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कर्ज नहीं चुका पा रहा मालदीव, मुइज्जू को आई भारत की याद; करेंसी स्वैपिंग की मांग रहे मदद

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Source :- LIVE HINDUSTAN

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण पर्यटकों की संख्या में गिरावट आई है और ईंधन की कीमतें बढ़ गई हैं। इन विपरीत परिस्थितियों में मालदीव के लिए नए अंतरराष्ट्रीय ऋण जुटाना भी मुश्किल होता जा रहा है।

मालदीव में गहराते आर्थिक तनाव के बीच भारत सरकार मालदीव द्वारा करेंसी स्वैप सुविधा को विस्तार देने के अनुरोध पर विचार कर रही है। हालांकि, मौजूदा नियमों और सख्त शर्तों के कारण भारत के लिए इस अनुरोध को स्वीकार करना कूटनीतिक और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो गया है। मालदीव वर्तमान में भारी अंतरराष्ट्रीय कर्ज और घटते विदेशी मुद्रा भंडार के कारण गंभीर वित्तीय दबाव में है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने पर्यटन और ऊर्जा लागतों को प्रभावित कर मालदीव की कमर और तोड़ दी है।

सूत्रों के मुताबिक, मालदीव ने भारत से फिर से करेंसी स्वैप सुविधा बढ़ाने की गुहार लगाई है। लेकिन भारतीय नियमों के अनुसार, दो बार निकासी के बीच एक कूलिंग-ऑफ (निश्चित समय का अंतर) का होना अनिवार्य है। साथ ही रोल-ओवर (कर्ज की अवधि बढ़ाना) की भी एक तय सीमा होती है। इन तकनीकी कारणों से भारत के लिए दोबारा मदद देना आसान नहीं है। यदि भारत इस बार विस्तार नहीं दे पाता है, तो मालदीव की वित्तीय स्थिति अल्पावधि में और अधिक बिगड़ सकती है।

भारत का अब तक का सहयोग

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में मालदीव की समस्याओं को दूर करने के लिए कई असाधारण कदम उठाए हैं। अक्टूबर 2024 में भारत ने 400 मिलियन डॉलर की करेंसी स्वैप सुविधा प्रदान की थी, जिसे सख्त नियमों के बावजूद दो बार रोल-ओवर किया गया। मई और सितंबर 2025 में भारत ने 50-50 मिलियन डॉलर के दो ब्याज मुक्त ट्रेजरी बिलों की अवधि एक साल के लिए बढ़ा दी। जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मालदीव यात्रा के दौरान बुनियादी ढांचे के लिए 565 मिलियन डॉलर की ‘लाइन ऑफ क्रेडिट’ और ऋण चुकाने की शर्तों में ढील देने की घोषणा की गई थी।

नाजुक दौर में मालदीव की अर्थव्यवस्था

रेटिंग एजेंसियों के अनुसार, मालदीव की स्थिति बेहद चिंताजनक है। फिच रेटिंग्स ने मालदीव की सॉवरेन रेटिंग को ‘CC’ पर रखा है, जो कर्ज चूक की उच्च संभावना को दर्शाता है। मूडिज ने भी अपनी ‘CAA2’ रेटिंग बरकरार रखी है।

अप्रैल 2026 में मालदीव को लगभग 1 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना था, जिसमें 500 मिलियन डॉलर का सुकुक बॉन्ड और भारत के साथ 400 मिलियन डॉलर का करेंसी स्वैप शामिल है। 1 अप्रैल, 2026 को मालदीव सरकार ने अपने सॉवरेन डेवलपमेंट फंड से सुकुक बॉन्ड का भुगतान तो कर दिया, लेकिन इससे उसका विदेशी मुद्रा भंडार काफी कम हो गया है।

मालदीव की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पर्यटन पर टिकी है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण पर्यटकों की संख्या में गिरावट आई है और ईंधन की कीमतें बढ़ गई हैं। इन विपरीत परिस्थितियों में मालदीव के लिए नए अंतरराष्ट्रीय ऋण जुटाना भी मुश्किल होता जा रहा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN