Home विश्व समाचार सीजफायर के मूड में नहीं हैं डोनाल्ड ट्रंप, बोले- ईरान को मिट्टी...

सीजफायर के मूड में नहीं हैं डोनाल्ड ट्रंप, बोले- ईरान को मिट्टी में मिला दूंगा

10
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

शुक्रवार को वाइट हाउस से प्रस्थान करते समय राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने इरादे साफ कर दिए। ईरान के साथ जारी सैन्य कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा कि हम संवाद कर सकते हैं, लेकिन मैं युद्धविराम नहीं चाहता।

Iran America War Updates: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने अब एक ऐसा मोड़ ले लिया है जहां कूटनीति और सैन्य आक्रामकता के बीच की लकीर धुंधली पड़ती जा रही है। एक तरफ जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ किसी भी तरह के युद्धविराम की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है, वहीं भारत अपने ऊर्जा हितों की रक्षा के लिए ‘बैक-चैनल’ कूटनीति के सहारे जलडमरूमध्य में फंसे अपने टैंकरों को निकालने की जद्दोजहद में जुटा है।

शुक्रवार को वाइट हाउस से प्रस्थान करते समय राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने इरादे साफ कर दिए। ईरान के साथ जारी सैन्य कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा, “हम संवाद कर सकते हैं, लेकिन मैं युद्धविराम नहीं चाहता हूं। जब आप दूसरे पक्ष को नेस्तनाबूद कर रहे हों, तब युद्धविराम जैसा कोई विकल्प नहीं होता।” ट्रंप का यह बयान संकेत देता है कि अमेरिका इस बार ईरानी सैन्य क्षमता को पूरी तरह समाप्त करने के लक्ष्य पर अडिग है।

ट्रंप ने यह भी विश्वास जताया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पूरी होने के बाद इजरायल भी युद्ध समाप्त करने के लिए तैयार हो जाएगा। हालांकि, उन्होंने ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र ‘खार्ग द्वीप’ पर हमले की योजना को लेकर रहस्य बनाए रखा और केवल इतना कहा, “मेरे पास योजना हो भी सकती है और नहीं भी।”

होर्मुज पर ट्रंप की बेरुखी

दुनिया के कुल तेल और गैस प्रवाह के पांचवें हिस्से को ढोने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) इस समय युद्ध के कारण पूरी तरह बंद है। ट्रंप ने अपने सहयोगियों और वैश्विक शक्तियों पर निशाना साधते हुए कहा कि नाटो (NATO) के पास इस संकट में मदद करने का साहस नहीं है। उन्होंने चीन और जापान जैसे देशों को भी इस जलमार्ग को खुलवाने में शामिल होने की सलाह दी है।

ट्रंप ने ब्रिटेन को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि उन्हें अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में मदद करने के लिए और तेजी से काम करना चाहिए था। यह टिप्पणी उन खबरों के बाद आई है जिनमें कहा गया था कि ब्रिटिश सरकार ने अमेरिका को ईरानी मिसाइल ठिकानों पर हमले के लिए अपने सैन्य अड्डों के उपयोग की अनुमति दे दी है। ट्रंप का यह हमला दर्शाता है कि वे अपने सहयोगियों से बिना किसी शर्त के पूर्ण समर्थन की अपेक्षा कर रहे हैं।

आपको बता दें कि भारत के अभी भी 22 जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। ट्रंप की ‘युद्धविराम नहीं’ वाली नीति से इस क्षेत्र में तनाव लंबा खिंच सकता है, जिससे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। जहां ट्रंप चीन को इस मामले में घसीटना चाहते हैं, वहीं भारत नहीं चाहेगा कि हिंद महासागर और उसके आसपास के क्षेत्रों में चीन का दखल बढ़े।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN