नई दिल्ली में राजनीतिक तापमान कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge द्वारा प्रधानमंत्री Narendra Modi को लिखे गए एक तीखे पत्र के बाद बढ़ गया है। Kharge ने संसद में एक विवादास्पद संविधान संशोधन विधेयक को जल्दबाजी में पारित कराने के खिलाफ चेतावनी देते हुए इसके बजाय समावेशी चर्चा और उचित प्रक्रिया अपनाने का आग्रह किया।
## संसद सत्र में देरी ने उठाए सवाल
शुक्रवार को Kharge ने संसद के मानसून सत्र को आधिकारिक रूप से समाप्त करने में हुई असामान्य देरी पर गहरी चिंता व्यक्त की। हालांकि दोनों सदनों को 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था, लेकिन 64 दिन बाद भी उन्हें सत्रावसान नहीं किया गया है। उन्होंने इसे “अभूतपूर्व” घटना बताया।
## संविधान संशोधनों पर सर्वदलीय बैठक की मांग
Kharge के पत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि सरकारी प्रस्तावों के विधायी चरण में पहुंचने से पहले उनकी समीक्षा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई जानी चाहिए। उन्होंने लिखा, “सभी राजनीतिक दलों को आपस में, एक-दूसरे के साथ और सभी अन्य हितधारकों के साथ विचार-विमर्श करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए,” और जोर दिया कि वह यह अनुरोध चौथी बार कर रहे हैं।
इससे पहले भी ऐसी बैठक बुलाने का अनुरोध किया गया था:
– 11 अप्रैल: Kharge ने परिसीमन संशोधन विधेयक पेश करने से पहले Modi से बैठक बुलाने का अनुरोध किया।
– 14–17 अप्रैल: सरकार ने परिसीमन विधेयक वितरित किए और विशेष सत्र बुलाया; बाद में समर्थन की कमी के कारण लोकसभा में विधेयक विफल हो गए।
– 16 जुलाई और 27 अगस्त: Kharge ने बातचीत की मांग दोहराई।
## कानून को “बुलडोज” करने के खिलाफ चेतावनी
Kharge ने प्रधानमंत्री को चेतावनी दी कि वे “दूरगामी प्रभाव वाले संविधान संशोधन विधेयक को बुलडोज न करें।” बताया गया कि अप्रैल में परिसीमन विधेयकों को देर शाम की प्रक्रियाओं और आपात सत्रों के माध्यम से जल्दबाजी में आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया था। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे जल्दबाजी भरे कदमों के परिणामस्वरूप कोई अन्य प्रस्ताव भी उसी स्थिति का सामना कर सकता है—यानी संसद द्वारा सर्वसम्मति से खारिज किया जाना।
## संदर्भ: मानसून सत्र में व्यवधान
मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चला और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार समाप्त हुआ। हालांकि, संवेदनशील मुद्दों को लेकर बार-बार हुए व्यवधानों से यह सत्र प्रभावित रहा:
– अयोध्या में कथित राम मंदिर चढ़ावे की चोरी
– NEET परीक्षा प्रश्नपत्र लीक
– दिल्ली में NEET प्रदर्शनकारियों के प्रदर्शनों के दौरान पुलिस का आचरण
Kharge ने सत्र के दौरान हुए हंगामे को संविधान संशोधनों से सावधानीपूर्वक और सतर्कता के साथ निपटने की आवश्यकता से जोड़ा।
## रणनीतिक निहितार्थ
यह पत्र ऐसे समय आया है जब सरकार नए संवैधानिक बदलावों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार दिख रही है—ऐसे क्षेत्र जिनके लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत आवश्यक है। Kharge की सार्वजनिक अपील से संकेत मिलता है कि विपक्ष इस बात को लेकर अधिक सतर्क हो रहा है कि ऐसे कानूनों को किस तरीके से पेश किया जा सकता है।
पारदर्शिता और दलगत सहमति वाली बातचीत पर जोर देकर Kharge यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि किसी भी संशोधन को केवल दलगत समर्थन के बजाय व्यापक सहमति प्राप्त हो।
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