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₹3 से कम के शेयर वाली कंपनी पर अडानी का दांव, अब वेदांता ने NCLAT का खटखटाया दरवाजा- जानिए मामला

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Source :- LIVE HINDUSTAN

कंपनी ने गौतम अडानी की अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड द्वारा जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड Ltd (JAL) के लिए लगाए गए ₹14,543 करोड़ के रिजॉल्यूशन प्लान को चुनौती दी है।

अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाली वेदांता लिमिटेड ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) का दरवाजा खटखटाया है। कंपनी ने गौतम अडानी की अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड द्वारा जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड Ltd (JAL) के लिए लगाए गए ₹14,543 करोड़ के रिजॉल्यूशन प्लान को चुनौती दी है। यह मामला अब सोमवार को NCLAT की बेंच, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस अशोक भूषण कर रहे हैं, के सामने सुनवाई के लिए आ सकता है। जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के शेयर वर्तमान में 2.42 रुपये पर हैं। इसमें अंतिम बार ट्रेडिंग 17 मार्च को हुई थी।

क्या है डिटेल

दरअसल, 17 मार्च को राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) की इलाहाबाद बेंच ने कर्जदाताओं (CoC) के फैसले को सही ठहराते हुए अडानी एंटरप्राइजेज के प्लान को मंजूरी दे दी थी और वेदांता की आपत्ति खारिज कर दी थी। इसके बाद वेदांता ने इस फैसले को ‘कमर्शियल साजिश’ बताते हुए ऊपरी अदालत में चुनौती दी है। कंपनी का कहना है कि पूरे प्रोसेस में वैल्यू मैक्सिमाइजेशन के सिद्धांत का पालन नहीं हुआ।

वेदांता का क्या है दावा

वेदांता का दावा है कि उसने नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) के आधार पर ₹12,505.85 करोड़ की सबसे ऊंची बोली लगाई थी। इसके बावजूद कर्जदाताओं ने एक ऐसा प्लान चुन लिया, जो उसके मुताबिक कुल वैल्यू में करीब ₹3,400 करोड़ और NPV में लगभग ₹500 करोड़ कम था। कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि उसे अपनी बोली स्पष्ट करने का पर्याप्त मौका नहीं दिया गया और प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं थी।

क्या है मामला

इतना ही नहीं, वेदांता ने नवंबर 2025 में अपनी बोली को और बेहतर करते हुए लगभग ₹6,563 करोड़ का अपफ्रंट कैश और ₹800 करोड़ का इक्विटी इन्फ्यूजन देने का प्रस्ताव भी दिया था। कंपनी का कहना है कि इससे कर्जदाताओं की रिकवरी ज्यादा हो सकती थी, इसलिए इस संशोधित ऑफर पर विचार किया जाना चाहिए था। लेकिन कर्जदाताओं ने इसे यह कहकर खारिज कर दिया कि यह बोली तय समय सीमा के बाद आई थी।

वहीं, कर्जदाताओं की समिति (CoC) ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि प्रक्रिया पूरी तरह IBC के नियमों के तहत हुई है। उनका कहना है कि सिर्फ सबसे ऊंची बोली ही जीत तय नहीं करती, बल्कि अपफ्रंट पेमेंट, प्लान की व्यवहारिकता और समयसीमा जैसे कई फैक्टर देखे जाते हैं। अडानी का प्लान करीब ₹6,000 करोड़ तुरंत देने और दो साल में भुगतान पूरा करने की बात करता है, जबकि वेदांता का भुगतान 5 साल तक फैला हुआ था।

इस पूरे मामले में कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि NCLAT आमतौर पर कर्जदाताओं के ‘कमर्शियल विजडम’ में दखल नहीं देता, जब तक कोई साफ कानूनी खामी न हो। JAL के इस बड़े डील में करीब 93.8% कर्जदाताओं ने अडानी के प्लान के पक्ष में वोट किया है। कंपनी के पास नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास करीब 4,000 एकड़ जमीन, बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट्स और कमर्शियल एसेट्स हैं, जिससे यह डील रियल एस्टेट सेक्टर में काफी अहम मानी जा रही है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN