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अमेरिका और ईरान के बीच भले ही सीजफायर चल रहा हो, लेकिन युद्ध पूरी तरह से कब खत्म होगा, इसका पूरी दुनिया को इंतजार है। इस बीच, तेहरान ने अमेरिका से बातचीत के लिए नया प्रस्ताव भेजा है।
Iran US War Update: ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत के लिए अपना नया प्रस्ताव पाकिस्तानी मध्यस्थों को भेजा है। यह जानकारी ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA ने शुक्रवार को दी। इस कदम से ईरान युद्ध को खत्म करने की कोशिशों में आई रुकावट को दूर करने की उम्मीदें बढ़ सकती हैं। IRNA ने इस बारे में कोई और जानकारी नहीं दी, लेकिन उसकी इस रिपोर्ट के बाद दुनिया भर में तेल की कीमतें गिर गईं। बता दें कि जब से ईरान ने होर्मुज की नाकेबंदी शुरू की है, तब से तेल की कीमतों में भारी उछाल आया था।
समुद्र के इस अहम रास्ते की नाकेबंदी से दुनिया की 20 फीसदी तेल और गैस की सप्लाई रुक गई है, और अमेरिकी नौसेना ईरान के कच्चे तेल के निर्यात को रोक रही है। इससे ऊर्जा की कीमतें बढ़ गई हैं और इस बात की चिंता भी बढ़ गई है कि कहीं आर्थिक मंदी न आ जाए। अभी यह तुरंत साफ नहीं हो पाया है कि ईरान का यह प्रस्ताव वॉशिंगटन तक पहुंचाया गया है या नहीं।
अमेरिका-ईरान के बीच आठ अप्रैल से ही सीजफायर लागू है। दो वरिष्ठ ईरानी सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर रॉयटर्स को बताया कि ईरान ने अपनी हवाई सुरक्षा प्रणाली को सक्रिय कर दिया है और अगर उस पर हमला होता है, तो वह इसका व्यापक जवाब देने की योजना बना रहा है। ईरान का आकलन है कि अमेरिका की ओर से एक छोटा और जोरदार हमला हो सकता है, जिसके बाद संभवतः इजराइल भी हमला कर सकता है।
हालांकि, अमेरिका ने यह नहीं बताया है कि उसका अगला कदम क्या होगा। ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि वह ईरान के पिछले प्रस्ताव से खुश नहीं थे, और पाकिस्तान ने उस युद्ध को खत्म करने के लिए नई बातचीत की कोई तारीख तय नहीं की है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों के बाद, ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों, बुनियादी ढांचे और अमेरिका से जुड़ी कंपनियों पर हमले किए। वहीं, ईरान समर्थित लेबनानी समूह हिज्बुल्ला ने इजरायल पर मिसाइलें दागीं, जिसके जवाब में इजरायल ने लेबनान पर हमले किए।
अमेरिका और ईरान के बीच कोई युद्ध नहीं चल रहा: ट्रंप
वहीं, ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार को चौंकाने वाला बयान दिया है। ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई युद्ध नहीं चल रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या सैन्य अभियानों के लिए तय 60 दिनों की कानूनी समय सीमा खत्म हो गई है। इस विवाद ने अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में नए कानूनी और संवैधानिक सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के अध्यक्ष माइक जॉनसन ने तर्क दिया कि फिलहाल इस सैन्य अभियान के लिए संसद से अलग से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अभी कोई सक्रिय लड़ाई नहीं हो रही है। उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में कहा, “मुझे नहीं लगता कि अभी कहीं बमबारी या गोलीबारी जैसी कोई सक्रिय सैन्य गतिविधि चल रही है। फिलहाल हम शांति समझौता कराने की कोशिश कर रहे हैं, हम युद्ध में नहीं हैं।”
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