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हजारों करोड़ रुपये खर्च करके चांद पर फिर क्यों जाना चाहता है NASA? मेगा प्लान आया सामने

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Source :- LIVE HINDUSTAN

नासा अब गहरे सौर मंडल में जाना चाहता है। चंद्रमा अगला कदम है क्योंकि मार्स की तुलना में वहां संभव है। 2017 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकारी आदेश के बाद यह कार्यक्रम शुरू हुआ और राजनीतिक समर्थन के कारण आगे बढ़ रहा है।

नासा 1969 में अपोलो मिशन के तहत चंद्रमा पर मानव को उतारने में सफल रहा था। उस समय अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध के दौरान स्पेस रेस चल रही थी। अपोलो 11 की सफल लैंडिंग ने यूएस को वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने में मदद की। अब नासा आर्टेमिस प्रोग्राम के तहत चंद्रमा पर वापसी कर रहा है। इस प्रोजेक्ट पर लगभग 100 बिलियन डॉलर (करीब 8300 अरब रुपये) खर्च करने की योजना है। 1 अप्रैल को चार सदस्यीय क्रू को चंद्रमा की परिक्रमा कराने वाला मिशन शुरू होने वाला है।

दशक के अंत तक चंद्रमा पर लैंडिंग का प्रयास है। लेकिन सवाल यह है कि पहले ही चंद्रमा पर पहुंच चुके नासा को दोबारा वहां जाने की जरूरत क्यों पड़ रही है? इसका जवाब अलग-अलग लोगों के अनुसार अलग-अलग है। कुछ इसे चीन के साथ नई स्पेस रेस मानते हैं, तो कुछ सस्टेनेबल एक्सप्लोरेशन और लूनर बेस बनाने से जोड़ते हैं। आर्टेमिस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य स्पष्ट नहीं है जैसा अपोलो का था। प्लैनेटरी सोसाइटी के स्पेस पॉलिसी चीफ केसी ड्रेयर के अनुसार, मानव स्पेसफ्लाइट हमेशा से नासा की पहचान का हिस्सा रहा है। अपोलो के बाद स्पेस शटल और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन जैसे प्रोजेक्ट्स लो-अर्थ ऑर्बिट तक सीमित रहे।

NASA का क्या है पूरा प्लान

नासा अब गहरे सौर मंडल में जाना चाहता है। चंद्रमा अगला कदम है क्योंकि मार्स की तुलना में वहां पहुंचना मौजूदा तकनीक से संभव है। 2017 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकारी आदेश के बाद यह कार्यक्रम शुरू हुआ और राजनीतिक समर्थन के कारण आगे बढ़ रहा है। पूर्व नासा उप प्रशासक लोरी गार्वर कहती हैं कि हम चंद्रमा पर वापस जाना चाहते थे और अब तकनीक हमें वहां पहुंचने लायक बना रही है। आर्टेमिस के जरिए नासा चंद्रमा पर बेस बनाने, वैज्ञानिक प्रयोग करने और मार्स मिशन की तैयारी करना चाहता है।

चंद्रमा पर पानी की बर्फ और खनिज संसाधनों का उपयोग करके लूनर इकोनॉमी विकसित करने की भी योजना है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के क्लेटन स्वोप के अनुसार, भविष्य में स्पेस इकोनॉमी पृथ्वी से परे होगी। चंद्रमा के संसाधन आगे के मिशनों को सस्टेन करने में मदद करेंगे। मंगल ग्रह हमेशा नासा की नजर में रहा है, लेकिन चंद्रमा पर अनुभव हासिल करके ही मार्स पर बस्ती बसाना संभव होगा। आर्टेमिस मिशन चंद्रमा पर डेटा इकट्ठा करने, प्रयोग करने और लंबे समय तक रहने की क्षमता विकसित करने पर केंद्रित हैं। नासा ने हाल ही में लूनर आउटपोस्ट का डिजाइन भी जारी किया है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN