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अपडेटेड 2 घंटे पहले
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ईरान के नए नेता के रूप में मोजतबा खामेनेई का पहला संदेश ईरानी टेलीविजन पर प्रसारित किया गया है. एंकर ने ख़ामेनेई का संदेश टीवी चैनल पर पढ़कर सुनाया.
ख़ामेनेई ने संदेश में ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज की नाकाबंदी जारी रखने’ और ‘मिनाब स्कूल के बच्चों सहित शहीद हुए लोगों के खून का बदला लेने’ पर ज़ोर दिया.
इसके अलावा मोजतबा खामेनेई ने कहा कि उन्हें “इस्लामिक गणराज्य के टेलीविजन के माध्यम से नेता के रूप में उनके चुनाव पर विशेषज्ञों की सभा के मतदान के परिणाम के बारे में सूचित किया गया था.”
अमेरिका और इसराइल के ईरान के साथ चल रहे युद्ध का जिक्र करते हुए ख़ामेनेई ने लगातार हमले जारी रखने का आह्वान किया.
उन्होंने कहा, “अन्य मोर्चों को खोलने के संबंध में विचार किया जा रहा है, जहां दुश्मन को कम अनुभव है.”
इसके अलावा उन्होंने यमन में ईरान के सहयोगियों, लेबनान में हिजबुल्लाह और इराक में रेजिस्टेंस की तारीफ़ की.
इस हफ़्ते सोमवार को विशेषज्ञों की सभा ने उन्हें ईरान के इस्लामी गणराज्य के तीसरे नेता के रूप में पेश किया.
ईरान की न्यायपालिका, सुरक्षा और सैन्य तंत्र सहित सभी संस्थानों ने उनके चुनाव का स्वागत किया है और उनके प्रति “निष्ठा” की शपथ ली है.
ख़ामेनेई का यह संदेश उनके स्वास्थ्य और शारीरिक स्थिति को लेकर चल रही अटकलों के बीच आया है.
इससे पहले, साइप्रस में ईरान के राजदूत अलीरेज़ा सलारियन ने ब्रिटिश अखबार द गार्डियन को बताया था, “मैंने सुना है कि उनके पैर, हाथ और बाजू घायल हैं…मुझे लगता है कि वे चोट के कारण अस्पताल में भर्ती हैं.”
सलारियन ने गार्डियन को बताया था, “मुझे नहीं लगता कि वे किसी भी परिस्थिति में भाषण देने में सहज महसूस करेंगे.”
सुप्रीम लीडर के पहले बयान का आकलन
घोंचेह हबीबीज़ाद
वरिष्ठ रिपोर्टर, बीबीसी पर्शियन
मोजतबा ख़ामेनेई को 8 मार्च को ईरान का नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया.
वह अपने पिता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के उत्तराधिकारी हैं. अली ख़ामेनेई की 28 फ़रवरी को अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के पहले दिन मौत हो गई थी.
नियुक्ति के बाद से मोजतबा ख़ामेनेई सरकारी टीवी पर दिखाई नहीं दिए हैं. उनका संदेश टीवी एंकर ने पढ़कर सुनाया.
मोजतबा, अली ख़ामेनेई के दूसरे बेटे हैं. लंबे समय से उन्हें उनके उत्तराधिकारी के प्रमुख दावेदारों में माना जाता रहा है. हालांकि वह सार्वजनिक रूप से कम सामने आते रहे हैं और पर्दे के पीछे से प्रभाव रखने वाले व्यक्ति के रूप में देखे जाते हैं.
अमेरिका और इसराइल के हमलों में उनके पिता के अलावा मोजतबा ख़ामेनेई की मां और पत्नी की भी मौत हो गई.
ईरान के सरकारी टीवी न्यूज़ चैनल ने उन्हें “युद्ध का अनुभवी” बताया है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वह घायल हुए हैं या नहीं.
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक अज्ञात ईरानी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि वह “हल्के घायल” हुए हैं.
कौन है मोजतबा ख़ामेनेई
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8 सितंबर 1969 को ईरान के उत्तर पूर्वी शहर मशहद में जन्मे मोजतबा, ख़ामेनेई के छह बच्चों में दूसरे स्थान पर हैं. उन्होंने तेहरान के धार्मिक ‘अलावी स्कूल’ से माध्यमिक शिक्षा ली है.
ईरानी मीडिया के मुताबिक, 17 साल की उम्र में मोजतबा ने ईरान-इराक़ युद्ध के दौरान कुछ छोटे-छोटे अंतरालों में सेना में सेवा दी. इस युद्ध में पश्चिमी देशों ने खुलकर इराक़ का समर्थन किया था. इससे ईरान का अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रति अविश्वास और गहराया था.
1999 में, मोजतबा अपनी धार्मिक पढ़ाई जारी रखने के लिए क़ुम गए. यह एक पवित्र शहर है और शिया धर्मशास्त्र के अध्ययन का प्रमुख केंद्र माना जाता है.
इस समय तक उन्होंने कभी धार्मिक वस्त्र नहीं पहने थे, और यह भी साफ़ नहीं है कि वह 30 साल की उम्र में पढ़ने के लिए मदरसे क्यों गए, क्योंकि आमतौर पर यह पढ़ाई कम उम्र में शुरू की जाती है.
मोजतबा अब भी एक मध्य स्तर के धर्मगुरु हैं, जो उनके सर्वोच्च नेता बनने की राह में एक बाधा बन सकता है.
पिछले दिनों ईरान में सत्ता केंद्रों से जुड़े कुछ मीडिया संस्थानों और अधिकारियों ने मोजतबा ख़ामेनेई को ‘आयतुल्लाह’ कहकर संबोधित करना शुरू किया है. कुछ पर्यवेक्षकों को यह बदलाव उनके धार्मिक कद को ऊँचा दिखाने और उन्हें देश के सर्वोच्च नेतृत्व की दौड़ में एक भरोसेमंद उम्मीदवार के तौर पर पेश करने की कोशिश जैसा लगता है.
मदरसों की व्यवस्था में ‘आयतुल्लाह’ की पदवी होना और बड़ी धार्मिक कक्षाओं को पढ़ाना किसी व्यक्ति की विद्वत क्षमता और ज्ञान का प्रमाण माना जाता है. ये भविष्य में नेता चुने जाने की आवश्यक शर्तों में से एक है.
लेकिन यह पहली बार नहीं होगा.
1989 में जब अली ख़ामेनेई दूसरे सर्वोच्च नेता बने थे, तब उन्हें भी बहुत जल्दी ‘आयतुल्लाह’ का दर्जा दे दिया गया था.
कैसी है उनकी छवि
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राजनीतिक रूप से, ख़ामेनेई दो प्रमुख हस्तियों के क़रीबी हैं, जो ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े हुए हैं और उसमें प्रमुख भूमिका भी निभाते हैं.
इन दो लोगों में सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के वरिष्ठ नेता अली लारिजानी और पूर्व सैन्य अधिकारी मोहम्मद बाकर क़ालिबाफ भी शामिल हैं. मोहम्मद बाकर फिलहाल संसद के स्पीकर हैं.
दिवंगत आयतुल्लाह के मित्र और सहयोगी होने के नाते इन लोगों को पिछले कुछ महीनों में उच्च स्तरीय योजना में बड़ी ज़िम्मेदारियां संभालने के लिए चुना गया था.
इसमें क़तर की मध्यस्थता में ट्रंप के दूतों के साथ बातचीत करना भी शामिल था. इसके अलावा इनके जिम्मे ईरान के दुश्मनों की सैन्य और ख़ुफ़िया शक्ति से निपटने की तैयारी करना भी शामिल था.
पिछले महीने ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते को सुरक्षित करने के लिए हुई असफल वार्ता के दौरान लारिजानी से मिलने वाले एक पश्चिमी देश के अधिकारी ने उन्हें एक व्यावहारिक व्यक्ति के रूप में वर्णित किया था.
ईरान में इस समय कट्टरपंथी लोग प्रमुख भूमिका में आ रहे हैं.
ख़ामेनेई के नज़दीकी राजनेता अब्दुलरेज़ा दावारी ने कुछ सार्वजनिक बयानों में और ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ को दिए एक इंटरव्यू में उन्हें ‘अति उदारवादी’ और ऐसे व्यक्ति के तौर पर परिभाषित किया था, जो ‘कट्टरपंथियों को साइडलाइन करने वाले’ हैं.
उन्होंने मोजतबा को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का ईरानी वर्ज़न बताया था, जिन्होंने सऊदी अरब में अपने कठोर शासन को बनाए रखते हुए सामाजिक स्वतंत्रता को भी बढ़ावा दिया है.
लेकिन इस तरह के बड़े बदलाव के अभी कोई संकेत नहीं हैं, खासकर इन ख़तरनाक और अनिश्चितता भरे दिनों में तो बिल्कुल भी नहीं.
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