सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के उस निर्देश पर रोक लगा दी है, जिसके तहत पांच सदस्यीय Board of Management को Podhu Dikshitars से Chidambaram Nataraja Temple का प्रशासन अपने नियंत्रण में लेने का आदेश दिया गया था। यह रोक 4 नवंबर, 2026 को मंदिर के पारंपरिक संरक्षकों द्वारा दायर चुनौती के जवाब में लगाई गई।
## सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया
Justices Aravind Kumar और Vipul Pancholi की अध्यक्षता वाली पीठ ने Podhu Dikshitars द्वारा दायर अपील पर सुनवाई करते हुए अंतरिम आदेश जारी किया। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि हाई कोर्ट का फैसला संविधान के Article 26 के तहत उन्हें प्राप्त अधिकारों का अतिक्रमण करता है। Article 26 धार्मिक संप्रदायों को धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने की स्वतंत्रता देता है।
## मद्रास हाई कोर्ट का मूल फैसला
30 अक्टूबर, 2026 को Justices G. Jayachandran और E. Manoharan की Division Bench ने रिट याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई के दौरान Board of Management के गठन का आदेश दिया था। इन याचिकाओं में तमिलनाडु स्थित Sri Sabanayagar Temple—जिसे व्यापक रूप से Chidambaram Nataraja Temple के नाम से जाना जाता है—में कथित कुप्रबंधन को लेकर चिंता जताई गई थी।
### बोर्ड की संरचना और शक्तियां
बोर्ड की संरचना इस प्रकार निर्धारित की गई थी:
– Justice V. Bharathidasan (मद्रास हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश) — अध्यक्ष
– Justice R. Suresh Kumar (सेवानिवृत्त न्यायाधीश) — सह-अध्यक्ष
– C. Rajendran (पूर्व IAS अधिकारी) — सदस्य
– Podhu Dikshitars के Secretary — पदेन सदस्य
– HR&CE Department के Secretary — पदेन सदस्य
हाई कोर्ट ने बोर्ड को निम्नलिखित कार्यों से संबंधित जिम्मेदारियां संभालने का आदेश दिया था:
– मंदिर की संपत्तियों का प्रबंधन
– वित्तीय खातों की निगरानी
– विरासत संरक्षण
– प्रशासनिक निर्णय लेना
– अतिक्रमित मंदिर भूमि को वापस प्राप्त करना
– किराये के बकाये की वसूली
– Kanagasabai darshan में श्रद्धालुओं के लिए समान प्रवेश सुनिश्चित करना
### धार्मिक अधिकार बरकरार
महत्वपूर्ण रूप से, हाई कोर्ट ने दैनिक पूजा और समय-समय पर होने वाले उत्सवों सहित धार्मिक और ceremonial कार्यों की जिम्मेदारी Podhu Dikshitars के पास ही रखी थी, बशर्ते वे स्थापित रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुरूप हों।
## Podhu Dikshitars की अपील के आधार
**T.R. Ramesh v. State of Tamil Nadu (SLP(C) No. 039005/2026)** शीर्षक वाली याचिका में उठाया गया मुख्य तर्क भारतीय संविधान के Article 26 के तहत संरक्षण पर केंद्रित है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हाई कोर्ट का आदेश बाहरी हस्तक्षेप के बिना मंदिर के मामलों का प्रबंधन करने के उनके पारंपरिक और संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन करता है।
## अब आगे क्या होगा
सुप्रीम कोर्ट की रोक लागू होने के बाद हाई कोर्ट का आदेश निलंबित रहेगा और अगले आदेश तक Podhu Dikshitars मंदिर के प्रशासन की देखरेख करते रहेंगे।
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