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दवा लेने का सही तरीका क्या है, जानिए डॉक्टरों की राय

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Source :- BBC INDIA

दवाई को लेने का तरीका उसके असर में अहम भूमिका निभाता है

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जब भी हमें दवाई लेनी होती है, तो हम गोलियां मुंह में डालते हैं और थोड़ा पानी पी लेते हैं.

ऐसा करने पर हमें लगता है जैसे हमने कोई बड़ा काम पूरा कर लिया हो और आख़िरकार हमें छुटकारा मिल गया.

कुछ लोग गोलियों को ठंडे पानी के साथ लेते हैं, जबकि कुछ गर्म पानी के साथ.

जिन लोगों को गोलियां खाना अच्छा नहीं लगता, वे अक्सर दवा का स्वाद महसूस करने से बचने के लिए उन्हें चाय, कॉफी, दूध या ठंडे लिक्विड के साथ लेते हैं.

कुछ लोग अपनी दवाइयां या गोलियां डॉक्टर के बताए तरीके के अनुसार ही खाते हैं. हालांकि कुछ लोग दिनभर में जब भी उन्हें याद आता है, तब अपनी दवाई खा लेते हैं.

लेकिन सवाल ये है कि तो क्या उनके लिए जब मन करे तब दवाई खाना ठीक है?

क्या आप जानते हैं कि दवाइयां या गोलियां खाते समय हम जो पानी पीते हैं और जिस समय हम उन्हें लेते हैं, जैसी छोटी-छोटी चीजें भी कितना बड़ा प्रभाव डालती हैं?

दवा लेने का तरीका इस बात पर बहुत असर डाल सकता है कि दवा शरीर में कैसे अब्जॉर्ब होती है और कितनी प्रभावी होती है.

दवाई लेने के बारे में कुछ जरूरी बातें जानिए.

दवाइयां कई घंटों तक पेट में रहती हैं

कई दवाइयों को असर दिखाने में काफी घंटे लगते हैं

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दवाइयां कई रूपों में उपलब्ध हैं. ये सिरप, सस्पेंशन, टैबलेट, कैप्सूल, पाउडर और इंजेक्शन के रूप में मिलती हैं.

विशेषज्ञों के मुताबिक़ लिक्विड दवा शरीर में आसानी से अब्जॉर्ब हो जाती है. लेकिन उन्हें लंबे समय तक स्टोर में रखना मुश्किल होता है.

इसलिए, कई दवाइयां गोलियों और कैप्सूलों के रूप में तैयार की जाती हैं. हालांकि, सभी तरह की दवाई लिक्विड फॉर्म में नहीं ली जा सकती हैं.

ख़ासकर आराम से असर करने वाली दवाइयां. यानी, वे दवाइयां जो हमारे पेट में पहुंचने के तुरंत बाद घुलती नहीं हैं और शरीर में पूरी तरह से अब्जॉर्ब नहीं होती हैं.

इसलिए उनमें मौजूद मेडिसिनल इंग्रेडिएंट्स कई घंटों तक अपना असर दिखाते रहते हैं.

जो दवाएं असर दिखाने में समय लेती हैं उनके एक्टिव कंपोनेंट्स शरीर में कई घंटों तक धीरे-धीरे जाते रहते हैं.. इस तरह की दवाइयों को पसीना या चबाना नहीं चाहिए.

विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर इन्हें पीसा या चबाया जाए, तो इनके सभी एक्टिव कंपोनेंट्स एक साथ बॉडी में जा सकते हैं. ऐसा होना स्वास्थ्य के लिए ख़तरनाक हो सकता है.

क्या गोलियों को ठंडे या गर्म पानी के साथ लेना चाहिए?

ये भी सवाल है कि दवाई की गोली को किस तरह के पानी के साथ लेना चाहिए.

डॉ. गोपेश ने बीबीसी को बताया, “किसी भी गोली या कैप्सूल को गर्म पानी के साथ लेना सबसे अच्छा होता है.”

“चाहे वो गोलियां हों या दानेदार दवा या फिर कैप्सूल हों, गर्म पानी के साथ लेने पर उनका सही प्रभाव देखने को मिलता है.”

उन्होंने कहा, “ठंडा पानी गोली या कैप्सूल के घुलने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है. गर्म पानी के साथ गोली या कैप्सूल लेने से उसमें मौजूद मेडिसिनल इंग्रेडिएंट्स का इंपैक्ट कम हो सकता है.”

उन्होंने बताया कि दवाई को वैसे ही लेना चाहिए जैसे डॉक्टर ने बताया होता है. कभी भी अपने हिसाब से दवाई नहीं लेनी चाहिए.

सामान्य पानी के साथ दवाई को लेना सबसे बेहतर विकल्प है

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डॉ एन विजयलक्ष्मी ने ‘केआईएमएस हेल्थ’ वेबसाइट पर इस टॉपिक पर एक ऑर्टिकल के जरिए जानकारी मुहैया करवाई है.

उनकी दी गई जानकारी के मुताबिक, “हम जो दवाइयां लेते हैं, वे पेट और आंतों की कोशिकाओं के जरिए बॉडी में अब्जॉर्ब हो जाती हैं.”

शरीर में मेडिसिनल इंग्रेडिएंट्स के ठीक से अब्जॉर्ब होने के लिए पेट और आंतों के बीच वाली जगह के तापमान का सही होना जरूरी है.

ठंडा पानी पेट में दवाओं के घुलने की गति को धीमा कर देता है. ठंडा पानी पेट का तापमान भी कम कर देता है. इससे दवा के तत्व शरीर में ठीक से अब्जॉर्ब नहीं हो पाते. यह प्रक्रिया में बाधा डालता है.

जब हम ठंडे पानी के साथ दवाई लेते हैं, तो पेट में पहुंचने पर बॉडी को इसे गर्म करने में अधिक ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है.

दरअसल, शरीर को ली गई गोलियों को पचाने, यानी दवा को अब्जॉर्ब करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है. लेकिन इसके बजाय, वह ऊर्जा पेट में पानी को गर्म करने में खर्च हो जाती है.

चावल खाने के बाद अगर आप ठंडा पानी भी पीते हैं, तो शरीर भोजन में मौजूद पोषक तत्वों को अब्जॉर्ब करने के बजाए उस ठंडे पानी को शरीर के तापमान तक गर्म करने में ऊर्जा खर्च करता है.

तो क्या गर्म पानी के साथ दवा लेना ठीक है?

गर्म पानी के साथ दवाई लेने में भी रिस्क है

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अपने ऑर्टिकल में डॉ विजयलक्ष्मी ने बताया, “अगर आप गर्म या सामान्य तापमान के पानी के साथ दवाई लेते हैं, तो दवा शरीर में तेजी से घुल जाती हैं और उनका असर भी तेजी से दिखने लगता है.”

क्या दवा को दूध, मिनरल वाटर या जूस के साथ लेना ठीक है?

दूध के साथ दवाई लेना बिल्कुल सही तरीका है

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उर्सुला सेलरबर्ग ने ‘द हिंदू’ में अपने ऑर्टिकल में लिखा, “दवाओं को सादे पानी के साथ लेना सबसे अच्छा है. क्योंकि दूध, मिनरल वाटर, जूस, बीयर और वाइन के साथ दवाएं लेने से कभी-कभी उन दवाओं का असर बदल सकता है.”

उर्सुला सेलरबर्ग फर्डल यूनियन ऑफ जर्मन एसोसिएशन ऑफ फार्मासिस्ट की प्रवक्ता हैं.

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “दूध में कैल्शियम होता है, जो दवाओं के साथ मिल जाता है. इससे दवा खून में प्रवेश नहीं कर पाती. कैल्शियम युक्त जूस और मिनरल वाटर के साथ भी ऐसा ही हो सकता है.”

उर्सुला सेलरबर्ग का कहना है कि दूध और डेयरी उत्पाद कुछ दवाओं, विशेष रूप से थायरॉइड हार्मोन, ऑस्टियोपोरोसिस की दवाओं और कई प्रकार के एंटीबायोटिक दवाइयों के प्रभाव को कम कर सकते हैं.

अंगूर का रस

अंगूर का रस दवाई के प्रभाव पर बहुत बुरा असर डालता है

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स्टडी से पता चला है कि अन्य फलों के रसों की तुलना में अंगूर का रस कई प्रकार की दवाइयों के प्रभाव और दुष्प्रभावों को बढ़ा देता है.

सेलरबर्ग ने कहा, “अंगूर का रस हमारे शरीर में उन एंजाइमों को रोकता है जो दवाइयों को तोड़ते हैं.”

अंगूर का रस उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, लिपिड- मेटोबॉलिज्म दिक्कतें और अन्य पुरानी या दीर्घकालिक स्थितियों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं के साथ रिएक्शन कर सकता है.

संतरे और सेब के रस के मामले में अभी तक ऐसे दुष्प्रभाव नहीं पाए गए हैं.

शराब

ये भी सवाल है कि दवाई कितने पानी के साथ लेनी चाहिए

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किसी भी परिस्थिति में दवाओं का सेवन शराब के साथ नहीं करना चाहिए.

ऐसा इसलिए है क्योंकि अल्कोहल कुछ सक्रिय दवाओं के साथ रिएक्ट कर दुष्प्रभाव पैदा कर सकता है.

दवा लेते समय कितना पानी पीना चाहिए?

कुछ लोग दवा को पानी के बिना सीधे ही ले लेते हैं.

इसके कारण बगैर कोटिंग वाली दवा जीभ से चिपक जाती है. साथ ही, इससे जीभ पर कड़वा स्वाद भी रह जाता है.

डॉ. प्रदीप सिंह मुंबई के फोर्टिस अस्पताल में डॉक्टर हैं. हेल्थसाइट.कॉम ने डॉ. प्रदीप सिंह के हवाले से बताया है कि अगर आप गोली को बिना पानी के लेते हैं, तो यह आपके गले में अटक सकती है और आपको घुटन महसूस हो सकती है.

वो लिखते हैं “अगर आप बिना पानी के गोली लेते हैं, तो वह ठीक से घुलती नहीं है. इसलिए गोली पाचन तंत्र से होकर मल के साथ बाहर निकल जाती है. अगर गोली बिना घुले शरीर से बाहर निकल जाती है, तो इसका मतलब है कि शरीर को दवा से कोई लाभ नहीं मिला है.”

उदाहरण के लिए, डॉ. प्रदीप कहते हैं कि आइबुप्रोफेन जैसी नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं, अगर पर्याप्त पानी के साथ न ली जाएं, तो पेट में मौजूद हाइड्रोक्लोरिक एसिड के साथ प्रतिक्रिया कर सकती हैं या उससे बंध सकती हैं, जिससे पेट के अल्सर हो सकता है.

आप आमतौर पर गोली लेते समय कमरे के तापमान का एक गिलास पानी पी सकते हैं. यदि आपको इस बारे में कोई संदेह है, तो डॉक्टर से सलाह लें.

(स्रोत : इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, एनएचएस-यूके और इंडियन फार्मास्यूटिकल एसोसिएशन)

यह जानकारी केवल जागरूकता फैलाने के मक़सद से दी गई है. स्वास्थ्य, इलाज और दवाओं से जुड़े मामलों में सीधे डॉक्टरों से सलाह लें.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित

SOURCE : BBC NEWS