Source :- LIVE HINDUSTAN
नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया की वजह से दुनिया भर में बिर्थ रेट तेजी से गिर रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मोबाइल और डिजिटल लाइफस्टाइल ने लोगों के रिश्ते, सोशल लाइफ और फैमिली प्लानिंग के तरीके को बदल दिया है।
भारत की आबादी से जुड़ी तस्वीर तेजी से बदल रही है। करीब 30 साल पहले भारत में एक महिला औसतन 3.4 बच्चों को जन्म देती थी, लेकिन अब यह संख्या घटकर 2.0 बच्चों तक पहुंच गई है। हालांकि सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में बर्थ रेट तेजी से गिर रहा है। कई देशों में अब एक महिला औसतन दो से भी कम बच्चों को जन्म दे रही है। कुछ जगहों पर तो हालात ऐसे हैं कि ज्यादातर महिलाएं बच्चे पैदा ही नहीं कर रहीं। अब एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया भी इस गिरते बर्थ रेट की बड़ी वजह हैं।
दुनिया भर में बर्थ रेट यानी बच्चों के जन्म की दर लगातार कम होती जा रही है। कई देश अब इस गिरावट को लेकर चिंता जता रहे हैं, क्योंकि आने वाले समय में इसका असर अर्थव्यवस्था, नौकरी बाजार और बुजुर्ग आबादी पर पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक लोग अब पहले की तुलना में ज्यादा समय मोबाइल और सोशल मीडिया पर बिताने लगे हैं। इससे आमने-सामने मिलने, दोस्ती करने और रिश्ते बनाने का समय कम हो रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यही वजह है कि शादी और बच्चों की प्लानिंग भी लगातार टल रही है।
कई रिसर्च में यह भी पाया गया कि जिन देशों में हाई-स्पीड मोबाइल इंटरनेट और स्मार्टफोन तेजी से पहुंचे, वहां बर्थ रेट में गिरावट भी तेजी से देखने को मिली। हालांकि एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि महंगाई, नौकरी का दबाव और बदलती लाइफस्टाइल भी इसके पीछे अहम कारण हैं।
दुनिया भर में क्यों घट रहा बर्थ रेट
पिछले कुछ सालों में अमेरिका, यूरोप, जापान, चीन और कई दूसरे देशों में बर्थ रेट तेजी से गिरी है। कई देशों में अब औसत बच्चों की संख्या “Replacement Level” से भी नीचे पहुंच चुकी है। पहले माना जाता था कि ज्यादा पढ़ाई, नौकरी और महंगाई की वजह से लोग कम बच्चे पैदा कर रहे हैं। लेकिन अब नई रिसर्च में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया को भी बड़ी वजह माना जा रहा है।
Smartphone को माना जा रहा बड़ी वजह
रिपोर्ट्स के मुताबिक आज की युवा पीढ़ी पहले की तुलना में ज्यादा समय स्क्रीन पर बिताती है। लोग घंटों सोशल मीडिया, वीडियो ऐप्स, गेमिंग और चैटिंग में व्यस्त रहते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे आमने-सामने मिलने और रिश्ते बनाने का समय कम हो गया है। कई लोग डिजिटल दुनिया में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि उनकी सोशल लाइफ कमजोर होने लगती है। रिपोर्ट में कहा गया कि स्मार्टफोन ने real-world interaction को काफी कम कर दिया है और इसका असर रिश्तों और परिवार बनाने के फैसलों पर पड़ रहा है।
युवाओं पर सबसे ज्यादा असर
रिसर्च में पाया गया कि युवा वर्ग में यह असर सबसे ज्यादा देखने को मिला है। अमेरिका में 2007 के बाद Teen Fertility Rate में करीब 71% की गिरावट दर्ज की गई। रिसर्चर्स का कहना है कि यही समय था जब स्मार्टफोन और हाई-स्पीड मोबाइल इंटरनेट तेजी से लोकप्रिय हुए। कई देशों में भी ऐसा ही पैटर्न देखने को मिला। जहां स्मार्टफोन तेजी से पहुंचे, वहां बर्थ रेट भी तेजी से नीचे गई।
Social Media बदल रहा रिश्तों को
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोशल मीडिया ने लोगों की सोच और रिश्तों के तरीके को बदल दिया है। आज लोग असली जिंदगी की बजाय ऑनलाइन दुनिया में ज्यादा समय बिताते हैं। डेटिंग ऐप्स और सोशल मीडिया ने लोगों की एक्सपेक्टेशन भी बदल दी हैं। कई लोग अब रिश्तों को लेकर ज्यादा कंफ्यूज या सेलेक्टिव हो गए हैं। इससे लंबे रिश्ते और शादी जैसी चीजें देर से हो रही हैं। एक्सपर्ट्स साफ कहते हैं कि सिर्फ Smartphone को पूरी तरह जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। Reddit और सोशल मीडिया पर भी कई यूजर्स ने कहा कि आज के समय में घर खरीदना और बच्चों की परवरिश करना काफी महंगा हो चुका है।
SOURCE : LIVE HINDUSTAN



