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शांति नहीं, अभी रण होगा… युद्धविराम प्रस्ताव खारिज कर बोले मोजतबा खामेनेई- दोनों को हराना जरूरी

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Source :- LIVE HINDUSTAN

इस बीच, ईरान ने अपने खाड़ी पड़ोसी देशों पर जवाबी हमले जारी रखे हैं, और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढाँचों को भी निशाना बनाया है। उसने UAE के पूर्वी तट पर स्थित फुजैराह में एक तेल संयंत्र पर हमला किया है।

ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल के साथ तनाव कम करने या युद्धविराम के प्रस्तावों को खारिज करते हुए दो टूक कहा है कि दोनों देशों यानी अमेरिका और इजरायल को हराना जरूरी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष लगातार और गंभीर होता जा रहा है। रॉयटर्स के मुताबिक, दो मध्यस्थ देशों द्वारा ईरान को तनाव कम करने के प्रस्ताव दिए गए थे, लेकिन मोजतबा खामेनेई ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि यह “शांति का समय नहीं” बल्कि जंग तेज करने और दुश्मनों को जवाब देने का समय है।

सूत्रों के मुताबिक, खामेनेई ने अपने पहले उच्च-स्तरीय सुरक्षा सत्र में अमेरिका और इज़रायल के खिलाफ कड़े प्रतिशोध की बात कही है। इस बीच इज़रायल ने दावा किया है कि उसने ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की अर्धसैनिक इकाई ‘बसीज’ के प्रमुख जनरल गुलाम रजा सुलेमानी को एक हवाई हमले में मार गिराया है। इसके साथ ही इजरायल ने ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लीजरानी को भी मारने का दावा किया है। हालांकि उनकी स्थिति को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं।

इजरायली मंत्री का दावा

इज़रायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने एक बयान में कहा कि दोनों ईरानी नेताओं को “कल रात मार गिराया गया।” इज़रायल की सेना ने इससे पहले कहा था कि उसने सोमवार को एक हमले में जनरल गुलाम रज़ा सुलेमानी को मार गिराया था। IDF ने एक बयान में कहा, “ईरान में आंतरिक विरोध प्रदर्शनों के दौरान, खासकर हाल के दिनों में जब प्रदर्शन तेज़ हुए, तो सुलेमानी की कमान में बासिज फ़ोर्स ने दमन के मुख्य अभियानों का नेतृत्व किया; इन अभियानों में भारी हिंसा, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियाँ और आम नागरिकों के खिलाफ बल का प्रयोग किया गया।”

ईरान की जवाबी कार्रवाई जारी

रिपोर्ट्स के अनुसार, दूसरी तरफ ईरान ने इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले तेज कर दिए हैं और खाड़ी क्षेत्र में कई ठिकानों को निशाना बनाया है। संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा में एक तेल सुविधा पर हमला भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता पर असर डाल रहा है।

नेतृत्व पर लगातार हमले, फिर भी सख्त रुख

हाल के हफ्तों में ईरान के कई शीर्ष नेताओं को निशाना बनाया गया है, जिससे उसके नेतृत्व ढांचे को झटका लगा है। इसके बावजूद तेहरान का रुख और अधिक सख्त होता दिख रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति युद्ध को और लंबा और जटिल बना सकती है। बहरहाल, ईरान के सर्वोच्च नेता का यह बयान संकेत देता है कि फिलहाल किसी भी तरह की शांति या समझौते की संभावना बेहद कम है। बढ़ते सैन्य हमले, नेतृत्व पर हमले और तेल ठिकानों पर निशाना साधे जाने से यह संघर्ष वैश्विक संकट में बदलने की ओर बढ़ रहा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN