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इस बैंक की बिक्री पर बड़ा अपडेट! खाताधारक और निवेशकों के लिए आई बड़ी खबर, सरकार जल्द ले सकती है फैसला

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Source :- LIVE HINDUSTAN

सरकार IDBI बैंक के निजीकरण को दोबारा रफ्तार देने की तैयारी में है। खबरों के मुताबिक, संभावित खरीदारों को आकर्षित करने के लिए रिजर्व प्राइस में 20% तक कटौती की जा सकती है। इसमें फेयरफैक्स फाइनेंशियल समेत कई कंपनियों की दिलचस्पी बनी हुई है।

भारत सरकार एक बार फिर IDBI बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया को तेज करने की तैयारी में है। लंबे समय से अटकी इस डील को आगे बढ़ाने के लिए अब सरकार कई नए विकल्पों पर विचार कर रही है। बताया जा रहा है कि संभावित खरीदारों की रुचि बढ़ाने के लिए रिजर्व प्राइस में करीब 20% तक कटौती की जा सकती है। इससे पहले मार्च 2026 में बोली प्रक्रिया रोक दी गई थी, क्योंकि खरीदारों द्वारा लगाए गए दाम सरकार की उम्मीद से काफी कम थे। अब सरकार चाहती है कि किसी तरह यह बड़ी डील सफल हो जाए, क्योंकि यह देश के बैंकिंग सेक्टर की सबसे बड़ी विनिवेश योजनाओं में से एक मानी जा रही है।

दरअसल, IDBI बैंक में सरकार और LIC की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 95% है। दोनों मिलकर 60.7% हिस्सेदारी बेचने की योजना बना चुके हैं। अगर यह सौदा सफल होता है, तो यह पिछले कई सालों में सरकारी बैंकिंग सेक्टर की सबसे बड़ी हिस्सेदारी बिक्री होगी। लेकिन, हाई वैल्यूएशन और शेयर प्राइस को लेकर खरीदारों की चिंता ने पूरी प्रक्रिया को धीमा कर दिया।

शेयरों में लगभग 32% की गिरावट

सूत्रों के मुताबिक, सरकार अब बैंक की इंट्रिंसिक वैल्यू यानी असली कारोबारी क्षमता के आधार पर कीमत तय करने पर विचार कर रही है, ताकि शेयर बाजार की गिरावट का असर डील पर कम पड़े। इस साल IDBI बैंक के शेयरों में लगभग 32% की गिरावट आ चुकी है, जबकि निफ्टी बैंक इंडेक्स (Nifty Bank Index) करीब 10% ही गिरा है। यही वजह है कि निवेशक ऊंची कीमत पर बैंक खरीदने से बच रहे हैं।

इस रेस में कनाडा के अरबपति प्रेम वत्स की कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल (Fairfax Financial) सबसे आगे मानी जा रही थी। इसके अलावा एमिरेट्स NBD (Emirates NBD) ने भी दिलचस्पी दिखाई थी। हालांकि, अंतिम बोली सरकार की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी। अब खबर है कि सरकार फिर से फेयरफैक्स (Fairfax) समेत अन्य इच्छुक कंपनियों से बातचीत शुरू कर सकती है।

दिलचस्प बात यह भी है कि कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) ने शुरुआत में IDBI बैंक में रुचि दिखाई थी। बैंक ने RBI से फिट एंड प्रॉपर मंजूरी के लिए आवेदन भी किया था, लेकिन बाद में ऊंची वैल्यूएशन के कारण बोली लगाने से पीछे हट गया। अब सरकार यह भी देख रही है कि क्या नए खरीदारों को शामिल किया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए RBI से नई मंजूरी लेनी पड़ सकती है, जिससे प्रक्रिया और लंबी हो सकती है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पहले ही साफ कर चुकी हैं कि सरकार IDBI बैंक के विनिवेश को लेकर पीछे नहीं हटेगी। सरकार की कोशिश है कि बैंक का निजीकरण करके उसे और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जाए और सरकारी बोझ कम किया जाए। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर कीमतों में कटौती की जाती है और शर्तें आसान बनाई जाती हैं, तो आने वाले महीनों में इस डील में नई जान आ सकती है। फिलहाल निवेशकों और बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार अगला कदम क्या उठाती है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN