। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है, जब पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता की मध्यस्थता के लिए तैयार है।

संडे गार्जियन में प्रकाशित लेख में रुबिन ने कहा कि पाकिस्तान की भूमिका दुर्भावना से भरी रही है। उन्होंने लिखा, ‘पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक ए.क्यू. खान ने ईरान का परमाणु कार्यक्रम बनाने में मदद की; और अब वाशिंगटन उसी गंदगी के लिए इस्लामाबाद को इनाम दे रहा है जो उनके अपने भ्रष्टाचार ने पैदा की थी।’ उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान न केवल दुनिया के सबसे अधिक यहूदी-विरोधी देशों में से है, बल्कि वह सबसे अधिक अमेरिका-विरोधी देशों में भी एक है।’

अमेरिकी सेना पर सवाल उठाने का दावा

रुबिन ने लिखा, ‘पाकिस्तानी सरकार ने आधिकारिक तौर पर उस अमेरिकी रेड को ‘गहरी निराशा’ बताया था जिसमें ओसामा बिन लादेन मारा गया था।’ उन्होंने लिखा, ‘यह सोचना कि ट्रंप की एक अमेरिकी वकील के साथ निजी दोस्ती, जिसे पाकिस्तान ने कभी लॉबिस्ट रखा था, पाकिस्तान की दशकों की बुराइयों को मिटा देगी। यह बात बहुत अजीब है। पाकिस्तान के जरिए देश की सुरक्षा के बड़े मसलों को सुलझाने की कोशिश करके, ट्रंप असल में वैसा ही काम कर रहे हैं जैसे चाइल्ड मोलेस्टर को बच्चों के स्कूल किंडरगार्टन में पढ़ाने के लिए नौकरी पर रखना।’

गलती बताया

रुबिन ने ट्रंप के फैसलों को गलती बताया है। उन्होंने लिखा, ‘पाकिस्तान पर भरोसा करके, ट्रंप वही गलतियां दोहरा रहे हैं जो अफगानिस्तान, गाजा, सीरिया और यमन में हुई थीं। किसी भी देश को अमेरिका को युद्ध में हराने की जरूरत नहीं है, अगर अमेरिकी राष्ट्रपति दुश्मनों को ही समझौता कराने की छूट दे दें। ऐसे समझौते जीत को हार में बदल देते हैं। इसका नतीजा न केवल अमेरिका का अपमान होगा, बल्कि एक घमंडी और ताकतवर इस्लामाबाद का खतरा भी बढ़ जाएगा, जिसे लगेगा कि ट्रंप ने उसे अपना आतंक जारी रखने की पूरी छूट दे दी है।’

भारत का जिक्र

रुबिन ने लेख में भारत का भी जिक्र किया है। उन्होंने लिखा, ‘भारत को सैन्य रूप से तैयार रहना चाहिए, लेकिन उसे यह भी पूछना चाहिए कि पाकिस्तान की सरकार विदेश मंत्रालय को मात देने में कैसे कामयाब रही। पाकिस्तान ने खुद को एक मध्यस्थ के रूप में खड़ा कर लिया है, जबकि इस भूमिका के लिए भारत कहीं अधिक बेहतर और उपयुक्त होता।’

वार्ता

ट्रंप ने रविवार को कहा कि अमेरिकी वार्ताकार सोमवार को ईरान के साथ दूसरे दौर की बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंचेंगे। ट्रंप ने धमकी दी कि अगर ईरान अमेरिका द्वारा प्रस्तावित समझौते को स्वीकार नहीं करता है, तो वह ईरान में नागरिक बुनियादी ढांचे को नष्ट कर देंगे। खबरें हैं कि ईरान ने वार्ता के दूसरे दौर में शामिल होने से इनकार कर दिया है। सीजफार की अवधि 22 अप्रैल को खत्म हो रही है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN