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श्रीजेश के लिये दरवाजे हमेशा खुले हैं, फूट डालो और राज करो नहीं चलेगा: दिलीप टिर्की

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Source :- LIVE HINDUSTAN

हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने कहा है कि पी आर श्रीजेश के लिये दरवाजे हमेशा खुले हैं और वह बेहतर अनुभव के साथ वापसी कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय हॉकी में ‘फूट डालो और राज करो’ का खेल अब बंद होना चाहिए।

हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने कहा है कि पी आर श्रीजेश के लिये दरवाजे हमेशा खुले हैं और वह बेहतर अनुभव के साथ वापसी कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय हॉकी में ‘फूट डालो और राज करो’ का खेल अब बंद होना चाहिए।

टिर्की ने भाषा को दिये विशेष इंटरव्यू में कहा, ‘हॉकी इकोसिस्टम में कुछ लोग हैं जो ‘फूट डालो और राज करो’ की रणनीति पर काम कर रहे हैं। लेकिन वे भूल जाते हैं कि मैं खिलाड़ी पहले हूं और खेल प्रशासक बाद में, तीन ओलंपिक और 412 अंतराष्ट्रीय मैच खेल चुका हूं।’

उन्होंने कहा, ‘मेरे अध्यक्ष रहते हॉकी इंडिया में सारे फैसले सामूहिक रूप से लिये गए। मेरा पहला दायित्व खिलाड़ियों के प्रति है और मनप्रीत सिंह हो या श्रीजेश, मैंने हमेशा खिलाड़ियों से सीधे बात की है। ये ओलिंपिक कप्तान रहे हैं और भारतीय हॉकी की अनमोल धरोहरें हैं।’

दो बार के ओलिंपिक पदक विजेता श्रीजेश ने सोशल मीडिया पर बुधवार को एक तल्ख पोस्ट में आरोप लगाया था कि विदेशी कोच को तरजीह देने के लिये उन्हें जूनियर टीम के कोच के पद से हटाया गया है।

यूरोप के अनुभवी कोच फ्रेडरिक सोयेज को बृहस्पतिवार को जूनियर पुरूष टीम का नया कोच बनाया गया।

टिर्की ने कहा, ‘भारत के लिये खेल चुके खिलाड़ियों के लिये हॉकी इंडिया के दरवाजे हमेशा खुले हैं, कभी बंद नहीं होंगे। हम भविष्य के बारे में सोच रहे हैं और भारतीय कोचों को बढ़ावा देने के खेल मंत्रालय के विजन पर काम कर रहे हैं। हमारी नजरें 2032 और 2036 ओलिंपिक पर है। इसमें श्रीजेश भारतीय सीनियर टीम के कोच भी हो सकते हैं लेकिन उन्हें अभी और अनुभव की जरूरत है।’

उन्होंने कहा, ‘श्रीजेश का कार्यकाल खत्म होने पर हॉकी इंडिया ने तय किया था कि नया अनुभवी कोच लाया जाये क्योंकि टीम का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा है। यह फैसला मेरे अकेले का नहीं बल्कि सर्वसम्मति से हॉकी इंडिया का था।’

भारत के महान फुलबैक और पूर्व कप्तान रहे टिर्की ने कहा कि अंडर 21 टीम काफी अहम है और इसे एक अनुभवी कोच की जरूरत है।

उन्होंने यह भी कहा कि हॉकी इंडिया को आनन फानन की बजाय सोच समझकर कोच की नियुक्ति करनी चाहिये थी। भारतीय हॉकी में कभी ऐसा नहीं हुआ था कि खिलाड़ी को संन्यास के बाद बिना अनुभव के तुरंत कोच बना दिया गया हो।

श्रीजेश ने पेरिस ओलिंपिक 2024 में ब्रॉन्ज पदक जीतने के बाद खेल से संन्यास ले लिया था जिसके बाद उन्हें जूनियर टीम का कोच बनाया गया।

टिर्की ने कहा, ‘दो बार के ओलिंपिक चैम्पियन महान डच खिलाड़ी टॉन डे नूयेर का उदाहरण है जो एचसी ब्लोमेंडाल क्लब की महिला टीम के कोच हैं। तोक्यो ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीत चुके बेल्जियम के थॉमस ब्रिल्स भी एक क्लब टीम के सहायक कोच हैं।’

टिर्की ने कहा, ‘मैंने श्रीजेश को भारत ए टीम से जुड़कर अनुभव लेने के लिये कहा था। वहां से अनुभव लेकर दो तीन साल के बाद अंडर 21 टीम या सीनियर टीम के साथ भी आ सकते हैं।’

उन्होंने कहा, ‘उनके पास हॉकी इंडिया लीग से अनुभव लेने का विकल्प भी है। मैंने यह भी कहा कि आप पुरुष टीम के राष्ट्रीय गोलकीपिंग कोच बन सकते हैं जिस पर भी वह राजी नहीं हुए।’

विदेशी कोचों को तरजीह देने के आरोप को भी खारिज करते हुए टिर्की ने कहा, ‘विदेशी कोचों के रहते हमें दो ओलिंपिक में पदक मिले हैं जिनमें सहयोगी स्टाफ भी विदेशी हैं। महिला टीम तोक्यो ओलिंपिक में विदेशी कोच के साथ चौथे स्थान तक पहुंची तो इसकी कैसे अनदेखी कर सकते हैं। भारतीय कोचों को भी महिला और अंडर 21 स्तर पर मौका दिये गए हैं।’

उन्होंने हालांकि साफ तौर पर कहा कि सभी राष्ट्रीय कोचों के प्रदर्शन की निरंतर समीक्षा होगी।

उन्होंने कहा, ‘जिस तरह जूनियर टीम के प्रदर्शन की समीक्षा जूनियर विश्व कप के बाद हुई , उसी तरह से बाकी राष्ट्रीय कोचों के प्रदर्शन की समीक्षा भी विश्व कप और एशियाई खेल जैसे बड़े टूर्नामेंटों के बाद होगी। नियम सभी के लिये समान है। हमें भविष्य के बारे में भी सोचना है और हम भारत की सभी टीमों के प्रदर्शन पर नजर रखे हुए हैं।’

टिर्की ने कहा, ‘भारतीय हॉकी के विकास के लिये सभी को मिलकर काम करना है। यही लक्ष्य होना चाहिये।’

SOURCE : LIVE HINDUSTAN