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₹8000 महंगी हुई चांदी, सोने के दाम में तगड़ी तेजी, चेक करें लेटेस्ट भाव

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Source :- LIVE HINDUSTAN

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के शुल्क के खिलाफ अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद बढ़ती वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं के बीच मजबूत सुरक्षित-निवेश की मांग के कारण सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

Gold Silver Price: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के शुल्क के खिलाफ अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद बढ़ती वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं के बीच मजबूत सुरक्षित-निवेश की मांग के कारण सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इस दौरान चांदी 2.7 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई जबकि सोना 1.6 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

क्या है डिटेल

अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, चांदी शुक्रवार के 2,64,000 रुपये प्रति किलोग्राम के बंद स्तर से 8,000 रुपये या 3.03 प्रतिशत चढ़कर 2,72,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) हो गई। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना भी 3,300 रुपये या 2.06 प्रतिशत बढ़कर 1,62,800 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गया। पिछले बाजार सत्र में यह 1,59,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।

एक्सपर्ट की राय

चांदी और सोने में सोमवार को तेजी की गति बनी रही। दोनों धातुएं तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर पर कारोबार कर रही थीं, जिसे नए सिरे से सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने का समर्थन मिला। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा कि यह तेजी, ट्रंप के शुल्क के खिलाफ अमेरिकी अदालत के ऐतिहासिक फैसले के बाद आई। फैसले के जवाब में, अमेरिकी राष्ट्रपति ने शनिवार को वैश्विक शुल्क दर को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की घोषणा करके अपने व्यापार एजेंडा को बनाए रखने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाया। गांधी ने कहा कि अचानक नीतिगत बदलाव ने वैश्विक अनिश्चितता को बढ़ा दिया है, दुनिया भर में कई सरकारें सावधानीपूर्वक प्रतिक्रिया दे रही हैं – कुछ व्यापार समझौतों की पुष्टि कर रही हैं, जबकि अन्य अमेरिका के अगले कदम की प्रतीक्षा कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर चांदी 1.79 या 2.2 प्रतिशत बढ़कर 86.50 डॉलर प्रति औंस हो गई, जबकि सोना लगभग एक प्रतिशत बढ़कर 5,151 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के जिंस शोघ के प्रमुख हरेश वी ने कहा, ”शुल्क और उनकी वैधता को लेकर अनिश्चितता के बीच सोने की कीमतें बढ़ी हैं। भले ही अदालत शुल्क को अमान्य मानता है, लेकिन चल रहा व्यापार तनाव अभी भी डॉलर पर दबाव डाल सकता है और सर्राफा को समर्थन दे सकते है।”

सोने के आयात पर कड़ी नजर- वित्त मंत्री

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों की भारी खरीदारी के कारण सोने की कीमतों में तेजी आई है। उन्होंने कहा कि सरकार एवं भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) सोने के आयात पर कड़ी नजर रखे हुए हैं, हालांकि स्थिति अभी ”चिंताजनक स्तर” पर नहीं पहुंची है। भारत का सोना आयात अप्रैल-दिसंबर, 2025 के दौरान मूल्य के लिहाज से लगभग एक अरब डॉलर बढ़कर 50 अरब डॉलर हो गया। वहीं जनवरी में सोने के आयात के मूल्य और मात्रा, दोनों में अचानक वृद्धि देखी गई है जिसकी समीक्षा केंद्रीय बैंक कर रहा है। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि अप्रैल-दिसंबर, 2025 के दौरान कीमतों में वृद्धि को आयातित सोने की मात्रा में कमी ने काफी हद तक संतुलित कर दिया था। उन्होंने कहा, ” केवल जनवरी में मूल्य व मात्रा दोनों में अचानक उछाल आया है। हम इन आंकड़ों का विश्लेषण कर रहे हैं। मांग में मौसमी उतार-चढ़ाव भी रहता है। “

सीतारमण ने कहा कि भारत में सोना हमेशा से घरेलू निवेशकों के लिए पसंदीदा निवेश रहा है, चाहे संपत्ति के रूप में हो या आभूषण के तौर पर। घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत, सोने का शुद्ध आयातक है। उन्होंने कहा, ” हम इस पर नजर रखे हुए हैं। भारत में सोने में निवेश और खरीदारी की प्रवृत्ति को देखते हुए यह अभी चिंताजनक स्तर तक नहीं पहुंचा है। आरबीआई भी इस पर नजर रखेगा।”

आरबीआई निदेशक मंडल को संबोधित करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में सीतारमण ने कहा कि भारत में घरेलू खपत के लिए सोने की मांग परंपरागत रूप से त्योहारों के मौसम, अक्षय तृतीया आदि के दौरान बढ़ जाती है। इसके अलावा, आज अधिकतर देशों के केंद्रीय बैंक सोना और चांदी खरीद रहे हैं और उनका भंडारण कर रहे हैं। मल्होत्रा ने कहा कि अप्रैल-दिसंबर, 2025 के दौरान कीमतों में वृद्धि को आयातित सोने की मात्रा में कमी ने कमोबेश संतुलित कर दिया था। मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई इस स्थिति को लेकर “अनावश्यक रूप से चिंतित” नहीं है, क्योंकि भारत का बाह्य क्षेत्र मजबूत है। उन्होंने कहा, ” चालू खाते का घाटा (कैड) हमारे अनुमानों के अनुसार सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के करीब एक प्रतिशत के दायरे में है, जो प्रबंधनीय है।”

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