Source :- LIVE HINDUSTAN
अमेरिका द्वारा ईरान पर थोपे गए युद्ध के चलते दुनिया के कई देश परेशान हैं। ट्रंप के मनमाने रवैये का खामियाजा दुनिया की बड़ी आबादी भुगत रही है। कुछ ऐसा ही हाल क्यूबा का भी है। पिछले कुछ महीनों से ट्रंप क्यूबा को लगातार धमकियां दे रहे हैं।
अमेरिका द्वारा ईरान पर थोपे गए युद्ध के चलते दुनिया के कई देश परेशान हैं। ट्रंप के मनमाने रवैये का खामियाजा दुनिया की बड़ी आबादी भुगत रही है। कुछ ऐसा ही हाल क्यूबा का भी है। पिछले कुछ महीनों से ट्रंप क्यूबा को लगातार धमकियां दे रहे हैं। वैसे तो क्यूबा कभी भी अमेरिका का मित्र राष्ट्र नहीं रहा। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के शासन में उसकी मुसीबतें ज्यादा बढ़ गई हैं। हाल-फिलहाल वेनेजुएला पर कब्जे के बाद ट्रंप फिर से क्यूबा पर शिकंजा कसने में जुटे हैं। ट्रंप ने क्यूबा के लिए तमाम मदद बंद कर रखी है। नतीजा यह है कि वहां पर बिजली, पानी और खाने की बेसिक जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं।
ट्रंप ने बताया अमेरिकी सुरक्षा के लिए खतरा
असल में ट्रंप ने क्यूबा को अमेरिकी सुरक्षा के लिए खतरा बता रखा है। इसके साथ ही उसके ऊपर तमाम तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ट्रंप का कहना है कि क्यूबा ने लंबे समय तक वेनेजुएला को सपोर्ट किया है। ऐसे में उसे तेल और दूसरी चीजों से महरूम रखा जाएगा। इसका नतीजा यह है कि इस साल की शुरुआत से ही क्यूबा बुरी तरह से परेशान है। यहां पर बड़ी संख्या में लोगों के पास पेट भरने के लिए जरूरी खाना नहीं है। यह लोग चर्च द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे खाने पर निर्भर हैं। ऐसे ही बूढ़ों का एक ग्रुप ओल्ड हवाना में स्थित होली स्पिरिट चर्च में पहुंचा था। इन लोगों ने यहां पर मांस, चावल और रेड बीन्स का भोजन करने के बाद भी भगवान का शुक्रिया अदा किया।
कहां है क्यूबा
क्यूबा एक छोटा सा देश है जो अमेरिकी राज्य फ्लोरिडा के पास है। यह चारों तरफ से समुद्र से घिरा हुआ है और इसकी जमीनी सीमा किसी भी देश से नहीं लगती। आपको बता दें कि एक समय बेहद मशहूर शख्सियत फिदेल कास्त्रो इस देश के राष्ट्रपति हुआ करते थे। यहां पर फिलहाल कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ क्यूबा का शासन है। मिगुएल डियाज कैनेल साल 2018 से क्यूबा के राष्ट्रपति हैं। ट्रंप के प्रतिबंधों के बाद क्यूबा में जो हालात बने हैं, उसका सबसे ज्यादा असर यहां के बुजुर्गों पर ही पड़ा है। इनमें से बड़ी संख्या में लोग पूर्व सरकारी कर्मचारी, अध्यापक, डॉक्टर, नर्स और टेक्नीशियंस हैं। इनमें से कई तो ऐसे हैं, जिनकी पेंशन महीने में 10 डॉलर से भी कम है।
अमेरिका से पुराना पंगा
एक समय था जब क्यूबा स्पेन के अधीन था। 1898 में अमेरिका ने स्पेन को मात दे दी। इसके बाद से स्पेन ने क्यूबा को अमेरिका को सौंप दिया। 1902 में क्यूबा आजाद तो हो गया लेकिन अमेरिका के ही संरक्षण में है। साल 1959 में जब फिदेल कास्त्रो ने अमेरिकी समर्थन वाली सरकार को हरा दिया, तब से अमेरिका और ज्यादा उससे नाराज है। बाद में क्यूबा सरकार जब सोवियत संघ के करीब जाने लगी तो अमेरिका की चिढ़ और ज्यादा बढ़ने लगी। जब जॉन एफ केनेडी अमेरिका के राष्ट्रपति थे तो उन्होंने क्यूबा को जरूरी सामान देना ही बंद कर दिया था। बाद में ओबामा के शासन के वक्त क्यूबा को थोड़ी राहत मिली। लेकिन दोबारा सत्ता में आने के बाद ट्रंप फिर से पुराने तेवर में आ गए हैं।
अब क्यों भड़के हैं ट्रंप
ट्रंप का क्यूबा पर मौजूदा गुस्सा वेनेजुएला के लिए उसके समर्थन को लेकर है। इस साल की शुरुआत में ही ट्रंप ने लिखा था कि क्यूबा कई साल तक वेनेजुएला से तेल और पैसे लेता और बदले में उनके तानाशाहों को सुरक्षा देता रहा। अब यह सब नहीं चलने वाला है। उन्होंने साफ ऐलान कर दिया कि क्यूबा को अब और पैसा नहीं दिया जाएगा। इतना ही नहीं, ट्रंप ने यह भी कहा है इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, क्यूबा को समझौता कर लेना चाहिए। अब ट्रंप चाहते हैं कि क्यूबा में बड़े पैमाने पर बदलाव हो। वहीं, वहां की कम्यूनिस्ट पार्टी हर हाल में सत्ता में बने रहना चाहती है। यहां तक कि ट्रंप ने यह भी कह डाला है कि ईरान के बाद अब क्यूबा की ही बारी है।
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