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शनिवार को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अगुवाई में एक कूटनीतिक टीम ने ईरान के साथ अमेरिका की जंग ख़त्म करने के लिए समझौता करने की कोशिश की, लेकिन वह नाकाम रही.
इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अगला कदम तय करना पड़ा. और उनका फ़ैसला रविवार सुबह ट्रुथ सोशल पर की गई सिलसिलेवार पोस्ट में सामने आया.
उन्होंने लिखा कि अमेरिका ईरान का ‘नेवी ब्लॉकेड’ करेगा. उन्होंने कहा, “जो कोई भी होर्मुज़ स्ट्रेट में गैरक़ानूनी टोल देगा, उसे खुले समुद्र में सुरक्षित रास्ता नहीं मिलेगा.”
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों के जहाज़ों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए होर्मुज़ स्ट्रेट से बारूदी सुरंगों को हटाना जारी रखेगा. उन्होंने कहा कि, ‘अमेरिकी सेना सही समय पर ईरान के ख़िलाफ़ हमले फिर से शुरू करने के लिए तैयार है.’
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ट्रंप ने आगे कहा कि इस्लामाबाद में 20 घंटे चली बातचीत में कुछ प्रगति हुई, लेकिन ईरान ने अमेरिका की उस मांग को नहीं माना जिसमें उससे अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने के लिए कहा गया था.
हालांकि, वेंस की बातचीत से जुड़े एक अमेरिकी अधिकारी ने इस दावे को कुछ हद तक ख़ारिज़ किया. उनके मुताबिक़ ईरान से बातचीत में सिर्फ़ इसी बात पर ही गतिरोध नहीं हुआ बल्कि असहमतियों की एक लंबी सूची थी-जिसमें होर्मुज़ पर ईरान का नियंत्रण और इलाक़े के प्रॉक्सी संगठनों को उसका समर्थन भी शामिल है, जैसे यमन में हूती विद्रोही और लेबनान में हिज़्बुल्लाह.
क्या ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना पर ख़तरे को बढ़ा दिया है?
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ट्रंप की हालिया पोस्ट्स में पिछले हफ्ते की तरह विनाशकारी धमकियों का लहज़ा नहीं था, लेकिन उन्होंने अमेरिकी पक्ष के लिए कई नई चुनौतियां और जोखिम खड़े कर दिए हैं.
क्या समुद्री बारूदी सुरंग हटाने की कार्रवाई अमेरिकी नेवी के जहाज़ों पर ईरानी हमलों के खतरे को बढ़ाएगी? अमेरिका यह कैसे तय करेगा कि किसने ईरान को टोल दिया?
क्या अमेरिका उन विदेशी जहाज़ों के ख़िलाफ़ बल प्रयोग करेगा जो अमेरिकी नेवी के ब्लॉकेड को नज़रअंदाज करेंगे? ईरानी तेल पर निर्भर चीन जैसे देशों की प्रतिक्रिया क्या होगी? क्या यह कदम, जिसका मक़सद ईरान की मुख्य आमदनी के स्रोत को रोकना है, तेल की क़ीमतों को और बढ़ा देगा?
इन सवालों के जवाब साफ़ नहीं हैं.
रविवार को बाद में अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने घोषणा की कि नौसैनिक नाकाबंदी ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले सभी जहाज़ों को रोक देगी. यह ट्रंप के पहले प्रस्ताव से अलग है.
सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी में डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ सदस्य और वर्जीनिया के सीनेटर मार्क वॉर्नर ने सीएनएन से कहा, “मुझे समझ नहीं आता कि स्ट्रेट की नाकाबंदी कैसे ईरान को इसे खोलने के लिए मजबूर करेगी.”
सीबीएस के कार्यक्रम फ़ेस द नेशन में पिछले साल तक हाउस इंटेलिजेंस कमेटी के अध्यक्ष रहे ओहायो के रिपब्लिकन सांसद माइक टर्नर ने कहा कि नाकाबंदी होर्मुज़ की मौजूदा स्थिति का समाधान निकालने का एक तरीक़ा है.
उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति यह कहकर कि हम उन्हें यह तय नहीं करने देंगे कि कौन गुजर सकता है, अपने सभी सहयोगियों और बाकी देशों को बातचीत की मेज पर ला रहे हैं. इस मुद्दे को सुलझाना ज़रूरी है.”
ट्रंप के सामने विकल्प
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पिछले हफ्ते, जब ईरान और अमेरिका ने दो हफ़्ते के संघर्षविराम और आमने-सामने की बातचीत पर सहमति जताई, उससे पहले ट्रंप ख़ुद को मुश्किल स्थिति में पा रहे थे.
वह अमेरिका के हमलों को और बढ़ा सकते थे, जिससे ईरान के नागरिक ढांचे को लंबे समय के लिए नुक़सान हो सकता था, मानवीय संकट गहरा सकता था और वैश्विक अर्थव्यवस्था और अस्थिर हो सकती थी.
या फिर वह इस जंग से पीछे हट सकते थे. इस जंग का मुद्दा अमेरिकी जनता के बीच वैसे भी लोकप्रिय नहीं रहा और अब उनके कुछ समर्थकों को भी निराश कर रहा है, जिन्होंने उनसे लंबे चलने वाले विदेशी युद्धों और मध्य पूर्व के उलझाव से बचने का वादा सुना था.
सीबीएस के एक नए सर्वे के अनुसार, ज्यादातर अमेरिकी (59%) मानते हैं कि यह जंग अमेरिका के लिए कुछ हद तक या बहुत ख़राब जा रहा है.
कई लोगों का मानना है कि अमेरिका के मुख्य लक्ष्य, जैसे होर्मुज़ स्ट्रेट को खुला रखना, ईरानी लोगों को ज़्यादा आज़ादी दिलाना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को स्थायी रूप से ख़त्म करना, अब तक पूरे नहीं हुए हैं.
दोनों पार्टियों के भारी बहुमत का मानना है कि इन लक्ष्यों को हासिल करना अमेरिका के लिए ज़रूरी है.
क़रीब एक हफ़्ता बीत चुका है और अमेरिका की जीत के दावों के बावजूद राष्ट्रपति के सामने खड़ी चुनौतियां नहीं बदली हैं.
ट्रंप के दांव की क़ीमत उनकी पार्टी को चुकानी पड़ सकती है
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रविवार सुबह फॉक्स न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अंत में ईरान अमेरिका को ‘सब कुछ’ देगा जो वह चाहता है. उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले महीनों में तेल की क़ीमतें स्थिर रह सकती हैं या बढ़ सकती हैं, लेकिन उनका मानना है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था टिकाऊ बनी रहेगी.
कम से कम कहें तो यह एक दांव है.
और नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में अगर वह ग़लत साबित होते हैं तो उनकी रिपब्लिकन पार्टी को चुनाव में भारी नुक़सान उठाना पड़ सकता है.
शनिवार रात, जब उनके उपराष्ट्रपति पाकिस्तान में ईरानियों के साथ बातचीत कर रहे थे, ट्रंप मियामी पहुंचे, जहां उन्होंने यूएफ़सी (अल्टीमेट फ़ाइटिंग चैंपियनशिप) के मुकाबले देखे, जिनमें फ़ाइटर एक-दूसरे पर जोरदार हमले कर रहे थे. ये एक मिक्स्ड मार्शल आर्ट प्रतियोगिता होती है.
मौजूद प्रेस सदस्यों के अनुसार, यह एक अजीब दृश्य था.
अमेरिका के राष्ट्रपति रिंग में हिंसक मुकाबलों को देख रहे थे, मशहूर हस्तियों से बात कर रहे थे और कभी-कभी अपने विदेश मंत्री मार्को रुबियो और अन्य सलाहकारों के साथ गहन चर्चा में लगे थे, वह भी हज़ारों दर्शकों के सामने.
अल्टीमेट फ़ाइटिंग केज मुकाबले, बहुत आक्रामकता के साथ होते हैं. लेकिन तय नियमों और समय सीमा के भीतर होते हैं और उनका अंत एक स्पष्ट विजेता और हारने वाले के साथ होता है.
लेकिन ईरान युद्ध में इस सवाल का जवाब शायद ही मिले, क्योंकि यह अपने दूसरे महीने में पहुंच रहा है और मौजूदा दो हफ़्ते का संघर्षविराम टूटने के कगार पर है.
यह संघर्ष अब इच्छाशक्ति की परीक्षा बन गया है. एक तरफ़ लगातार अमेरिका और इसराइल के हमलों को झेलने की ईरान की क्षमता, और दूसरी तरफ इस जंग से पैदा हुए आर्थिक और राजनीतिक दबाव को सहने की ट्रंप की क्षमता.
अंत में, इस लड़ाई में शामिल सभी पक्ष कमजोर पड़ सकते हैं.
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