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सीजफायर नहीं, अब घातक प्रहार; डोनाल्ड ट्रंप मिडिल-ईस्ट क्यों भेजने जा रहे यूक्रेन वाले हथियार? क्या प्लान

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिका अपनी सैन्य प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव करते हुए यूक्रेन के लिए तय हथियारों को पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र में भेजने पर विचार कर रहा है। इसका सीधा असर एक तरफ रूस के खिलाफ चल रहे यूक्रेन युद्ध पर पड़ सकता है।

अमेरिका और ईरान के बीच करीब एक महीने से जारी जंग का असर अब वैश्विक स्तर पर दिखने लगा है। खुद अमेरिका को भी इस युद्ध की भारी कीमत चुकानी पड़ी है। युद्ध के शुरुआती दो हफ्तों में ही कम से कम 12 अरब डॉलर खर्च कर दिए हैं। बावजूद इसके उसके हाथ कुछ खास हासिल नहीं हो पाया है। इन सबके बीच ऐसी खबरें आ रही हैं कि अमेरिका उन हथियारों को अब पश्चिम एशिया/मध्य पूर्व क्षेत्र में चल रहे संघर्ष की ओर भेजने पर विचार कर रही है, जो असल में यूक्रेन को रूस के खिलाफ अपनी रक्षा के लिए दिए जाने थे।

वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट्स के मुताबिक संयुक्त राज्य अमेरिका अपनी सैन्य प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव करते हुए यूक्रेन के लिए तय हथियारों को पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र में भेजने पर विचार कर रहा है। इसका सीधा असर एक तरफ रूस के खिलाफ चल रहे यूक्रेन युद्ध पर पड़ सकता है, तो दूसरी तरफ ईरान युद्ध और गहरा सकता है। अमेरिका पहले के मुकाबले और घातक प्रहार ईरान पर कर सकता है। ये कवायद ऐसे समय में सामने आई है, जब ईरान संग सीजफायर की संभावनाएं लगभग खत्म होती दिख रही हैं।

किन हथियारों को भेजने की योजना?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हथियारों को यूक्रेन की बजाय मिडिल-ईस्ट भेजने की संभावित योजना में एयर डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल पैट्रियट और टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) जैसे खास सिस्टम में होता है। अमेरिका ने इन मिसाइलों का ऑर्डर संबंधित कंपनियों को अपनी ‘प्रायोरिटाइज़्ड यूक्रेन रिक्वायरमेंट्स लिस्ट’ (PURL) के जरिए दिया था। यह NATO के नेतृत्व वाला एक कार्यक्रम है, जिसके तहत यूरोपीय देश इन अमेरिकी हथियारों की कीमत चुकाते हैं ताकि उन्हें कीव (यूक्रेन) भेजा जा सके।

अमेरिकी नीति में क्यों ये बदलाव?

अमेरिका और इजरायल वर्तमान में ईरान के खिलाफ “Operation Epic Fury” चला रहे हैं, जिसमें अब तक ईरान के अंदर 9,000 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इस सघन सैन्य अभियान के कारण अमेरिका के अपने हथियारों के भंडार, विशेष रूप से एयर डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलों में भारी कमी आई है। इस वजह से अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) इस समय गंभीर दुविधा में है। एक तरफ यूक्रेन को सैन्य सहायता जारी रखने का दबाव है, तो दूसरी तरफ ईरान के साथ युद्ध में तेजी से खत्म हो रहे हथियारों का संकट।

क्या हो रहा है?

दूसरी तरफ, यह भी कहा जा रहा है कि ऐसा कर राष्ट्रपति ट्रंप का प्रशासन यूक्रेन पर रूस के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए दबाव बना रहा है। खबरों के अनुसार, अमेरिका ने सुरक्षा गारंटी के बदले यूक्रेन को डोनबास (Donbas) क्षेत्र रूस को सौंपने का प्रस्ताव दिया है ताकि मध्य पूर्व के संघर्ष पर ध्यान केंद्रित किया जा सके। इतना ही नहीं, अमेरिका ने यूक्रेन से ईरानी ड्रोनों से निपटने के लिए उनके विशेषज्ञों की मदद मांगी है। इसके बदले में यूक्रेन को उम्मीद है कि उन्हें और अधिक पश्चिमी इंटरसेप्टर मिसाइलें मिलेंगी, हालांकि इनकी आपूर्ति बाधित होने का खतरा बहुत अधिक है।

यूक्रेन के लिए क्यों बुरी खबर?

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के अनुसार, सिर्फ 3 दिनों में मध्य पूर्व में 800+ Patriot मिसाइलें इस्तेमाल हुईं। यह संख्या यूक्रेन के पूरे युद्ध (4 साल) के स्टॉक से भी ज्यादा है। अब इसका मतलब सीधा है कि यूक्रेन को भेजे जाने वाले हथियार अगर मिडिल-ईस्ट भेजे गए तो यूक्रेन की एयर डिफेंस कमजोर हो सकती है। उस पर रूस के ड्रोन और मिसाइल हमलों का खतरा बढ़ जाएगा और युद्ध का संतुलन रूस के पक्ष में झुक सकता है। इतना ही नहीं, यूरोपीय देश जो यूक्रेन के लिए पैसा दे रहे हैं, अमेरिका के इस कदम से नाराज़ हो सकते हैं।

अमेरिका के सामने असली संकट

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सिर्फ पैसे का नहीं, बल्कि उत्पादन क्षमता का भी संकट है। एक विशेषज्ञ के शब्दों में अमेरिकी “स्टॉक पहले ही कम था, अब हालात और बिगड़ गए हैं।” उन्होंने बताया कि Lockheed Martin हर साल केवल 600 इंटरसेप्टर बनाता है लेकिन ईरान जंग ने इसकी मांग बढ़ा दी है। ऐसे में अमेरिकी सरकार यूक्रेन भेजे जाने वाले हथियारों को मध्य-पूर्व की ओर भेजने पर विचार कर रही है ताकि इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर जीत हासिल कर सके। यह युद्ध अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के लिए नाक की भी लड़ाई बनती जा रही है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN