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यूरिया की कीमतें हुईं दोगुनी, भारत ने एक ही टेंडर में रिकॉर्ड 25 लाख टन खाद खरीदा

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Source :- LIVE HINDUSTAN

भारत दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया इंपोर्टर है और हर साल करीब 10 मिलियन टन यूरिया खरीदता है। पश्चिमी तट पर डिलीवरी के लिए 1.5 मिलियन टन यूरिया 935 डॉलर प्रति टन पर खरीदा जाएगा। वहीं पूर्वी तट के लिए 1 मिलियन टन 959 डॉलर प्रति टन पर खरीदा जाएगा।

भारत ने यूरिया का रिकॉर्ड आयात करने का फैसला किया है। नई दिल्ली ने एक ही टेंडर के तहत 2.5 मिलियन मीट्रिक टन ( 25 लाख टन) यूरिया खरीदने पर सहमति जताई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार यह भारत की सालाना आयात जरूरत का करीब एक चौथाई हिस्सा है। यह कीमत दो महीने पहले के मुकाबले लगभग दोगुनी है। विशेषज्ञों का कहना है कि एलएनजी सप्लाई में रुकावट से भारत का यूरिया उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

कितने में हुई खरीद और कौन है खरीदार?

सरकारी कंपनी इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) ने इस डील को अंतिम रूप दिया है। सप्लायर्स ने सबसे कम बोली से मेल खाने पर सहमति जताई, जिससे पूरी मात्रा का कांट्रैक्ट हो सका। रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिमी तट पर डिलीवरी के लिए 1.5 मिलियन टन यूरिया 935 डॉलर प्रति टन पर खरीदा जाएगा। वहीं पूर्वी तट के लिए 1 मिलियन टन 959 डॉलर प्रति टन पर खरीदा जाएगा।

टेंडर में कुल 5.6 मिलियन टन के ऑफर आए थे, लेकिन इनमें से केवल एक सीमित हिस्सा ही सबसे कम कीमत पर था। अधिकांश बोलियां 1,000 डॉलर प्रति टन के करीब थीं, जबकि कुछ 1,136 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई थीं। एक सूत्र के मुताबिक, “कई सप्लायर्स ने पश्चिमी और पूर्वी तट दोनों की सबसे कम बोली से मेल खाने पर सहमति जताई, जिससे 2.5 मिलियन टन की पूरी खरीद संभव हो सकी।”

पिछले टेंडर से कीमतों में भारी उछाल: इससे पहले राष्ट्रीय रसायन और उर्वरक लिमिटेड (RCF) द्वारा जारी टेंडर में बोलियां 500 डॉलर प्रति टन से थोड़ी अधिक थीं। यानी कुछ ही महीनों में कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया इंपोर्टर

भारत दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया इंपोर्टर है और हर साल करीब 10 मिलियन टन यूरिया खरीदता है। यह खरीद अकेले ही इस जरूरत का एक चौथाई पूरा करती है। मुंबई स्थित फर्टीलाइजर इंडस्ट्री के एक अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि भारत की इस बड़ी खरीदारी से दूसरे इंपोर्टर मुश्किल में पड़ सकते हैं, क्योंकि उत्पादकों ने पहले ही मौजूदा टेंडर के तहत अपनी सप्लाई कर दी है।

कब होगी डिलीवरी?

इस सौदे के तहत खरीदा गया यूरिया 14 जून तक रवाना कर दिया जाएगा। इससे पहले की रिपोर्टों में चेतावनी दी गई थी कि खाड़ी देशों में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी के कारण यूरिया की सप्लाई पर संकट आ सकता है। यह खेती में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख खाद है।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है और एलपीजी संकट पैदा कर दिया है, जिससे तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई है। इसका असर कई ऐसे क्षेत्रों पर पड़ रहा है जो पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर निर्भर हैं, जिनमें कृषि भी शामिल है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN